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हिंदी फीचर फिल्म : हावड़ा ब्रिज

Posted On February - 22 - 2020

शारा

‘आइए मेहरबान, बैठिए जाने जहां, शौक से लीजिए फिर इश्क के इम्तिहान’—जी हां, पाठक ठीक समझे कि आशा भोसले का चटखारे देता गीत तथा उस गीत पर बार में बैठे अशोक कुमार को कामुक निमंत्रण देता मधुबाला का डांस इसी फिल्म का है। कमर जलालाबादी के इस गीत को जो संगीत दिया गया है, वह तो है ही कमाल का, लेकिन इसे जिस नखरे, जिस ठसक से आशा भोसले ने गाया है वह और भी निखर गया है। निर्देशक शक्ति सामन्त ने जिस सिचुएशन में इस गीत को फिल्माया है और जिस पर फिल्माया है, वह देखने की चीज़ है। मधुबाला के नृत्य ने इस गीत को अमर कर दिया। इस गीत पर नृत्य ने कई मनचले दर्शकों पर तब भी बिजलियां गिरायी थीं और बिजली गिराने का यह सिलसिला बदस्तूर अभी भी जारी है। भले ही यह गीत मिक्सिंग करके डांस शो या पार्टियों में बजाया जाता हो। लोगों को मधुबाला का यह गीत गाते हुए होंठों को बल देने की भाव-भंगिमा अभी तक याद है। और जो हेलन ने ‘मेरा नाम चिन चिन चू’ गीत पर कमर मटकायी है, उनके एक्शन ने सस्पेंस जोनर की इस फिल्म को रोमांटिक मूवी में बदल दिया है। लब्बोलुआब यह कि ओ.पी. नैयर के संगीत ने कथानक में आत्मा का काम किया।
हावड़ा ब्रिज 1958 में रिलीज हुई थी, जिसे शक्ति सामन्त ने निर्देशित किया था। वही शक्ति सामंत जिन्होंने बॉलीवुड को अनुराग, अमर प्रेम, कश्मीर की कली सरीखी फिल्में दीं। हावड़ा ब्रिज पर वैसे तो कई फिल्मों की शूटिंग होती है/हो चुकी है, लेकिन हावड़ा ब्रिज के नाम से यह पहली फिल्म बनी। हावड़ा से कलकत्ता को जोड़ता, हुगली नदी पर बना हावड़ा ब्रिज तब नया-नया बना था, जिसे फिल्म वालों/कहानीकारों ने हाथों-हाथ लिया था। बाद में इसके नाम पर फिल्म बनाकर शक्ति सामंत ने इसे अमर कर दिया। जब भी हावड़ा ब्रिज मूवी का जिक्र होता है, हेलन द्वारा लगाये गए ‘मेरा नाम चिन चिन चू’ पर ठुमके बरबस याद हो आते हैं। इस आइटम सांग की यह खासियत है कि लगता नहीं कि इसे कई साल पहले फिल्माया गया है। इसकी धुनों की ताजगी, नृत्य, लय सब कुछ आज के ही ‍्जमाने के लगते हैं। चलते-चलते यह बात भी बता दूं कि महमूद तथा उसकी बहन मीनू मुमताज ने पहली बार किसी फिल्म में डांसर जोड़े के रूप में अपनी प्रस्तुति दी है। पाठकों को जानकारी होगी कि मीनू मुमताज फिल्मों में डांसर की भूमिकाओं में अक्सर दिखाई देती रही हैं। वह अच्छी अदाकारा रह चुकी हैं। पुराने कलकत्ता की तंग गलियां तथा नाइट क्लब के अलावा ऐतिहासिक इमारतें, खिले-खिले पार्क देखने हों तो हावड़ा ब्रिज को जरूर देखिये। ये सारे मंजर बाद की फिल्मों में भी देखने को मिलेंगे लेकिन पुराने कलकत्ता की जो ‘वास’ है, वह हावड़ा ब्रिज में ही देखने को मिलेगी क्योंकि फिल्म के निर्देशक बंगाली बाबू थे, इसलिए उन्होंने ‘अमर प्रेम’ में भी कैमरा इसी जगह घुमाया है। इस फिल्म में मधुबाला के साथ असली जीवन के ‘जेठ जी’ यानी अशोक कुमार अपने किरदार में खूब सजे हैं।
