पुलिस पर हमला, आईपीएस अफसर घायल !    गगनयान : अंतरिक्ष यात्रियों का प्रशिक्षण स्थगित !    14 माह और ढाई साल के मासूम भी चपेट में !    चीन में 39 नये मामले !    कोरोना रिलीफ फंड 9929 शिक्षक अंशदान से वंचित !    'इस साल टेनिस टूर्नामेंट होने की संभावना कम' !    24 घंटे में 28 नये कोरोना पॉजिटिव !    मोहाली में एक और कोरोना मरीज !    धड़ल्ले से हो रही जरूरी वस्तुओं की कालाबाजारी !    एकदा !    

बच्चों की इमोशनल सेहत भी संभालें

Posted On February - 16 - 2020

पेरेंटिंग

मोनिका शर्मा
एकेडेमिक प्रेशर, बेहतर प्रदर्शन और ज़िन्दगी के हर फ्रंट पर अव्वल रहने के दबाव को झेल रहे बचपन का भावनात्मक स्वास्थ्य भी देखभाल मांगता है। बच्चे भी आये दिन तनाव से जूझते हैं। कितने ही तरह के मानसिक प्रेशर झेलते हैं। एक अध्ययन के अनुसार आज देश में 30 प्रतिशत स्कूली बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को देखभाल की ज़रूरत है | ऐसे में पेरेंट्स की जिम्मेदारी है कि बच्चों के मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को भी संभालें।
हिंसक व्यवहार कभी न करें
आमतौर पर बच्चों से साथ होने वाली मारपीट को ही हिंसा समझा जाता है। जबकि हमारे घरों में बच्चे शारीरिक ही नहीं, मानसिक हिंसा भी झेलते हैं। हमें यह समझना होगा कि केवल पिटाई ही हिंसा नहीं। इसीलिए बच्चों को इमोशनली स्ट्रांग बनाना है तो सबसे पहले उनके मन को चोट पहुंचाने वाले बर्ताव से बचना ज़रूरी है। बड़ों का हिंसात्मक बर्ताव उनके मन पर भी गहरा असर डालता है। उनकी मानसिक हेल्थ बिगाड़ता है। ध्यान देने बात है कि बच्चों की न केवल फिजिकल हेल्थ बल्कि इमोशनल या मेंटल हेल्थ का दुरुस्त होना भी बेहद आवश्यक है। इसीलिए माता-पिता द्वारा उनके साथ किया गया स्नेह भरा व्यवहार, झप्पी और दुलार, बच्चे को आपके करीब लाने और मन से मज़बूत बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं। बच्चे इससे सुरक्षित महसूस कर सम्बल पाते हैं। माता-पिता बच्चे से किस तरह का रिश्ता रखते हैं, कैसा व्यवहार करते हैं, इसका असर बच्चे की भावनाओं पर भी पड़ता है। इसीलिए बच्चों से बात करते हुए सही और सधी भाषा बोलें। उन्हें अपमानित ना करें। वे जो कहना चाहते हैं, उसे मन से सुनें और समझें। उनकी फीलिंग्स को मान दें। आपका ऐसा व्यवहार बच्चों का खुद अपने लिए भरोसा बढ़ाने वाला होता है। जो उन्हें भावनात्मक स्तर पर मज़बूत बनाता है। उनका व्यक्तित्व निखारता है।
कोशिशें सराहें
बड़े इस बात पर गौर ही नहीं कर पाते कि बच्चे बहुत जल्द तनाव में आ जाते हैं। उनके अंदर यह भावना होती है कि वे भी अपने बड़ों को खुश रखें। उनकी इन कोशिशों को सराहें और हर वक्त दूसरे बच्चों से तुलना करने और उलाहना देने से बचें। क्योंकि ऐसा व्यवहार बच्चों को इमोशनली कमज़ोर बनाता है। वे खुद को असफल और अयोग्य मानने लगते हैं। उसे बेहतर करने के लिए प्रेरित करें पर अपने भाई-बहनों या सहपाठियों से तुलना करते हुए नहीं। यह उन पर एक गैर ज़रूरी दबाव बना देता है जो उन्हें मानसिक रूप से परेशान करता है। घर में मिले नकारात्मक परिवेश का असर उन्हें साइकोलोजिकल परेशानियों की ओर ले जाता है| इसीलिए उनकी असफलता को लेकर तुलना और ताने नहीं बल्कि पॉजिटिव सोच को अपनाएं|
आराम ज़रूरी है
बच्चों की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए उन्हें आराम करने के लिए पूरा समय दें। खासकर उनकी मानसिक सेहत की संभाल के लिए उन्हें पूरी नींद मिले, ये ज़रूरी है। विशेषज्ञ भी मानते हैं कि अच्‍छी नींद सेहत के लिए बहुत जरूरी है। अगर आप सही तरह से सो पाते हैं तो कहीं न कहीं यह इस बात की ओर भी इशारा है कि कुल मिलाकर आपकी सेहत बहुत अच्‍छी है। आजकल बच्चों का भी शेड्यूल व्यस्त ही रहता है। छोटी उम्र में ही बच्चे नींद ना आने जैसी परेशानियों से घिर रहे हैं। ज़रूरत है कि सही समय पर अभिभावक इस समस्या की और ध्यान दें और इसका इलाज़ करवाएं। क्योंकि इससे बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य प्रभावित होता है। अच्छी और पूरी नींद लेंगें तो बच्चे तरोताज़ा रहेंगें। अपनी पढ़ाई पर भी फोकस कर पाएंगे। स्मार्ट फोन और आईपैड जैसे गैजेट्स ने बच्चों को कई मानसिक समस्याओं की ओर धकेला है। ऐसे में अभिभावकों के लिए जरूरी हो जाता है कि वे बच्चे में उम्र के मुताबिक आ रहे मानसिक और शारीरिक बदलावों को समझें और सार्थक संवाद कायम करें| बच्चों का व्यवहार और विचार ही नहीं, उनकी पढाई भी स्मार्ट गैजेट्स पर बिताये जा रहे समय से प्रभावित हो रही है| पेरेंट्स बच्चों को इस जाल से बचाएं और उनके आराम पर भी ध्यान दें | आज के समय में स्मार्ट गैजेट्स बच्चों की इमोशनल हेल्थ बिगाड़ने में अहम भूमिका निभा रहे हैं|


Comments Off on बच्चों की इमोशनल सेहत भी संभालें
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Manav Mangal Smart School
Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.