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गारबेज प्रोसेसिंग प्लांट पर कब्जे की तैयारी

Posted On February - 26 - 2020

बैठक में मौजूद मेयर राजबाला मलिक एवं निगमायुक्त केके यादव। -दैनिक ट्रिब्यून 

रंजू ऐरी डडवाल/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 25 फरवरी
चंडीगढ़ नगर निगम डड्डूमाजरा में जयप्रकाश एसोसिएट्स द्वारा चलाये जा रहे ग्रीनटेक सोलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को अपने कब्जे में लेगा। इसके साथ ही सदन ने वर्ष 2005 में इस संबंध में जेपी एसोसिएट्स के साथ हुए करार को भी रद्द कर दिया। बैठक में पार्षदों की सहमति के बाद यह निर्णय लिया गया। जेपी कंपनी डड्डूमाजरा में 2008 से प्लांट चला रही है। गत दिवस इस मामले की नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में हुई सुनवाई के दौरान फैसला निगम के हक में आया है और शहर में कचरे का निष्पादन न होने की जेपी कम्पनी की दलीलों को खारिज कर दिया गया। वर्ष 2005 में निगम और जेपी एेसोसिएट्स के बीच हुए करारनामे के अनुसार निगम ने कंपनी को 10 एकड़ भूमि प्लांट स्थापित करने और चलाने के लिए 30 वर्ष की लीज पर दी थी। गत दिवस एनजीटी में हुई सुनवाई के बाद निगम को इस मामले को सुलटाने के लिए एक माह का समय दिया गया था। अगली सुनवाई अप्रैल में होगी। भाजपा पार्षद अरुण सूद का कहना था कि इस कार्रवाई के लिए निगम को सदन की बैठक के मिनट्स अप्रूव होने की प्रतीक्षा नहीं करनी चाहिए।
नोटिस देकर सामान हटायेगा निगम
निगम प्लांट प्रबंधकों को नोटिस देकर वहां पड़ी मशीनरी व अन्य सामान हटाने के लिए कहेगा। निगम प्लांट में हाल ही में स्थापित कम्पोस्ट प्लांट को अपने पास ही रखेगा और इसकी स्थापना पर आये खर्च का जायजा लेकर उस राशि को कंपनी को अदा करेगा। जबकि मिश्रित कचरे का निष्पादन करने वाली मशीन को हटाने के लिए कहा जायेगा। कंपनी अगर एक माह में मशीनरी नहीं उठाती है तो निगम उसे बेच देगा। इसमें प्लांट को प्रदूषण नियंत्रण समिति द्वारा दिए गए 1.46 करोड़ के नोटिस और निगम द्वारा करीब 5 करोड़ के 2 नोटिस की राशि काट कर बाकी की राशि कंपनी को देगा। अगर जुर्माना राशि सालवेज वैल्यू से ज्यादा होती है तो कंपनी से बकाया मांगा जायेगा। निगम के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि कंपनी की मशीनों और अन्य सामान की साल्वेज वेल्यू 5 करोड़ के लगभग ही बैठेगी व निगम के पास उनकी करीब 2.50 करोड़ की बैंक गारंटी भी है।
नये सिरे से मांगे जायेंगे एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट
पूर्व महापौर देवेश मोदगिल और राजेश कालिया ने सदन में कहा कि अब इस बात पर चर्चा होनी चाहिए कि नगर निगम किस तरह प्लांट चलाएगा। इसपर निगमायुक्त का कहना था कि इसके लिए निगम नये सिरे से एक्सप्रेशन आफ इंटरेस्ट मांगेगा और तब तक डम्पिंग ग्राउंड का माइनिंग का काम भी चलता रहेगा। कांग्रेस पार्षद दल के नेता दविंदर सिंह बबला ने कहा कि शुरू से ही जेपी कंपनी की नीयत प्लांट चलाने की नहीं थी। सदन की बैठक के बाद ही जेपी प्लांट पर ताला लगा देना चाहिए। कंपनी नगर निगम से टिपिंग फीस लेकर करोड़ों रूपये कमाना चाहती थी।
मात्र 20 प्रतिशत कचरा हो रहा संशोधित
निगमायुक्त ने कहा कि प्लांट में केवल 20 प्रतिशत कचरा संशोधित किया जा रहा है और अगर इसे निकट भविष्य में जारी रखा जाएगा तो निगम को अप्रैल से प्रति माह 10 लाख रुपये का जुर्माना देना होगा। लगभग 500 टन कचरा दैनिक आधार पर डंपिंग ग्राउंड में फेंक दिया जाता है लेकिन संयंत्र की प्रक्रिया केवल 20 प्रतिशत है। उनका कहना था कि अगर निगम इस प्लांट को स्वयं चलाना चाहे तो औसतन प्रतिमाह इसपर करीब 60 लाख रुपये का खर्च आता है। 15 लाख रुपये बिजली पर, 25 लाख रुपये श्रम पर और रखरखाव पर।
निगम के गार्ड तैनात
संयंत्र को कब्जे में लेने से पहले ही मंगलवार को निगम ने प्लांट के बाहर अपने सुरक्षा गार्डों की तैनाती कर दी और सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए। आयुक्त का कहना था कि कुछ पार्षद ने स्वीकार किया कि संयंत्र चलाने वाली कंपनी मशीनों को नुकसान पहुंचा सकती है।


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