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एकदा

Posted On March - 25 - 2020

सहनशीलता का महामंत्र

जापान के सम्राट यामातो का एक राज्यमंत्री था—ओ-चो-सान। उसका परिवार सौहार्दता के लिए काफी प्रसिद्ध था। उसके परिवार में लगभग एक हजार सदस्य थे। उनमें द्वेष-कलह का नामोनिशान नहीं था। सान के परिवार की सौहार्दता की बात यामातो के कानों तक पहुंची। सत्यता की जांच के लिए एक दिन वह स्वयं उस मंत्री के घर पहुंच गये। स्वागत, सत्कार और शिष्टाचार की साधारण रस्में समाप्त हो जाने पर उन्होंने पूछा—महाशय! मैंने आपके परिवार की एकता और मिलनसारिता की कहानियां सुनी हैं। आप बताएं कि इतने बड़े परिवार में यह सौहार्दता व स्नेह संबंध किस तरह बना हुआ है? ओ-चो-सान वृद्धावस्था के कारण बोल पाने असमर्थ थे तो उन्होंने अपने पौत्र को संकेत से कलम-दवात लाने को कहा। वृद्ध ने कांपते हाथों से कोई सौ शब्द लिखकर वह कागज सम्राट यामातो की ओर बढ़ा दिया। सम्राट ने कागज पर नजर डाली तो वे हैरान रह गये। कागज में एक ही शब्द को सौ बार लिखा गया था—सहनशीलता, सहनशीलता, सहनशीलता। सम्राट को हैरान देखकर ओ-चो-सान ने कांपती हुई आवाज में कहा—महाराज, मेरे परिवार की सौहार्दता का रहस्य इसी एक शब्द में निहित है। ‘सहनशीलता’ का यह महामंत्र ही हमारे बीच एकता का धागा अब तक पिरोए हुए है। इस महामंत्र को जितनी बार दोहराया जाए, कम ही है। प्रस्तुति : शशि सिंघल


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