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‘हेरोइन’ का नशीला सफर

Posted On February - 24 - 2020

अफगानिस्तान से पाकिस्तान और फिर पंजाब तक

जुपिंदरजीत सिंह
वर्ष 2017 की बात है। गुजरात के एक व्यापारी अरशद सोटा की ईरान के चाबहार बंदरगाह पर एक व्यक्ति से मुलाकात हुई। वह भारतीय उपमहाद्वीप के सबसे ज्यादा वांछित स्मगलरों में एक पाकिस्तानी हाजी जान मोहम्मद का गुर्गा था। अरशद को इश्क का मामला उलटा पड़ने की वजह से अपना गांव छोड़ना पड़ा था। ऊपर से भारी व्यापारिक घाटा तब सहना पड़ा, जब कुछ व्यापारियों ने उसे ऐसी किश्ती दिलवा दी, जो समुद्र में ज्यादा चलने लायक नहीं थी। पैसे की तंगी से जूझ रहा अरशद ऐसा कोई भी काम करने काे राजी हो गया, जो आर्थिक तंगी से उबरने का आसान तरीका बन जाए। उसे बताया गया कि करना केवल इतना है कि हाजी जान द्वारा उपलब्ध माल को किश्ती से गुजरात में मसालों की मंडी के तौर पर मशहूर उंझा मंडी तक पहुंचाना है। वहां पहुंचने पर पंजाब का सिमरनजीत सिंह संधू आगे की हिदायतें देगा। संधू कोई मामूली स्मगलर नहीं है। पंजाब पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक वह नशा व्यापार के समुद्र में एक बड़ी मछली है। अमृतसर का रहने वाला सिमरनजीत वर्ष 2015 में गैरकानूनी गतिविधियों में गिरफ्तार होने से पहले ऑस्ट्रेलिया भाग गया था। जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसने पंजाबी और कश्मीरी स्मगलरों को अपने साथ जोड़कर एक गैंग बनाया, जिसका ऊपरी तौर पर काम था जीरे के बीज को गुजरात से उत्तर भारत तक पहुंचाना और वापसी में कश्मीर से सेब या फिर वाघा अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र में पाकिस्तान से आये टमाटर-प्याज को गुजरात लेकर जाना। गुजरात से आते समय बोरों में हेरोइन की खेप छुपा कर लाई जाती थी। इस तरह हाजी-संधू नेटवर्क बना, जिसका जाल ईरान तक फैला था। इसकी गतिविधियों में हेरोइन को अफगानिस्तान, पाकिस्तान और गुजरात से होते हुए पंजाब पहुंचाया जाता था। जल्द ही, यह युगलबंदी दिमाग झकझोर देने वाली ऐसी साझेदारी में तब्दील हो गई थी, जिसका मुख्य काम नशा, खासकर हेरोइन की स्मगलिंग करना था। आगे ये लोग हेरोइन को यूरोप और यहां तक कि ऑस्ट्रेलिया भी पहुंचाने लगे।
हालांकि, जांच एजेंसियों की पूरी पड़ताल अभी बाकी है, लेकिन माना जाता है कि कई सफल अभियानों के बाद इनके हौसले इतने बुलंद हो गए थे कि इन्होंने अमृतसर के बाहरी इलाके में गैरकानूनी नशा-उत्पादन फैक्टरी शुरू कर दी थी, जहां पर लाई गई कच्ची हेरोइन (अपने प्राकृतिक रूप में यह अपेक्षाकृत कम दामों पर मिल जाती है) को परिष्कृत करके इस श्रेणी का बनाया जाने लगा कि यूरोप एवं भारत में ऊंचे दामों पर बेची जा सके। इस काम के लिए इन्होंने अफगानिस्तानी नशा विशेषज्ञों की सेवाएं लीं, जो 50 हजार अमेरिकी डॉलर मेहताने पर एक महीने में 200 किलो ‘कच्ची’ हेरोइन को उच्च श्रेणी का बना देते थे। अरशद सोटा के गुजरात जेल में बंद होने के बावजूद इनका गोरखधंधा बिना रोक-टोक के चल रहा था।
एसटीएफ ने किया भंडाफोड़