कहानी में प्रेम कुमार बने अशोक कुमार अपने बड़े भाई मदन (चमन पुरी) के साथ रंगून में अपने पिताजी का कारोबार संभाले हुए हैं कि एक दिन यकायक मदन गायब हो जाता है और कई दिन तक जब नहीं लौटता तो प्रेम कुमार चिंतित हो उठता है। क्योंकि मदन के साथ-साथ उनका पुश्तैनी आर्टपीस ड्रैगन मास्क भी गायब हो जाता है। इस मास्क पर हीरे जड़े हुए थे। यही प्रेम कुमार की चिंता का कारण था कि कहीं मदन इस बहुमूल्य धरोहर को कलकत्ता में न बेच दे। और होता भी यही है कि ड्रैगन मास्क को बेचने के लालच में वह कलकत्ता के स्मगलरों के हत्थे चढ़ जाता है। प्रेम के पिता उसे रंगून लौटने को कहते हैं मगर वह तो तस्करों से हिल मिल चुका है। तभी प्रेम राकेश बनकर कलकत्ता पहुंचता है, जहां वह अपने पिता के विश्वासपात्र श्यामू (ओम प्रकाश) से मिलता है। लेकिन इस बीच उसके भाई मदन का कत्ल हो जाता है। वह भाई के हत्यारे को भी ढूंढ़ना चाहता है। श्यामू कलकत्ता में तांगा चलाता है। श्यामू उसे तांगे में बिठाकर चां (मदनपुरी) के होटल में ले जाता है जहां उसका सामना इडना (मधुबाला) से होता है। मधुबाला उसे अपने चक्कर में फंसाना चाहती है वह उसे अपने अंकल जो (धूमल) से मिलाती है। जब इडना समझती है कि राकेश (अशोक कुमार) उसके हुस्न के जाल में फंस चुका है तो वह राकेश को बताती है कि उसका अंकल जो चांग और प्यारे लाल (केएन सिंह) का दोस्त है जो गैर-कानूनी धंधा करते हैं। इडना से अंडरवर्ल्ड की जानकारी मिलने पर राकेश सभी तस्करों का पीछा करता है तथा पर्याप्त जानकारी जुटा लेता है कि एक दिन चांग की मौत हो जाती है और उसका इल्जाम प्यारे लाल राकेश पर लगा देता है। चूंकि श्यामू के नौकर भीखू (सुनार) ने प्यारे लाल को हावड़ा ब्रिज पर कत्ल करते देखा है, इसलिए राकेश बच जाता है। अंत में उसे पुश्तैनी आर्टपीस मिल जाता है और इडना भी।

गीत
आइए मेहरबान : आशा भोसले
देख के तेरी नज़र : मोहम्मद रफी, आशा भोसले
ईंट की दुक्की, पान का पत्ता : मोहम्मद रफी
गोरा रंग चुनरिया काली : आशा भोसले, मोहम्मद रफी
मैं जान गयी तुझे सैयां : शमशाद बेगम, मोहम्मद रफी
मेरा नाम चिन चिन चू : गीता दत्त
यह क्या कर डाला तूने : आशा भोसले
मुहब्बत का हाथ, जवानी का पल्ला : मोहम्मद रफी, आशा भोसले

निर्माण टीम
निर्देशक : शक्ति सामंत
पटकथा : रंजन बोस
गीतकार : कमल जलालाबादी, हसरत जयपुरी
संगीतकार : ओ.पी. नैयर
सितारे : मधुबाला, अशोक कुमार, केएन सिंह, ओमप्रकाश, महमूद आदि।


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