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सीमा पर बढ़ी और चौकसी

Posted On February - 24 - 2020

मुकेश रंजन
देश की पश्चिमी सीमाओं से दाखिल होने वाला गैरकानूनी मादक पदार्थ और नशीली दवाओं की तस्करी रोकना लंबे समय से मुख्य चुनौती रही है। पाकिस्तानी सेना और आईएसआई लगातार भारत को आंतकी संगठनों की मार्फत निशाना बनाती आई है। ये गुट आसान धन पाने के लिए नशे की तस्करी करते और करवाते हैं।
गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अफसर ने बताया कि आतंकवादियों के धन-स्रोतों के तौर-तरीकों की पुनः प्रत्यक्ष जांच के बाद भारत सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें उक्त मामलों की जांच एनआईए से करवाना भी शामिल है। इसके अलावा, सीमा सुरक्षा बल, सीमा सशस्त्र बल को खोजी अभियान चलाने, माल जब्त करने और आरोपी को गिरफ्तार करने के अधिकार दिए गए हैं। मादक पदार्थ निरोधक ब्यूरो के महानिदेशक के नेतृत्व में एक राष्ट्रीय निरोधक समन्वय केंद्र बनाया गया है, जिससे नशा निरोधी तमाम एजेंसियां और इससे जुड़े सभी विभागों को साझा कार्रवाई के लिए एक मंच पर लाया जा सके।
खुफिया सूचनाएं बताती हैं कि ज्यादातर अफीम (प्राकृतिक रूप में) अफगानिस्तान में उगाई जाती है, जिसे आगे परिष्कृत करने के लिए पाकिस्तान स्थित शोधन केंद्रों में ले जाया जाता है और अंतिम उत्पाद भारत भेजा जाता है। अधिकारी बताते हैं कि मोटे अनुमानों के अनुसार पाकिस्तान के शोधन केंद्रों तक पहुंचने वाली अफीम की कीमत 10 हजार से 15 हजार रुपये प्रति किलो होती है। इससे तैयार हेरोइन 5 लाख रुपये प्रति किलो हो जाती है। लेकिन भारत पहुंचते ही इसका मूल्य लगभग एक करोड़ रुपये हो जाता है। यूरोप एवं पश्चिमी देशों तक पहुंचते-पहुंचते यह 5 करोड़ रुपये किलो हो जाती है।
गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय मादक पदार्थ निरोधक ब्यूरो को निर्देश दिए हैं कि वह अपनी गतिविधियां बढ़ाए। नागरिक उड्डयन सुरक्षा विभाग के महानिदेशक राकेश अस्थाना को इस ब्यूरो का अतिरिक्त कार्यभार दिया गया है। उन्होंने हाल ही में नये बने इस राष्ट्रीय मादक पदार्थ निरोधक विभाग की पहली बैठक की अध्यक्षता की। केंद्रीय गृह राज्यमंत्री कृष्णा रेड्डी को आंतरिक सुरक्षा संबंधी मामले देखने को कहा गया है। पाकिस्तान और बांग्लदेश से लगी हमारी सीमाओं की सुरक्षा की जिम्मेवारी निभाने वाले सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों ने बताया है कि मादक पदार्थ समग्लिंग को रोकने के लिए कई उपाय किए गए हैं।
हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीमा सुरक्षा बल को सीमाओं पर उन खास संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान करने के लिए कहा है, जहां से नशा और हथियार देश में स्मगल होते हैं या होने की संभावना है। यह प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सीमा सुरक्षा बल ने गश्त बढ़ा दी है। इनमें सीमा के आरपार बनाई सुरंगों की पहचान करके उन्हें खत्म करने का अभियान भी शामिल है।


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