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गलत डेबिट पर बैंकिंग लोकपाल के पास जाएं

Posted On March - 15 - 2020

उपभोक्ता अधिकार

पुष्पा गिरिमाजी
एक माह पहले मैंने एक एटीएम से 15 हज़ार रुपये निकालने की कोशिश की। मशीन से कैश नहीं निकलने के बावजूद मेरे अकाउंट में ‘डेबिट’ दिखने लगा। मैंने बैंक से त्रुटिपूर्ण डेबिट को सही करने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने इस बात की पुष्टि करने की कोशिश की कि धन मुझे मिल गया है, साथ ही यह कहते हुए कि उनके कंप्यूटर ने लेनदेन को सफल दिखाया है और एटीएम में कोई अतिरिक्त नकदी नहीं थी, उन्होंने गलती सुधारने से इनकार कर दिया। मैंने उनसे सीसीटीवी फुटेज मांगे, लेकिन उन्होंने मना कर दिया। मुझे क्या करना चाहिए?
एटीएम लेन-देन की सीसीटीवी कवरेज ऐसे विवाद के समय सबसे अहम सबूत है और यह बैंक का कर्त्तव्य है कि वह इन्हें आपको दे। इसके लिए बैंक के नोडल अधिकारी को लिखें और उनसे हस्तक्षेप की मांग करें। यदि वहां से मदद नहीं मिलती है तो बैंकिंग लोकपाल के पास शिकायत दर्ज कराएं।
क्या उपभोक्ता अदालत में जाना बेहतर नहीं होगा?
इस तरह के विवादों के मामलों में, मैं बैंकिंग लोकपाल के पास जाने की ही सिफारिश करूंगी। लोकपाल के पास ऐसे विवादों के समाधान की आसान एवं जल्द निपटारे का तरीका होता है। आपकी तरह के मामलों में उपभोक्ता अदालत के निर्णय बहुत सकारात्मक नहीं रहे हैं।
शीर्ष उपभोक्ता अदालत का एक हालिया आदेश इस संदर्भ में एक उदाहरण है। आपके मामले की तरह, यहां भी बैंक ने तर्क दिया कि उनके रिकॉर्ड के अनुसार ट्रांजक्शन सफल रहा और एटीएम में कोई अतिरिक्त पैसा नहीं था, जिससे साबित होता है कि ग्राहक ने पैसा ले लिया था। इस केस में भी बैंक ने सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं कराए।
अब यह भी संभव है कि कुछ देर बाद एटीएम से पैसे निकल गए हों और ग्राहक के जाने के बाद उसे किसी और ने ले लिया हो। जब आप एटीएम से पैसे निकालते हैं तो ऐसे कई तरीकों से जालसाज महत्वपूर्ण जानकारी एकत्र कर लेते हैं जैसे कि एटीएम पिन नंबर आदि। आपके चिप लगे एटीएम कार्ड से आज कई तरीकों से डेटा चुराया जाता है। उदाहरण के लिए, इसकी परत से चीजों को उठा लेना इसका एक उन्नत और अधिक परिष्कृत रूप है। दूसरे शब्दों में, एटीएम धोखाधड़ी अधिक परिष्कृत होती जा रही है और इसलिए सीसीटीवी फुटेज ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।
इस तरह इस केस में राज्य स्तर पर उपभोक्ता अदालत ने सीसीटीवी फुटेज को पर्याप्त महत्व नहीं दिया और बैंक के पक्ष में आदेश दिया। राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा, ‘केवल इसलिए कि सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं था, इसका मतलब यह नहीं कि एटीएम कार्ड और पिन का उपयोग कर धोखाधड़ी से पैसा निकाल लिया गया। यह संभव नहीं है कि किसी गैर अधिकृत व्यक्ति द्वारा एटीएम से पैसा निकाल लिया जाये।’
राष्ट्रीय आयोग ने निष्कर्ष निकाला और कहा कि पैसा नहीं मिल पाने की बात को सिद्ध करना ग्राहक की जिम्मेदारी है, जिसे कर पाने में वह असफल रहा (संदीप बनाम शाखा प्रबंधक पंजाब नेशनल बैंक 24 जनवरी 2020 के आदेश में 2013 के आरपी नंबर 2298)। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बनाम केके भल्ला (7 अप्रैल 2011 के आदेश में 2008 के आरपी नंबर 3182) में भी शीर्ष उपभोक्ता अदालत ने ऐसा ही फैसला सुनाया।
लोकपाल द्वारा निपटाई गई शिकायतों और वार्षिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित मामले इसके उलट हैं। उदाहरण के लिए आपके ही जैसे एक मामले में लोकपाल ने सीसीटीवी फुटेज के जरिये पाया कि मशीन से एक मिनट 28 सेकेंड के बाद पैसा निकला और तब तक उपभोक्ता वहां से निकल चुका था। यह मानते हुए कि उपभोक्ता मशीन की गलती के लिए उत्तरदायी नहीं है, बैंक को उपभोक्ता के खाते में 10,000 रुपये क्रेडिट करने के लिए कहा गया था।
एक अन्य मामले में शिकायत थी कि जैसे ही उपभोक्ता ने पिन डाला, एटीएम स्क्रीन बंद हो गयी। एटीएम कियोस्क में कोई सुरक्षा कर्मचारी भी नहीं था और बाहर से ट्रांजेक्शन देख रहे एक व्यक्ति ने सलाह दी कि उसे टोल फ्री नंबर पर अपना कार्ड ब्लॉक करा लेना चाहिए। इसके तुरंत बाद वह कियोस्क से बाहर निकल गया और उसके पास एक मैसेज आया कि उसके 20 हजार रुपये खाते से निकल गए हैं। इस मामले में भी बैंक ने यही तर्क दिया कि ट्रांजेक्शन सफलतापूर्वक हो गया है, लेकिन सीसीटीवी फुटेज से यह सिद्ध हो गया कि उपभोक्ता सही बोल रहा था और एटीएम पर धोखाधड़ी संबंधी गतिविधि को देखने के लिए कोई सुरक्षाकर्मी भी नहीं था। इसलिए बैंक से विवादित राशि को क्रेडिट करने के लिए कहा गया। इसलिए उपभोक्ता अदालतों के विपरीत, लोकपाल सीसीटीवी फुटेज पर जोर देगा। यदि बैंक के पास फुटेज नहीं है, तो उसे एटीएम लेनदेन के सीसीटीवी कवरेज को सुनिश्चित नहीं करने के परिणामों के लिए भुगतान करना होगा। इसलिए आपको पहले लोकपाल के पास जाना चाहिए।


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