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एकता का बल

Posted On March - 22 - 2020

बाल कहानी

हरि कृष्ण मायर
पतंग की डोरी से उलझ कर धरती पर गिरे कौए के बच्चे को दूर से देख कुत्ते उसकी ओर दौड़े। दौड़ते कुत्तों ने सोचा-आज कौए के बच्चे से ही भूख शांत करेंगे। छोटी -छोटी उडारी भरता कौए का बच्चा मानो जैसे कह रहा हो-आप क्यों मुझे खाना चाहते हो? मुझ से क्या भूख मिटेगी तुम्हारी ? लेकिन कुत्ते जैसे अपनी आंखों से कह रहे थे-आज शिकार हमारे हाथ आया है, भला कैसे छोड़ देंगे हम? अगर आप मुझे छोड़ दें तो बड़ी कृपा होगी, आपकी-कौए का बच्चा पुन: गिड़गिड़ाया । सामने पेड़ से उतर कर कौए के बच्चे की मां व बाप भी उसके इर्दगिर्द मंडराने लगे। उन्होंने तुरंत कुत्तों पर आक्रमण कर दिया। बच्चे की सहायता हेतु अन्य कौए भी एकत्रित होने लगे थे।
यह सब देख कर कुछ लोग भी रुक कर देखने लगे। एक व्यक्ति बोला-दुख बांटने के लिये यूं तो मनुष्य भी इकट्ठा नहीं होते। यहां तो कौए भारी संख्या में आने लगे हैं।
कौओं के झुण्ड ने कुत्तों पर हमला बोल दिया। वे किसी कुत्ते के सिर व कोई पूंछ पर प्रहार करने लगे। नुकीली चोंचों के प्रहार से कुत्ते भयभीत हो गये। लेकिन कुछ आक्रोशित कुत्ते कौए के बच्चे को उठा कर खेत की तरफ़ भागने में सफल हो गये। कौओं का पूरा विशाल झुण्ड कुत्तों के पीछे-पीछे उड़ने लगा। कौओं का पूरा झुण्ड अपने बच्चे को मुक्त करवाने का प्रयास करता रहा। इस घटना को देख लोग भी भारी संख्या में एकत्रित हो गये। वहीं कुछ महिलाओं की ममता जाग पड़ी। एक बोली-बेचारे को खेत में उठा कर ले गये। यह भी तो किसी का बच्चा ही है। चलो आओ उसे मुक्त करवाएं, इन आवारा कुत्तों से। महिलायें कुतों के पीछे दौड़ पड़ीं । उनके साथ लोग भी दौड़ने को हुए। तभी एक महिला ने पांव से जूता उतार कर कुत्ते पर दे मारा। कुत्ता चूं-चूं करता कौए के बच्चे को छोड़ कर भाग खड़ा हुआ। अन्य कुत्तों को भी लोगों ने पत्थर उठाकर भगा दिया। कौए के बच्चे के शरीर पर दांतों के निशान बन गये थे। एक महिला उसे उठा ले आई व ज़ख़्मों पर हल्दी लगा कर, उसे पेड़ की शाखा पर बिठा दिया। कुत्ते दूर खड़े गुर्रा रहे थे। बच्चे को शाखा पर देख कर उसके मां-बाप अब तक उस के पास पहुंच चुके थे। उन्होंने बच्चे को अपने पंखों की ओट में छिपा लिया था। स्नेह की गरमाई से मानो बच्चे का दर्द कम होने लगा था। कौए के बच्चे को उसकी मां अपनी चोंच से सहला रही थी।


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