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घुमक्कड़ ज़िंदगी

Posted On March - 15 - 2020

सुमन बाजपेयी
घूमना या देश-विदेश की यात्रा करना शायद ही ऐसा कोई हो, जिसे पसंद न हो। इसीलिए इतनी नई ट्रेवल डेस्टीनेशंस इन दिनों देखने को मिल रही हैं। नई-नई चीजों को एक्सपलोर करना, नए-नए लोगों से मिलना, उनकी संस्कृति, रहने के ढंग, खाने, पहनावे से लेकर उनके रीति-रिवाजों व कलाओं से परिचित होना अपने आप में एक बेहतरीन अनुभव होता है।
पिछले एक दशक या उससे पहले के कुछ वर्षों पर नज़र दौड़ाएं तो पाएंगे कि सोलो वूमेन ट्रेवलर के चलन ने जोर पकड़ा था। पर हाल के वर्षों में जब से ब्लॉगिंग और इंस्टाग्राम और फेसबुक पोस्ट की होड़ लगनी शुरू हुई है, युगल यात्राओं पर निकल पड़े हैं। कितने युगल ऐसे हैं, जिन्होंने अपने घूमने के शौक के जुनून में एक नया रोमांच भरने के लिए अपनी नौकरियां तक छोड़ दीं। मिलते हैं ऐसे ही कुछ यायावर युगलों से जो हमेशा बैग पैक कर एक नए सफर पर जाने को तैयार रहते हैं।
संदीपा-चेतन कारखानीस
रोमांच से भरी जिंदगी
कंधे पर हमेशा झोला लटकाए यात्रा पर निकलने को तैयार संदीपा और चेतन मुंबई में रहने वाले ऐसे युगल हैं, जिन्होंने न सिर्फ इलेक्ट्रोनिक इंजीनियर की अपनी अच्छा वेतन देने वाली नौकरी छोड़ी, वरन अपना घर तक बेच दिया। अब वे संदीपाचेतनडॉटक़ॉम नाम से अपना ब्ल़ॉग चलाते हैं, जो 2014 में उन्होंने शुरू किया था। चेतन एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर के रूप में अपना शौक पूरा करने में लगा हुआ है। डिजिटल मीडिया में रुचि होने के कारण यात्रा के दौरान यह काम आता है। तीन वर्ष से भी कम समय में उनका ब्लॉग देश में तीसरा सबसे लोकप्रिय ब्लॉग बन गया था। संदीपा का कहना है कि हम दोनों का घूमने का शौक ही हमें एक-दूसरे के करीब लाया था। नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने फैसला किया। अगर यह कदम गलत भी हुआ तो वापस हमें नौकरी मिल जाएगी। संदीपा का कहना है कि शुरुआत में ब्लॉगिंग में पैसा नहीं आता, जब तक आप उसे भी एक बिजनेस की तरह न समझें। आपको पता होना चाहिए कि आपको क्या बेचना है, आपको पढ़ने वाले कौन हैं। किस तरह की सर्विस आप देना चाहते हैं और पाठकों को क्या परोस रहे हैं। उनका कहना है कि हम अपनी यात्राओं के अनुभव लोगों के साथ साझा करना चाहते हैं क्योंकि किसी भी यात्रा का सबसे बड़ा हिस्सा यादें ही होती हैं। उनका ब्लॉग यही बताता है कि लोग जब यात्रा करते हैं तो किस तरह से बेहतरीन यादें संजो कर रख सकते हैं।
वे बिल्कुल सादा जीवन जीते हैं, अपने पास कम से कम सामान रखा हुआ है और उनमें इतना जोश है कि सफर के दौरान आने वाली हर परिस्थिति का सामना करने को तैयार रहते हैं। ज्यादातर सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करते हैं और होमस्टे में रहते हैं। उन्हें पर्वतों, समुद्र तटों और रेगिस्तानों में घूमना पसंद है। बड़े शहरों में संकरी गलियों को जानना-समझना और फिर उनके बारे में लिखना—एक पूरी संस्कृति को जीने की तत्परता इनमें दिखाई देती है।
चंद्रेयी बंधोपाध्याय-जॉयदीप मंडल
एक्सप्लोर करना चाहते हैं दुनिया
