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गोलियों की बोलियां

Posted On February - 22 - 2020

रमा गौतम
पंजाबी म्यूजिकल एलबम पंजाब के लोगों के लिये मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। पंजाबी म्यूजिकल एलबम में पिस्तौल, गोली, फायरिंग, लक्ष्य, हथियारों, असलहों, बंदूक, राइफल और दोनाली जैसे शब्दों और सीन्स का इतना इस्तेमाल हो रहा है कि इन पर रोक की मांग होने लगी है। आखिर हम समाज को क्या संदेश दे रहे हैं? ऐसे गाने और फिल्मी सीन, जिनमें हिंसा भरी हो, आखिर क्यों पेश किये जा रहे हैं? इन्हें देखकर युवा बिगड़ रहे हैं। इन पर रोक की मांग का ही असर है कि अब पंजाब के मुख्यमंत्री को खुद सामने आकर कहना पड़ रहा है कि हिंसा फैलाने वाले कल्चर को बंद किया जाये। कहा जा रहा है कि हिंसा और मारधाड़ के अलावा हथियारों वाले यह दृश्य युवाओं के मन मस्तिष्क पर बुरा असर डाल रहे हैं।
हिंसा को बढ़ावा देते गीत
पंजाबी के जाने माने सिंगर बब्बू मान का गाना है.. खेडनंगे अज्ज जट्ट खून दीयां होलियां.. चकलो रिवाल्वर अज्ज कब्जा लैणा है। सिंगर और अभिनेता दलजीत दोसांझ का गाना है.. जित्थे हुंदी है पाबंदी हथियारां दी जट्ट ओथे फायर करदा। गिप्पी ग्रेवाल का गीत.. जट मोडे लमकाके रखदे 12 बोर दी नी जट्ट मोडे ते लमका के रखदे 12 बोर दी। बब्बू मान का ही गीत.. मितरां नूं शौक हथियारां दा। यह गाने पंजाब और इस रीजन के आसपास के राज्यों में शादी समारोह से लेकर लगभग हर पार्टी और पब में डीजे पर सुने जाते हैं। इस वजह से खासकर शादी में नाचने वाले इतने उत्साहित हो जाते हैं कि वे हथियारों को उठाने से गुरेज नहीं करते और हथियार उठाकर नाचने लगते हैं। आलम यह है कि गायक दीप सिंह ने अपनी एलबम का टाइटल ही रख दिया ‘दोनाली जहे यार।’ जी. संधू ने अपनी एलबम का टाइटल रखा ‘दोनाली जट्ट दी।’ प्रदीप सरां ने तो एलबम का टाइटल रखा ‘दादे दी दोनाली’।
गैंगस्टर कल्चर का प्रमोशन
हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने फिल्म ‘शूटर’ पर बैन लगाने का आदेश दिया है। ये फिल्म गैंगस्टर सुक्खा काहलवां की जिंदगी पर आधारित है। बता दें कि सुक्खा काहलवां एक गैंगस्टर था जो अपने आपको शार्पशूटर बताता था। आरोप है कि इस फिल्म में हिंसा के साथ ही गन कल्चर को बढ़ावा दिया गया है। लिहाजा, पंजाब सरकार ने इसे बैन कर दिया है। दरअसल हथियार लहराना, इन असलहों के साथ एक्टिंग करना और गाने पर परफोर्म करना, पंजाबी म्यूजिकल एलबम में ऐसे सीन आम हैं।
ज्यादातर म्यूजिकल एलबम में ऐसे ही सीन्स देखे जाते हैं…शायद इसी वजह से जालंधर के एसएसपी ने हाल ही में हंसराज हंस और निर्मल संधू जैसे कलाकारों को अपने आॅफिस में बुलाया और उनसे अपील की कि ऐसे गाने और कंटेट न परोसें, जिनमे गन कल्चर का धड़ल्ले से इस्तेमाल हो रहा हो..। उनका कहना था कि म्यूजिकल एलबम में नशे और हिंसा के हद से ज्यादा सीन दिखाये जा रहे हैं। इन्हें युवा कॉपी भी कर रहे हैं जो चिंता की बात है। इससे उनमें आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ रही है। उन्होंने इसे गैंगस्टर कल्चर को प्रमोट करने वाला बताया।
विरासत को सहेजे संगीत
