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नवलखा, तेलतुंबडे की जमानत याचिकाएं हाईकोर्ट में खारिज

Posted On February - 15 - 2020

मुंबई, 14 फरवरी (एजेंसी)
बांबे हाई कोर्ट ने एल्गार परिषद के कथित माओवादी संपर्क मामले में नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं, गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे को अग्रिम जमानत देने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। जस्टिस पीडी नाइक ने उनकी अग्रिम जमानत याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि प्रथम दृष्टया साक्ष्य से मामले में दोनों आरोपियों की सहभागिता प्रदर्शित होती है। हालांकि, अदालत ने उन्हें गिरफ्तारी से मिली अंतरिम राहत की अवधि चार सप्ताह के लिए बढ़ा दी, ताकि वे सुप्रीम कोअर् में अपील कर सकें। जस्टिस नाइक ने कहा, ‘रिकार्ड में मौजूद सभी चीजों पर गौर करने पर यह देखा जा सकता है कि प्रथम दृष्टया साक्ष्य याचिकाकर्ताओं (नवलखा और तेलतुंबडे) की अपराध में सहभागिता को प्रदर्शित करते हैं।’
अदालत ने कहा, ‘जांच के दौरान यह खुलासा हुआ कि तेलतुंबडे ने प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन से धन प्राप्त किया था।’ पुणे पुलिस ने एक जनवरी 2018 को पुणे जिले के कोरेगांव भीमा गांव में हिंसा के बाद माओवादियों से संपर्क रखने तथा कई अन्य आरोपों में नवलखा, तेलतुंबडे और कई अन्य कार्यकर्ताओं पर मामला दर्ज किया था। पुणे पुलिस के अनुसार, 31 दिसंबर 2017 को पुणे में हुए एल्गार परिषद सम्मेलन में ‘भड़काऊ’ भाषण और ‘उकसाने’ वाले बयान दिए गए जिससे अगले दिन कोरेगांव भीमा में जातीय हिंसा भड़क उठी। पुलिस ने आरोप लगाया कि इस सम्मेलन को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था। तेलतुंबडे और नवलखा ने पिछले साल नवंबर में अग्रिम जमानत के लिये उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। इससे पहले पुणे की एक सत्र अदालत ने उनकी याचिकाओं को खारिज कर दिया था। पिछले साल दिसंबर में हाई कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत याचिकाओं के निस्तारण की सुनवाई लंबित रहने के कारण गिरफ्तारी से अंतरिम राहत दी थी। पुणे पुलिस मामले की जांच कर रही थी लेकिन केंद्र ने पिछले महीने इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी।


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