मुंबई में रहने वाली 28 वर्षीय पीआर प्रोफेशनल चंद्रेयी बंधोपाध्याय और आर्किटेक्ट जॉयदीप ने घूमने के लिए बेशक अपनी नौकरियां नहीं छोड़ीं, लेकिन जब उन्हें लगता है तो वे बीच-बीच में ब्रेक ले लेते हैं। 12 साल से एक-दूसरे को जानने वाले ये दोनों, अपने डेटिंग के समय में जब भी एक-दूसरे से मिलते थे तो अलग-अलग स्थानों पर घूमने का प्रोग्राम बनाते थे। तब चंद्रेयी मुंबई में रहती थीं और जॉयदीप बंगलौर में। इसलिए वे मिलने के लिए किसी ऐसी जगह को चुनते, जिसे वे एक्सपलोर कर सकें। जहां वे जाते थे वहां की फोटो खींचते तो उन्हें लगा कि इन्हें दूसरों के साथ बांटना भी चाहिए। वे कभी भी प्लान करके कहीं घूमने नहीं जाते।
एक रात गोवा में उन्हें समझ आया कि अपनी बंधी-बंधाई नौकरी में सुबह से शाम तक काम करने के बजाय उन्हें घूमने में ज्यादा आनंद आ रहा है। तब उन्होंने उसी रात जब पूरा चांद निकला हुआ था, तब 2016 में अपना ब्लॉग बनाने का निश्चय किया। और उसे नाम दिया ‘मून चेज़र्स’। उसके बाद उन्होंने अपनी यात्राओं के बारे में इंस्टाग्राम और विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में देना शुरू किया। यू ट्यूब पर वीडियो डालने लगे। आरंभ में उन्हें कुछ खास रिस्पांस नहीं मिला, पर धीरे-धीरे ब्रांड उनसे अपने लिए वीडियो बनाने के लिए कहने लगे। उन्होंने सिनेमैटिक विजुअल तैयार किए, नए अंदाज से लिखा। अगले साल उनका प्लान है कि वे 100 दिनों की यात्रा करें, चाहे देश में या विश्व भर की।
निशा झा-वासुदेवन राघवचारी
दुनिया को जानना चाहते हैं अपनी नज़र से
मुंबई निवासी इस युगल के लिए घूमना अगर एक तरफ जुनून है तो दूसरी ओर लोगों से मिलकर, नई-नई जगहों को देखकर ये रिलैक्स हो जाते हैं। निशा का कहना है कि उन्होंने घूमने के लिए अपनी नौकरियां नहीं छोड़ी थीं, क्योंकि इस तरह जीना संभव नहीं था और पैसे कमाने के लिए नौकरी ज़रूरी थी। पिछले 30 सालों से दोनों घूम रहे हैं, क्योंकि उनके पास अच्छी नौकरी थी। लेकिन 14 वर्षों से जब ब्लॉगिंग के बारे में कोई जानता तक नहीं था, उस समय उन्होंने अपना ब्लॉग शुरू किया। असल में जब वे कहीं जाने से पहले जगह की जानकारी लेने के लिए कुछ पढ़ते थे, तो उन्हें संतोषजनक चीजें नहीं मिलती थीं। तब इन्होंने सोचा कि इन्हें कुछ अलग ढंग से सारी सामग्री देनी होगी। ये एक ही जगह पर कई बार गए, वहां के हर पहलू को समझा-जाना और फिर लिखा। फिर निशा को विभिन्न टूरिज्म बोर्ड, एयरलाइंस व अनेक देश मेहमान के रूप में बुलाने लगे ताकि वे वहां जाकर उनके बारे में लिखें। स्पेन, मलेशिया, थाइलैंड, इज़रायल, जॉर्डन, अबू धाबी, इंडोनेशिया, सिंगापुर, पोलैंड—उनकी यात्राओं का सिलसिला एक बार जो शुरू हुआ तो आज तक चल रहा है।
वासुदेवन भी धीरे-धीरे अपने कॉरपोरेट कल्चर की नौकरी से जब उकताने लगे तो सक्रियता से निशा के साथ ट्रेवल करने लगे। युवा दिनों से ही फोटोग्राफी का शौक रखने वाले वासुदेवन ने उसे अपनी यात्राओं का हिस्सा बना लिया। आज उनका लेमनिक्स डॉट कॉम ब्लॉग सर्वश्रेष्ठ ट्रेवल ब्लॉग में से एक है।