गानों में गैंगस्टर कल्चर से पुराने गायक भी दुखी हैं। सुप्रसिद्ध पंजाबी गायिका और पंच संचालिका आर. दीप रमन का कहना है कि जो पंजाबी संगीत यहां के गुरुओं, वीरों, संस्कृति, बेटियों, बहनों और रिश्तों, विरासतों और किसानों की बात करता था, वहां अब हथियार की बात हो रही है। वे भी चाहती हैं कि गानों में विरासत की बात हो, नशे की नहीं। हिंसा, हथियार और अश्लीलता न हो। ‘दिल ले गई कुड़ी गुजरात की’ के सिंगर जस्सी का कहना है, ‘गानों में जानबूझकर हथियारों और अश्लील भाषा का इस्तेमाल किया जा रहा है। मेरा मानना है कि गायकों के अलावा सरकार को भी इस पर नियंत्रण के लिए कदम उठाने की जरूरत है।’ जस्सी कहते हैं कि संगीत साधना है जो शांति का संदेश देता है, न कि नशे को बढ़ावा व संस्कृति को शर्मिंदा होने पर मजबूर करता है। हंसराज हंस जैसे जाने माने सिंगर भी इस बात से सहमत हैं कि गाने ऐसे होने चाहिये, जिनमें प्रदेश की संस्कृति दिखे। पंजाब पुलिस को भी लगता है कि ऐसे सीन युवा कॉपी कर लेते हैं जो राज्य में अपराध को बढ़ावा देने के लिये जिम्मेदार हो सकते हैं।
जानलेवा साबित हो रहा है ये ट्रेंड
कहते हैं कि आप अपनी लाइफ में जिस भी गलत चीज को बढ़ावा देते हैं वही आपके लिए खतरा भी बन जाती है। शायद इसलिए अपने म्यूजिक करियर को लेकर गन व ड्रग्स के कल्चर को पंजाबी कल्चर का हिस्सा बनाने की कवायद में जुटे पंजाबी कलाकार अब खुद ही अपने हथियार का शिकार होने लगे हैं। हाल ही में पंजाबी गायक परमीश वर्मा पर हुआ हमला इसका ताजा उदाहरण है। इससे पहले भी अलग-अलग तरीके से पंजाबी कलाकारों पर हो चुके हमले इस बात की तरफ इशारा कर रहे हैं कि जिन गैंगस्टर्स के सहारे उन्होंने अपना करियर बनाने का सपना देखा था, वह अब उन्हीं का शिकार करने लगे हैं। मितरा नूं शौक हथियारा दा… चक लो रिवाल्वर रफलां कब्जा लेना है.. बब्बू मान, पिंड तेरा गैंगलैंड बणेया.. मनकीरत औलख और मुंडा गैंगस्टर गन रखदा.. सुक्खी जैसे कलाकारों के गीतों ने जाने-अनजाने कई युवाओं के हाथों में हथियार पकड़ा दिए हैं। गैंगस्टर कल्चर से प्रभावित पंजाबी सिंगर्स ने विदेशी गैंगस्टर्स की लाइफ स्टाइल को देशी गैंगस्टर्स के साथ मिलाकर अपने गीतों में पेश किया। बेशक इन गीतों के सहारे पंजाबी फिल्म व म्यूजिक इंडस्ट्री में ये सिंगर्स अपनी जगह जरूर बना रहे हैं, लेकिन इसके परिणाम भी खतरनाक सिद्ध हो रहे हैं। वहीं मास्टर सलीम, जस बाजवा, बब्बू मान, सुनंदा शर्मा जैसे कलाकारों को भी किसी न किसी रूप में हिंसा व अभद्रता का शिकार होना पड़ा है।
सख्त कार्रवाई की ज़रूरत
हाल ही में अपने गानों में हिंसा और गन कल्चर को बढ़ावा देने के लिए फेमस सिंगर शुभदीप सिंह सिद्धू ऊर्फ सिद्धू मूसे वाला और मनकीरत औलख के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। दोनों पर अपने गानों में गन कल्चर और हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप है। इन्होंने अपने गानों को सोशल मीडिया पर भी अपलोड किया। दरअसल शुरुआती जांच में पता चला कि गाना मानसा जिले के मूसा गांव में मूसे वाला के घर पर रेकॉर्ड किया गया है। गाने की जो क्लिप सोशल मीडिया पर अपलोड की गई थी, वह गन कल्चर और हिंसा को प्रमोट कर रही है। पॉलीवुड में पंजाबी गानों में हिंसा और गन कल्चर को बढ़ावा मिलने पर मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने भी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार की तरफ से ऐसे सिंगर्स के प्रति किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी, जो युवाओं को हिंसा और गुड़ागर्दी के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते हैं। पंजाब सरकार ये सुनिश्चित कर रही है कि पंजाब का माहौल हिंसा फैलाने वाले गानों और फिल्मों से खराब न हो। वहीं पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने पहले ही पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ के डीजीपी को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि किसी भी लाइव शो में शराब, ड्रग्स और हिंसा का महिमामंडन न किया जाए।
लाइसेंसी असलहा, कोई न मसला
सिंगर एली मंगत के एक गाने पर बीते दिनों जमकर बवाल हुआ। इसमें एक लाइन है-लाइसेंसी असलहा, कोई न मसला। वे अपने गाने में सरकार को हथियारों के लाइसेंस जारी करने के लिये घेर रहे हैं। उनके एक एलबम का नाम तो ‘कारतूस एंथम’ है। मंगत अकेले नहीं हैं, उनके समर्थन में कई और पंजाबी सिंगर हैं। राजा गेम चेंजर निखिल सैनी का भी कहना है कि इस तरह के गाने तभी बंद होंगे जब सरकार हथियारों पर रोक पूरी तरह से लगा लेगी।
युवा पीढ़ी हो रही भ्रमित
कुछ साल पहले भी पंजाबी पॉप गीतों पर हुई रिसर्च में निराशाजनक बात सामने आयी थी। इस रिसर्च के अनुसार ज्यादातर पंजाबी पॉप गानों में नशा और हिंसा को परोसा जा रहा है। ये रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, अहमदाबाद के प्रोफेसर धीरज शर्मा की टीम ने की थी। टीम को इन गानों के माध्यम से यह पता चला कि पांच में से एक गीत में हिंसा और ड्रग्स की बात सामने नहीं आई जबकि बाकी में हिंसा और ड्रग्स के उल्लेख होने के स्पष्ट संकेत मिले थे।
गानों में शराब का महिमामंडन
पंजाबी म्यूज़िक एलबम में शराब के महिमामंडन का कल्चर तो पटियाला पैग से ही शुरु माना जाता है, लेकिन आगे चलकर इसे और बढ़ावा दिया गया है।
‘चार बोतल वोदका, काम मेरा रोज़ का’ पर भी बवाल हो चुका है। रैपर हनी सिंह को इस मामले में खूब घेरा गया था। वहीं अब ‘मित्तरां नूं शौक हथियारां दा’ जैसे पंजाबी गीत जो वेपन और असलहों की बात करते हैं, लोगों की जुबां पर छाए हैं। ऐसे में पंजाबी पॉप में हिंसा, ड्रग्स और शराब के साथ जुनून पराया नहीं है, यह इतना ज्यादा है कि पंजाब में कई बार दूल्हे या दुल्हन के परिवार के अलावा शादी या समारोह में आए मेहमानों व अन्य को अपनी जान गंवानी पड़ी है।
हालांकि पुलिस कई बार युवाओं से अपील करती रही है कि वे गन व ड्रग्स के कल्चर से दूर रहें। कलाकारों से भी अपील की जा रही है कि वे ऐसे गीतों को बढ़ावा न दें। पुलिस ने अब साइबर सेल के सहारे इस प्रकार के मामलों पर भी नज़र रखनी शुरू कर दी है। बीते कुछ वर्षों से पंजाब में तेज़ी से पंजाबी फिल्म व गीत इंडस्ट्री ने सोसायटी में गन व ड्रग्स कल्चर को बढ़ावा दिया है। सरकार भी ऐसे मामलों पर लगाम लगाने के लिए कल्चर आयोग बनाने की घोषणा कर चुकी है। अब इस प्रकार के गीतों को लेकर कलाकारों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।


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