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600 यूरोपीय सांसदों के 6 प्रस्तावों पर बहस कल

Posted On January - 28 - 2020

लंदन/ नयी दिल्ली, 27 जनवरी (एजेंसी)
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ देश में कई जगह चल रहे प्रदर्शनों के बीच यूरोपीय संघ (ईयू) संसद में भी विरोध के स्वर उठे हैं। यूरोपीय संघ की 751 सदस्यीय संसद में तकरीबन 600 सांसदों की तरफ से इस कानून के खिलाफ पेश 6 प्रस्तावों पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान कराया जाएगा।
इन प्रस्तावों पर विदेश मंत्रालय से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि सीएए पूरी तरह से भारत का आंतरिक विषय है और इस कानून को संसद के दोनों सदनों में चर्चा के बाद लोकतांत्रिक तरीके से अंगीकार किया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने कहा कि ईयू संसद को ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जो लोकतांत्रिक रूप से चुने गए सांसदों के अधिकारों एवं प्रभुत्व पर सवाल खड़े करें। एक सूत्र ने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि प्रस्ताव पेश करने वाले एवं उसके समर्थक आगे बढ़ने से पहले तथ्यों के सटीक आकलन के लिए हमसे वार्ता करेंगे।’
ईयू संसद में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट/ नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई/एनजीएल) के प्रस्ताव में कहा गया है, ‘सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा। इससे नागरिकता विहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है।’ प्रस्ताव में भारतीय प्राधिकारियों से अपील की गई है कि वे प्रदर्शन कर रहे लोगों के साथ वार्ता करें और ‘भेदभावपूर्ण सीएए’ को निरस्त करने की उनकी मांग पर विचार करें।
प्रस्ताव में मानवाधिकार की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) के अनुच्छेद 15, भारत-यूरोपीय संघ सामरिक भागीदारी संयुक्त कार्य योजना और मानवाधिकारों पर यूरोपीय संघ-भारत विषयक संवाद का जिक्र किया गया है।
लोकसभा स्पीकर ने आपत्ति जताते हुए लिखा पत्र
नयी दिल्ली (एजेंसी) : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सीएए के खिलाफ प्रस्तावों को लेकर ईयू संसद के अध्यक्ष डेविड मारिया सासोली को पत्र लिखा है। बिरला ने ईयू संसद के अध्यक्ष से कहा, ‘किसी विधायिका द्वारा किसी अन्य विधायिका को लेकर फैसला सुनाना अनुचित है। इस परिपाटी का निहित स्वार्थ वाले लोग दुरुपयोग कर सकते हैं। सीएए में हमारे निकट पड़ोसी देशों में धार्मिक अत्याचार का शिकार हुए लोगों को आसानी से नागरिकता देने का प्रावधान है। इसका लक्ष्य किसी से नागरिकता छीनना नहीं है।’
बाहरी हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं : नायडू
उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने सोमवार को कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। एक पुस्तक विमोचन समारोह में नायडू ने कहा कि वह ऐसे मामलों में विदेशी निकायों के हस्तक्षेप की प्रवृत्ति से चिंतित हैं, जो पूरी तरह भारतीय संसद और सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह के प्रयास पूरी तरह अवांछनीय हैं और उम्मीद है कि भविष्य में इस तरह के बयानों से बचा जाएगा।
सरकार ने मुद्दे का अंतर्राष्ट्रीयकरण किया : कांग्रेस
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा, ‘यूरोपीय संघ सीएए पर चर्चा कर रहा है। इस सरकार ने नागरिकता कानून का अंतर्राष्ट्रीयकरण कर दिया है।’
पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी प्रस्ताव पारित
कोलकाता (एजेंसी) : पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सीएए के खिलाफ सोमवार को प्रस्ताव पारित कर दिया। प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून संविधान और मानवता के खिलाफ है। इसे तत्काल निरस्त किया जाए। हम एनपीआर को भी निरस्त कराना चाहते हैं। प्रस्ताव का विपक्षी दलों कांग्रेस और माकपा नीत वाम मोर्चा दोनों ने समर्थन किया। केरल, राजस्थान और पंजाब इस कानून के खिलाफ प्रस्ताव पहले ही पारित कर चुके हैं।
भारत का आंतरिक मामला : फ्रांस
ईयू के संस्थापक सदस्य देशों में शामिल फ्रांस इस मुद्दे पर भारत के पक्ष में है। फ्रांसीसी राजनयिक सूत्रों ने कहा कि सीएए भारत का आतंरिक राजनीतिक विषय है और यह कई मौकों पर कहा गया है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ संसद सदस्य देशों एवं यूरोपीय आयोग की एक स्वतंत्र संस्था है।


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