अमेरिकन लाइव रेडियो ट्रेवल टॉक शो, स्पेनिश टीवी, टाइम्स वर्ल्ड ट्रेवल मैगजीन आदि में उनके साक्षात्कार आ चुके हैं। पचास पार कर चुके ये दोनों पति-पत्नी हर जगह को इस तरह जीते हैं, मानो वहां की हर चीज को आत्मसात करना चाहते हों।
नीति गंदोत्रा-रमनदीप सिंह
जीवनशैली ही बदल डाली
2012 में जब इनकी शादी हुई थी तो दोनों ही कॉरपोरेट जगत का हिस्सा थे। दोनों को ही यात्रा पर निकल जाना पसंद था। लेकिन जब भी वे बाहर जाते तब भी लैपटॉप साथ होता था, उन्हें अहसास हुआ कि वे बाहर आकर भी ऑफिस का ही काम कर रहे हैं। उन्हें लगा कि उनका समय तो उनका है ही नहीं। वे कहीं भी चैन से घूम नहीं पाते हैं। उन्होंने तय किया कि उन्हें ऐसी जिंदगी नहीं चाहिए। रमन कहते हैं कि इसलिए हमने दो साल पहले नौकरी छोड़ दी। वे बिना प्लान किए कहीं भी निकल जाते और कम से कम 10 दिन तो एक जगह पर बिताते। उनके साथ उनका कुत्ता भी जाता है। अपना एक यूट्यूब चैनल बनाया, जिस पर वे हफ्ते में तीन वीडियो डालते हैं। रमन ने एक कैमरा खरीदा और फोटोग्राफी का सिलसिला शुरू हो गया। नीति बताती हैं कि पिछले साल हम गोवा गए थे और वहां दो महीने रहे। घुमक्कड़ी जीवन ने उनकी जीवनशैली ही नहीं, उनकी सोच भी बदल डाली है और वे सीमित संसाधनों में जीने के आदी हो चुके हैं। हालांकि उन्हें लोगों के सवालों को झेलना पड़ा कि बिना नौकरी के कैसे रहोगे। पर वे हर दिन नई चुनौती का सामना करने को तत्पर हैं।
तारा नंदीक्कारा-गौतम राजन
हर पल रोमांच
बंगलौर में रहने वाले अपने क्लूलेस कंपास (clueless compass.com) ऑनलाइन पोर्टल चलाने वाले युगल तारा और गौतम 2014 से साथ यात्रा कर रहे हैं और अब तक भारत के 20 राज्य और 19 देशों की यात्राएं कर चुके हैं। उनके लिए घूमना उतना ही ज़रूरी है, जितना कि सांस लेना। उनका ब्लॉग जिसकी टैग लाइन है-‘बीकॉज अर्थ इज वर्थ इट’ देश-विदेश में यात्रा के प्रति उत्साही लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
तारा कहती है 2012 में जब हम दोनों की मुलाकात फेसबुक पर हुई तो उस दौरान यात्रा पर कभी कोई बात होती ही नहीं थी, केवल फिल्मों पर ही चर्चा होती थी। शादी के बाद हनीमून के लिए हम राजस्थान गए। दो महीने बाद हमें लगा कि हमें फिर से हनीमून मनाने के लिए विदेश जाना चाहिए और उसके बाद यह सिलसिला रुका नहीं।
पेशे से पत्रकार तारा ने पिछले साल नौकरी छोड़ दी, हालांकि गौतम अभी एक ऑटोमोबाइल कंपनी के लिए काम कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि जीवन की आम जरूरतें पूरी करने के लिए एक बंधी-बंधाई आय की ज़रूरत होती है। एक साल पहले ही उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपने अनुभवों को बांटना शुरू किया है। गौतम बेहतरीन फोटोग्राफी करते हैं और अपनी यादों को उसमें कैद कर हर बार एक नए सफर पर जाने को तैयार रहते हैं। उनका कहना है कि हम बहुत ही कम बजट में अपनी यात्राएं प्लान करते हैं, सार्वजनिक वाहन का इस्तेमाल करते हैं और सस्ते होटलों में रहते हैं। जहां भी जाते हैं, उसके चप्पे-चप्पे से वाकिफ होने की उनकी कोशिश रहती है, ताकि उस जगह को जानने का कोई भी पहलू उनसे छूटे नहीं। हर समय एक नए रोमांच को जीने के लिए तैयार रहता है यह युगल।


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