अगर पंजाब पुलिस के नशा-निरोधक विशेष कार्य दल के प्रमुख और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक हरप्रीत सिंह सिद्धू सावधानी न बरतते तो शायद आज भी यह कारनामा जारी रहता। संदिग्धों की गतिविधियों पर नजर रखने के बाद विशेष कार्य दल ने नशा उत्पादन इकाई पर छापा मारा और 6 लोगों को गिरफ्तार किया। इनमें अफगान नागरिक अरमान बशरमाल भी था। 14 वर्षीय बालक के पिता अरमान ने पूछताछ के दौरान बताया कि उसके हमवतन 2 अन्य हेरोइन उत्पादन विशेषज्ञ पहले भी सुल्तानविंड क्षेत्र में लगाई गई गैरकानूनी नशा फैक्टरी में काम कर चुके हैं। गिरफ्त में आये अन्य लोगों में अमृतसर का अंकुश कपूर है, जो कपड़े के धंधे से नशीली दवाइयों की स्मगलिंग में पहुंचा। बाकियों में जिम-ट्रेनर दंपति भी है, जिसने पुलिस को बताया कि उनकी जिम्मेवारी फैक्टरी में काम करने वालों को खाना और सुरक्षा मुहैय्या करवाने की थी। पति-पत्नी ऑस्ट्रेलिया जाकर बसना चाहते थे और इस काम लिए उन्हें पैसे की दरकार थी।
मुख्य आरोपी और सरगना सिमरनजीत सिंह फिलहाल इटली पुलिस की गिरफ्त में है। पंजाब में अन्य कई मामलों में वांछित होने के अलावा उसपर गुजरात पुलिस ने अरशद सोटा से संबंधित केस में लिप्त होने की वजह से प्राथमिकी दर्ज कर रखी है। इनके कारनामों से साफ है कि नशा फैलाने वालों का नेटवर्क कितना विस्तृत है। लगता है इन्हें धंधे में उन लोगों की मदद रास आई, जो पंजाब में नशा पहुंचाने, फैलाने और बिक्री से पैसा बनाने के इच्छुक थे। साथ ही, वे लोग भी काम आये जिनका काम हेरोइन को यूरोप या अन्य देशों में पहुंचाना है। कैलिफोर्निया स्थित ‘नैवल पोस्ट ग्रेजुएट स्कूल’ के राजन पाल ने पंजाब में वर्ष 2017 में नशे के व्यापार पर आधारित ‘राजनीतिक, आर्थिक एवं विद्रोही गतिवधियों’ नामक अध्ययन में लिखा हैः- ‘जहां हेरोइन का आदी प्रतिदिन लगभग 1400 रुपये खर्च करता है तो एक अफीमची के लिए यह लागत लगभग 350 रुपये बैठती है, जबकि कैमिकल आधारित नशे के कैप्सूल या गोलियों का सेवन करने वाले करीबन 265 रुपये प्रतिदिन खर्चते हैं।’ विशेष कार्य बल के महानिरीक्षक कौस्तुभ शर्मा ने बताया-‘हमें सूचना मिली थी कि नशा स्मगलर इस क्षेत्र में और ज्यादा नशा फैलाने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षाें में भारतीय सीमा पर बढ़ी चौकसी के कारण अफगानिस्तान में लगभग 3 लाख टन हेरोइन पड़ी है, जिसे भारत और अन्य देशों में पहुंचाने का इंतजार स्मगलर कर रहे हैं। यहां पर संधू और उसके जैसे गैंग सक्रिय सहयोग देकर ज्यादा खतरनाक बन जाते हैं। अब ये लोग पंजाब में नशे की खेप पहुंचाने के लिए ड्रोनों का इस्तेमाल करने लगे हैं। हमारे लिए हर नया दिन और स्मगलरों से निपटने की नयी चुनौती होती है।’
कौस्तुभ शर्मा ने माना कि विशेष कार्य बल अभी संधू गैंग द्वारा इस्तेमाल किए गये असल रूटों, गोदामों और सप्लाई चेन को चिन्हित करने में लगा है। यह नेटवर्क शायद अपना काम जारी रखता अगर गुट के 2 सदस्यों अब्दुल अजीज भागड़ और रफीक पर 5 किलो हेरोइन गबन करने का आरोप तूल न पकड़ता। इसकी भनक लगने पर गैंग द्वारा की गई अंदरूनी कार्रवाई से क्षुब्ध होकर की गयी मुखबिरी ने नशा फैक्टरी का पर्दाफाश करवा दिया।
कई देशों में फैला गोरखधंधा
