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फ्लैशबैक

Posted On March - 14 - 2020

हिंदी फीचर फिल्म : हम हिंदुस्तानी

शारा
फिल्म की शुरुआत बैक ग्राउंड म्यूजिक से होती है ‘छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी, नये दौर में लिखेंगे हम मिलकर नयी कहानी, हम हिन्दोस्तानी’ गाना नेपथ्य में चल रहा है और भाखड़ा नंगल डैम के निर्माण कार्य के शॉट्स दिखाए जा रहे हैं, जनसभाओं को संबोधित करते हुए पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी हैं—फिल्म की शुरुआत ही कथानक की नब्ज़ बता देती है कि फिल्म नेहरूवादी सोच पर आधारित है कि जो नेहरू जैसे रहनुमाओं ने देश के लिए किया, सो किया लेकिन युवा वर्ग अब देश की तरक्की की नयी इबारत घड़ेगा, विकास के आसमां में कुछ नये चांद जोड़ेगा और देश की नयी तकदीर की कुंडली खुद बनाएगा। इसके लिए पुराने मूल्यों को ढाेकर नये मूल्य स्थापित करने होंगे। पुरानी बाप-दादाओं की हवेलियों को बचाने के लिए आप नयी पीढ़ियों के मुस्तक्बिल को दांव पर नहीं लगा सकते। फिल्म में मशीनीकरण की आमद को खुले दिल से स्वागत करने पर ज़ोर दिया गया है जबकि आज़ादी से पहले वाली पीढ़ी उनकी उस सोच को यह कहकर नकारती है कि मशीनों के आने से कई हाथ बेकार हो जाएंगे जबकि नयी पीढ़ी ऐसा नहीं कहती है कि उनके बुजुर्गों के तजुर्बी हाथ किसी बेहतर काम में लगाए जाएं। यह दो पीढ़ियों के बीच की दूरी विषय पर आधारित फिल्म है, जिसमें राष्ट्रीयता, देशभक्ति, सामाजिक सरोकारों पर निर्देशक ने रोमांस का छौंक लगाया है कि अमीर घर की लड़की की सोच भी साम्यवादी हो सकती है और वह गरीब घर के लड़के से भी प्यार करके शादी कर सकती है, भले ही वह लड़का मिल मज़दूर ही हो, फिर लड़की को इश्क करने वाला किताबें भी लिखता हो, क्रांतिकारी दृष्टिकोण वाली किताबें तो सोने पर सुहागा। फिल्म में गेटवे ऑफ इंडिया से लेकर मुंबई का विक्टोरिया टर्मिनस, म्यूनिसिपल मोनेमेंट्स सब कुछ इसमें दिखाया गया है। निर्देशक ने विषय को सीन दर सीन, फ्लैश दर फ्लैश समझाया है। इसके निर्देशक थे राम मुखर्जी, शशधर मुखर्जी के भाई रवीन्द्र मोहन मुखर्जी के बेटे और जॉय मुखर्जी के कज़न, रानी मुखर्जी के बाप। उनके पिता रवीन्द्र मोहन मुखर्जी फिल्मालय के फाउंडर मैम्बर्स में से एक थे। ध्यान रहे कि बम्बई टॉकीज के मालिक हिमांशु राय और देविका रानी के बीच खटपट होने के फलस्वरूप बम्बई टॉकीज से जुड़े अशोक कुमार और शशधर मुखर्जी आदि ने मिलकर ‘फिल्मीस्तान’ नामक प्रोडक्शन हाउस की स्थापना की थी। अशोक कुमार की बहन सती देवी शशधर मुखर्जी को ब्याही हुई है। इसलिए फिल्मीस्तान की स्थापना में मुखर्जी परिवार और गांगुली परिवार बराबर शामिल था। बाद में मुखर्जी बंधुओं खासकर शशधर मुखर्जी ने फिल्मालय की स्थापना कर डाली, जिसमें कई नये चेहरों को चांस दिया। संजीव कुमार, प्रेम चोपड़ा, आशा पारेख आदि ऐसे ही नाम हैं। रानी मुखर्जी के पिता फिल्मालय में स्िक्रप्ट राइटिंग का काम करते थे। हम हिन्दोस्तानी उन्हीं की निर्देशित फिल्म है जो उनके विचारों को शब्द देती है। यह फिल्म महज पारिवारिक कहानी नहीं, बल्कि विचारोत्तेजक विषय है—तत्कालीन समय के लिहाज़ से काफी आगे।
कहानी शुरू होती है पुरानी हवेली से जहां दो भाई सुरेंद्र नाथ (सुनील दत्त) और सत्येन्द्र नाथ (जॉय मुखर्जी) अपने मम्मी, डैडी तथा बहन के साथ रहते हैं। नाथ परिवार बड़े ही बुरे समय से गुज़र रहा है क्योंकि जिस घर में वे रहते हैं वह और उनकी अन्य पारिवारिक प्रॉपर्टी पर कोर्ट में मुकदमा चल रहा है और एकाध प्रॉपर्टी के मामले में नाथ परिवार कोर्ट में केस हार गया है। घर में खाने के लाले पड़े हुए हैं और बाहर फैमिली की शानोशौकत बरकरार है। उस पर नाथ परिवार की मुसीबतों में और इजाफा हो जाता है, उनकी समाज के सामने तब नाक कट जाती है जब अपने कार्यस्थल से 10000 रुपये चुराने के जुर्म में पुलिस सत्येन्द्र को गिरफ्तार कर लेती है। जबकि पैसे सत्येन्द्र ने नहीं चुराये हैं। वह सोचता है कि पारिवारिक तंगी के कारण यह काम उसके भाई सुरेंद्र नाथ ने किया है। इसलिए चोरी का इल्जाम अपने सिर ले लेता है, जिससे सारा परिवार सकते में आ जाता है। अब उनकी आखिरी उम्मीद कोर्ट के फैसले पर टिकी है। पैसे किसने चुराये हैं, सुरेन्द्र का इश्क आशा पारेख से होता है या हेलन से—कहानी के सस्पेंस का आनंद खुद लीजिए। वैसे चलते-चलते मैं दर्शकों को बताती चलूं कि इस फिल्म के बाद हेलन को किसी निर्देशक ने चरित्र-भूमिका की पेशकश नहीं की, वह गानों पर नाचने वाली नर्तकी बनकर रह गयी।
निर्माण टीम
प्रोड्यूसर : शशधर मुखर्जी
निर्देशक : राम मुखर्जी
संवाद : आनंद दत्ता
गीतकार : भरत व्यास, साहिर लुधियानवी, प्रेम धवन, राजेंद्र कृष्ण, के. मनोहर।
संगीतकार : ऊषा खन्ना
सितारे : सुनील दत्त, जॉय मुखर्जी, आशा पारेख, हेलन और संजीव कुमार आदि।

गीत
नीली नीली घटा, ओ भीगी भीगी हवा : मुकेश, आशा भोसले
रात निखरी हुई, जुल्फ बिखरी हुई : मुकेश
छोड़ो कल की बातें, कल की बात पुरानी : मुकेश
हम जब चले तो जहां झूमे : मोहम्मद रफी
माझी मेरी किस्मत के : लता मंगेशकर
चोरी-चोरी तोरी आई है : लता मंगेशकर
तू लागे मोरा बालम : ऊषा खन्ना, गीता दत्त
बालमा रे हाय : आशा भोसले
छेड़ो न मोहे कान्हा : लता मंगेशकर


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