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फिज़ूलखर्ची में खर्च होते रिश्ते

Posted On March - 15 - 2020

रिश्ते

शिखर चंद जैन
अक्सर लोग कहते हैं, क्या करें हमारे हाथ में तो पैसा टिकता ही नहीं। पुरखों ने कहा है कि समझो बचाया सो कमाया। लेकिन एक सर्वे के मुताबिक 30 वर्ष से कम आयु के 52 फीसदी युवा दंपतियों में खर्चीलेपन के लिए आपस में आए दिन झगडे होते हैं। जबकि 40 प्लस के दंपतियों में यह दर 34.9 फीसदी पाई गई।
जानकारों का मानना है कि भारत में ओवर-शॉपिंग की आदत एक महामारी की तरह फैल रही है। कुछ लोग कंपलसिव बायर होते हैं जो हर सामान खरीदने की चाहत रखते हैं। वहीं कुछ लोग शो ऑफ करने के लिए खरीदते हैं, कुछ लोग बड़े डिस्काउंट पर मिलने वाला कोई भी सामान खरीद लेते हैं, चाहे उन्हें इसकी ज़रूरत हो या नहीं।
ई रिटेलर्स और ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा ने इस स्थिति को और भी बिगाड़ दिय़ा है। कभी-कभी यह आदत न केवल संबंधों में दरार डाल देती है बल्कि बेवजह के तनाव और चिंता का सबब भी बन जाती है। आखिर हम फिज़ूलखर्ची क्यों करते हैं?
लोकप्रियता और ईगो सेटिसफैक्शन के लिए
कुछ लोग अपने बिजनेस सर्किल, फ्रैंड्स औऱ रिश्तेदारों में लोकप्रियता हासिल करने व इम्प्रेशन जमाने के लिए महंगे सामान खरीदते हैं और उन्हें उपहार स्वरूप देते हैं। वहीं कुछ लोग सेल्समैन द्वारा झूठी प्रशंसा सुनकर अपने अहं की तुष्टि के लिए ऐसा करते हैं।
आत्मविश्वास बढ़ाने की कोशिश
आत्मविश्वास में कमी के कारण भी कुछ लोग अनाप शनाप कपड़े, एसेसरीज़, मोबाइल व अन्य एप्लायंसेज खरीद कर खुद को भुलावा देते हैं कि वे जिंदगी में कुछ बड़ा कर रहे हैं।
रिलैक्स फील करने की कोशिश
हफ्ते भर तक भागदौड़ और मेहनत के बाद कई लोग शॉपिंग मॉल्स में घूमने-फिरने और खाने-पीने निकल जाते हैं। वहीं रिलैक्स फील करने की कोशिश में अनाप शनाप खरीददारी भी कर डालते हैं।
डिस्काउंट का लाभ लेने की कोशिश
बड़े ब्राण्ड और बड़े शॉपिंग मॉल खूब अच्छी तरह जानते हैं कि आदतन खरीददारों को कैसे लपेटा जाए। वे अपनी डिस्काउंट स्कीम को बढ़ा-चढ़ाकर बताते हैं। कंपलसिव बायर आसानी से उनके चक्कर में फंस जाता है और इस मौके को चूक न जाएं, सोचकर आननफानन में सामान खरीद लेता है।
अमीर दिखने की कोशिश
महंगे कपड़े और गैजेट्स खरीदने पर अमीरों जैसी फीलिंग आती है और दूसरों के सामने अमीर दिखने की कोशिश में भी लोग महंगे सामान खरीदते हैं।
बच्चों का दिल जीतने की कोशिश
कई पेरेंट्स अपने बच्चों को क्वालिटी टाइम नहीं दे पाते, इसलिए उस अपराधबोध से उबरने और उसकी भरपाई करने के लिए उनके लिए महंगे गिफ्ट खरीद कर देते हैं। वे अपने बच्चों का दिल जीतने की कोशिश में ऐसा करते हैं।
दूसरे की होड़ न करें
आपको हर वो चीज़ खरीदना ज़रूरी नहीं है, जो आपके साथी या पड़ोसी ने खरीदी है। अगर आपका काम सामान्य मोबाइल फोन से चल रहा है तो ज़रूरी नहीं कि आप किसी महंगे एंड्रॉयड या आइफोन का प्लान बनाएं। घर औऱ ऑफिस दोनों जगह पीसी हैं तो दोस्त की नकल करके लैपटॉप खरीदने की ज़रूरत नहीं।
मस्ती के लिए न खरीदें
कुछ लोग शॉपिंग थेरेपी से रिलैक्स करने की कोशिश करते हैं। स्ट्रेस भरे दिन के बाद शाम को मौज मस्ती के लिए मॉल जाते हैं और वहां अनाप शनाप आइटम खरीदकर स्ट्रेस से मुक्त होने का प्रयास करते हैं, जो पैसों की कमी के कारण दोगुना होकर उनके पास आ जाता है।
कार्ड घर पर रख दें
शोध बताते हैं कि जेब में क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड रहने पर लोग ज़रूरत से ज्यादा खरीद डालते हैं। चूंकि उस वक्त उन्हें जेब से नकद रुपये नहीं निकालने पड़ते। इसलिए उन्हें खर्च होने का वास्तविक अहसास नहीं होता। कुछ लोग तो क्रेडिट कार्ड पर जीवनसाथी या बच्चों की फोटो लगाने की राय देते हैं ताकि भविष्य की प्लानिंग सामने आ जाए और आप फिजूलखर्ची न करें।
निवेश की आदत डालें
जब आपको अपने बैंक में बैलेंस ज्यादा नज़र आता है या हाथ में पैसे अधिक दिखते हैं तो खर्च ज्यादा होता है। बेहतर होगा कि हर महीने एक तय रकम निवेश करने की आदत डालें ताकि आपको खर्च के लिए लिक्विड मनी कम नज़र आए। निवेश और खर्च दोनों में पार्टनर से सलाह लेना न भूलें।
निर्णय लेने के बारे में सोचें
जब भी कोई महंगी चीज खरीदने का ख्याल दिल में आए तो अपना निर्णय हड़बड़ी में न लेकर धैर्यपूर्वक सोचें। विशेषज्ञों की राय में बड़ी रकम खर्च करने में कम से कम 20-25 दिन का समय लेना चाहिए। इस बीच गंभीरता से सोचकर देखें कि क्या वाकई आपको उस चीज की जरूरत है? इससे कई बार आप फिजूलखर्ची से बच जाएंगे।
खरीदने से पहले खुद से पूछिए
क्या यह आपके लिए सचमुच उपयोगी है? कोई सामान खरीदने से पहले अच्छी तरह सोच लें कि क्या इसके बिना आपका काम कतई नहीं चल सकता? क्या आप इसे दीर्घ अवधि के लिए इस्तेमाल करेंगी?
क्या इस पैसे का बेहतर उपयोग संभव है?
अगर बड़ी रकम की चीज खरीदी नहीं है तो सोचकर देखिए कि आपके लिए यह सामान खरीदना ज्यादा ज़रूरी है या फिर इसे न खरीदकर बचे हुए पैसे को कहीं निवेश करना बेहतर होगा? या फिर अगर आप पर कोई तो उसे चुकाना ठीक रहेगा।


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