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Posted On February - 13 - 2020

राजनीति के लिए सबक
12 फरवरी को दैनिक ट्रिब्यून में प्रकाशित राजकुमार सिंह के ‘राजनीति के लिए सबक है दिल्ली का जनादेश’ लेख के अनुसार दिल्ली का जनादेश सचमुच एक सबक है। इस जनादेश का स्पष्ट संकेत है कि अब ‘बदजुबानी और मुंह की जोराजोरी’ नहीं चलेगी। हर चुनाव में जरूरी है कि राज्यों के स्थानीय मुद्दों और मतदाता के मन की परतों को समझें और उसकी बुनियादी जरूरतों को सबसे पहले पूरा करें। सुविधा के नाम पर मुफ्त की बातें अन्तत: मतदाता पर ही घूम-फिर कर बोझ डालेंगी। इसकी भरपाई कहां से होगी? मतदाता की कमजोर नब्ज दिल्ली के होशियार मुखिया ने समझी और सबसे आगे डट गया।

मीरा गौतम, जीरकपुर

काम पर जनादेश
12 फरवरी को संपादकीय पृष्ठ पर प्रकाशित राजकुमार सिंह का लेख ‘राजनीति के लिए सबक है दिल्ली का जनादेश’ साबित करता है कि स्थानीय चुनावों में राष्ट्रीय मुद्दों का कोई महत्व नहीं होता। अन्य राज्यों की सरकारें भी इससे सबक ले सकती हैं। बीते पांच वर्षों में शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़कों पर विशेष ध्यान देकर केजरीवाल ने दिल्ली का दिल जीत लिया। दिल्ली जनादेश देश की जनता व राजनीतिक दलों के लिए सबक से कम नहीं। जनादेश यह भी साबित करता है कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है वहां की जनता भी संतुष्ट नहीं हैं।

सोहन लाल गौड़, बाहमनीवाल

गांव केंद्रित विकास
10 फरवरी के दैनिक ट्रिब्यून में क्षमा शर्मा का लेख ‘शिक्षित बेरोजगार बनाने वाली शिक्षा’ उपयोगी एवं सुझाव पूर्ण रहा। लेख का आगाज ग्रामीण चाची की अंतर कथा-व्यथा से हुआ। शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों के लिए श्रम रोजगार ग्रामीण योजना लागू करनी चाहिए ताकि वे शहरी पलायन से बच सकें। गांव में लघु उद्योगों की स्थापना के लिए सस्ती दरों पर ऋण उपलब्ध करवाकर बेरोजगारी को कम किया जा सकता है।

अनिल कौशिक, क्योड़क, कैथल


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