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रिश्तों में जजमेंटल न बने

Posted On March - 22 - 2020

रिश्ते

मोनिका शर्मा
आपका आलोचनात्मक बिहेवियर केवल दूसरों के लिए ही नहीं, खुद अपने लिए भी मुश्किलें खड़ी करता है। हरदम जजमेंटल बने रहना खुद अपने ही व्यवहार को समझना मुश्किल बना देता है। ‘मुझे सब पता है’ की सोच वाली यह आदत सही समझ के रास्ते ही बंद कर देती है।
खुद को समझने की मुश्किल
कई बार अनजाने में ही आप रिश्तों-नातों में जुड़े लोगों को लेकर जजमेंटल होने लगते हैं। उनकी बातों और हालातों के मायने अपनी सोच के मुताबिक़ समझने लगते हैं। जबकि हकीकत कुछ और ही होती है। इसीलिए किसी के प्रति कोई धारणा बनाने से पहले खुद अपने आप को समझना-परखना जरूरी है। औरों को अच्छे से जानने की गलतफहमी अक्सर खुद को समझने की राह में ही बाधा बन जाती है।
जुड़ाव में बाधा
अपने हों या पराये, बिना किसी को जाने समझे जज करने की सोच कभी मन का जुड़ाव नहीं बनने देती। ‘यह तो ऐसा ही है’ या ‘वो तो वैसी ही होगी’ जैसी सोच रिश्तों को बनने से पहले ही बिगाड़ देती है।
कभी-कभी तो आपकी सोच अनचाही उलझनें भी पैदा कर देती है, जिनका कोई आधार ही नहीं होता। देखने में आता है कि जजमेंटल होने की आदत रिश्ते बनने से पहले ही बिगाड़ देती है। इतना ही नहीं, करीबी रिश्तों में भी आपकी यह पूर्वाग्रही सोच दरार पैदा कर देती है। इसीलिए दूसरों के बारे सोची हर बात या अनुमान को मन में घर बनाने का मौका मत दीजिये। हर वक्त व्यावहारिक होकर सोचिये। समय और हालात आपको खुद ही उनके बारे में सब समझा देंगे। हां, आपकी यह संतुलित सोच हर पल रिश्तों को सहेजने में जरूर कामयाब रहेगी ।
हालात भी समझिये
जजमेंटल बनने से पहले खुद को सामने वाले इनसान की जगह रखकर देखिये। यह समझिये कि उसका व्यवहार किन बातों से प्रभावित है? विचारों को दिशा देने वाली वजहें क्या हैं? ख्याल रखिये कि किसी की रूखी प्रतिक्रिया, नेगेटिव विचार या गुस्सैल स्वभाव आदि के पीछे कई कारण होते हैं।
इसीलिए किसी को जाने-पहचाने बिना उनकी छवि बिगाड़ने या कुछ नकारात्मक कहने की गलती से आगे चलकर आपको पछतावा हो होगा। जरूरी है कि अपने हों या पराये, दूसरों के हालात समझने की सोच ही अपनाई जाये। यह आपको उनका मददगार भी बना सकती है। इतना ही नहीं, जजमेंटल बने बिना किसी का साथ देना आपको भी सकारात्मक सोच की सौगात देने वाला साबित होगा। रिश्तों को सहजता से जीने और स्वीकार करने की सोच की बुनियाद बनेगा।


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