मुख्य स्मगलर हाजी जान पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह से अपना धंधा चलाता है, यह वही बंदरगाह है, जिसे चीन की मदद से विकसित किया जा रहा है। भौगोलिक रूप से यह ईरान के चाबहार बंदरगाह के ऐन सामने स्थित है, जिसका विकास भारत कर रहा है। चूंकि अरशद सोटा चाबहार से अपना व्यवसाय चला रहा था, इसलिए पाकिस्तानी व्यापारियों से मेज-जोल होना कोई बड़ी बात नहीं है। ग्वादर बंदरगाह बलूचिस्तान के रेगिस्तान इलाके से सटी है। यहां से होकर अफगानिस्तानी हिरोइन समुद्री तटों तक पहुंचती है। अधिकारियों का कहना है कि संधू गैंग ने अपनी करतूतों से उन तमाम गैंगों को पछाड़ दिया है, जिनका भंडाफोड़ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने पहले किया है, हालांकि, वे भी कोई मामूली नहीं थे।
एक ओर संधू और उसके गैंग का राज ‘गोल्डन क्रिसेंट’ नामक स्मगलिंग रूटों पर बना हुआ था, तो वहीं अमृतसर जिले के अजनाला से संबंध रखने वाला एक अन्य स्मगलर अमरिंदर सिंह छीना, जो फिलहाल कनाडा में छिपा है, भी मैक्सिको से लेकर अमेरिका-कनाडा-आस्ट्रेलिया और आगे दिल्ली एवं हिमाचल प्रदेश के बद्दी और अंततः पंजाब तक फैले अपने स्मगलिंग जाल को सुदृढ़ करने में लगा हुआ था। वह उच्च कोटि की नशा ‘कोकीन’ विदेशों से समग्ल करके दिल्ली और गोवा के रईस ग्राहकों को मुहैय्या करवाता है। मादक पदार्थ निरोधक ब्यूरो ने उसका गैंग छिन्न-भिन्न कर दिया है। इस मामले की जांच में लगे सब-इंस्पेक्टर रजनीश कुमार ने बताया कि पंजाब पुलिस छीना काे प्रत्यर्पण करवाने में लगी है। हालांकि, अभी तक वह गिरफ्तार नहीं हुआ है। इससे पहले वह पुलिस की गिरफ्त में आने से तब भी बाल-बाल बच गया था, जब उसका नजदीकी साथी अक्षिंदर सिंह सोढी पिछले साल सितंबर में पंजाब के पट्टी इलाके से पकड़ा गया था। उसने कनाडा से एक प्रिंटर में छिपाकर लाई गई अमेरिकी कोकीन की खेप को प्राप्त किया था। मादक पदार्थ निरोधक ब्यूरो के उपनिदेशक एके झा ने कहा- ‘अमेरिकी कोकीन की बरामदगी से पंजाब में नशे के धंधे में नया आयाम जुड़ गया था। यह नशा अमीरजादों के लिए विशेष तौर पर आयातित था।’
हवेलियां गांव के कुख्यात भाई
अमृतसर में संधू एंड गैंग के नशा फैक्टरी बनाने में मुख्य हाथ तरनतारन के हवेलियां गांव निवासी पांच भाइयों के गैंग का था। ये सभी पहले भी नशा स्मगलिंग के मामलों में नामजद हैं, इनके गैंग का जाल पाकिस्तान से कश्मीर और पंजाब तक फैला है। कुलदीप सिंह बाबू के नेतृत्व वाला यह गैंग कभी हवेलियां गांव में रहता था। यह गांव ‘स्मगलरों के ठिकाने’ के रूप में कुख्यात है। इन्होंने अपने गैरकानूनी धंधे में इतना पैसा बनाया कि उसे पठानकोट के पास जमीन खरीदकर 5 गड्ढों में छिपा दिया था। ऐसे एक गड्ढे से विशेष कार्य दल ने 1.29 करोड़ रुपये बरामद किये, जबकि अन्य 4 को कुछ महीने पहले वाघा सीमा पर कस्टम विभाग द्वारा पकड़ी गई 532 किलों हेरोइन वाले मामले के बाद उन्होंने खाली कर लिया था।
नये गैंग और तस्करी के नये तरीके
सिमरनजीत संधू गैंग
अमृतसर के एक इलाके में 31 जनवरी 2020 को 232 किलो नशीले पदार्थ और 200 किलो कैमिकल बरामदगी इस गैंग से जुड़ी है। इस गैंग के तार पंजाब, गुजरात, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, ईरान से जुड़े हैं।
नेटवर्क
अफगानिस्तान से मादक पदार्थ पहले बलूचिस्तान के पाश्नी से होते हुए ग्वादर बंदरगाह पंहुचते हैं। यहां से किश्तियों से भारतीय तस्कर गुजरात के तटों पर लाते हैं। यहां से इन्हें सड़क मार्ग से जीरे के बीज भरे बोरों में छिपाकर पंजाब पहुंचाया जाता है।
मुख्य सदस्य

  • हाजी जान : पाक नागरिक (सरगना)
  • सिमरनजीत सिंह संधू : अमृतसर निवासी, फिलहाल इटली में हिरासत में है (सह-सरगना)
  • अरशद सोटा : गुजरात निवासी (गुजरात पुलिस की गिरफ्त में है)
  • अजीज भगाड और रफीक : सोटा के साथी
  • मंज़ूर अहमद मीर और नुसरत नज़ीर : संधू के साथी

 

अमरिंदर छीना गैंग
पिछले साल सितंबर में 115 ग्राम कोकीन, 13 ग्राम एफेडेरीन, 80 ग्राम हशीश तेल और 292 नशीले कैप्सूल पकड़े जाने के तार इस गैंग से जुड़े थे। इसके अलावा, 900 ग्राम मिक्सिंग एजेंट भी बरामद हुआ था। इन सब की कुल कीमत 2 करोड़ रुपये थी। अमरिंदर छीना गैंग का जाल मैक्सिको, अमेरिका, कनाडा, दिल्ली, गोवा और पंजाब तक फैला है।
नेटवर्क
मैक्सिकों से कोकीन को प्रिंटरों में छिपाकर अमेरिका होते हुए भारत लाया जाता है। नयी दिल्ली से कुरियर कंपनियों के जरिए इन्हें पंजाब पहुंचाया जाता है।
मुख्य सदस्य

  • अमरिंदर छीना : अमृतसर निवासी, फिलहाल कनाडा में है। पंजाब पुलिस ने इसके प्रत्यर्पण की मांग की है।
  • अक्षिंदर सिंह : जालंधर का व्यापारी, जो प्रिंटर मशीनें प्राप्त करता था
  • योगेश कुमास धूमा : स्थानीय नशा सप्लायर

532 किलो मादक पदार्थ और आतंकवाद का गठजोड़
अफगानिस्तान, पाकिस्तान, पंजाब, कश्मीर और नयी दिल्ली तक इसके तार जुड़े हैं।
नेटवर्क
जून 2019 के एक दिन अफगानिस्तान से भारत को 532 किलो हेरोइन भेजी गयी। यह अफगानिस्तान चली और पाकिस्तान के जरिये ट्रकों में वाघा सीमा पर बने अंतर्राष्ट्रीय व्यापार केंद्र पंहुची। इसे पहाड़ी नमक के बोरों में छिपाया गया था। यह कश्मीर और पंजाब में सप्लाई होनी थी।
मुख्य सदस्य

  • साहिल खान उर्फ मूसा (पाकिस्तान में)
  • मूसा के साथी फारूक खान और अमीर नूर
  • तारिक अहमद लोन (कश्मीर का हंदवाड़ा निवासी, पहाड़ी नमक व्यापारी और मादक पदार्थों की समग्लिंग में भी लिप्त)
  • गुरप्रिंदर सिंह बब्बर (अमृतसर का व्यापारी, पाक से आये पहाड़ी नमक के बोरे वह तारिक को भेजता था, अमृतसर जेल में उसकी मौत हो गयी थी)
  • रंजीत सिंह उर्फ चीता, तरनतारन के हवेलियां गांव निवासी (फरार)
  • रंजीत का भाई बलविंदर सिंह उर्फ बिल्ला (विशेष कार्य दल गिरफ्तार कर चुका है, बाकी 3 भाई भी नशा समग्लिंग में लिप्त हैं)

वर्तमान स्थिति : केस की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी कर रही है।


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