अभी-अभी उतरा हूं, भारत महान है... : ट्रंप !    सीएम दुराग्रह छोड़ें या परिणाम भुगतें !    नीरव मोदी की जब्त घड़ियों, कारों की नीलामी आज !    युद्ध अपराधों पर प्रस्ताव से अलग हुआ श्रीलंका !    बेअदबी मामला : आईजी कुंवर विजय प्रताप पहुंचे सीबीआई कोर्ट !    चंबा में भूकंप के झटके !    गैंगरेप पीड़िता ने किया आत्मदाह !    नवाज शरीफ भगोड़ा घोषित !    कर्नाटक के मंत्री ने कहा- समान नागरिक संहिता लाने का समय !    महबूबा की नजरबंदी के खिलाफ याचिका पर नोटिस !    

हम दोनों

Posted On January - 25 - 2020

हिंदी फीचर फिल्म
शारा
वर्ष 1961 में रिलीज फिल्म ‘हम दोनों’ नवकेतन फिल्म्ज द्वारा बॉलीवुड को दिया गया बेशकीमती शाहकार है जो आज भी हर पीढ़ी द्वारा उतने ही चाव से देखी जाती है। चाहे शैली पक्ष हो या तकनीकी, दर्शक इसे देखकर ऊबते नहीं हैं। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि इसके निर्माण के 50 साल पूरे हाते ही इसे रंगीन करके दर्शकों के लिए 2001 में दोबारा रिलीज किया गया। चूंकि नवकेतन देवानंद का प्रोडक्शन हाउस है, इसलिए जाहिर है इस फिल्म के हीरो भी देवानंद ही होंगे। देवानंद यहां डबल रोल में हैं और एक किरदार में उनके साथ साधना है जबकि दूसरे में उनके साथ नंदा है। यह फिल्म एक और कारण से भी दर्शकों के दिलोदिमाग पर तारी है, वह है जयदेव का अमर संगीत। उल्लेख करना सही रहेगा कि जयदेव की नवकेतन फिल्म्ज में एंट्री ही इसी फिल्म से हुई। इससे पूर्व नवकेतन फिल्म्ज के संगीतकार एसडी बर्मन थे, जयदेव उनके सहायक रह चुके हैं। जयदेव का केन्या में जन्म हुआ था। लेकिन लड़कपन में ही मुंबई भाग गये थे हीरो बनने। उन्होंने संगीतकार बनने से पूर्व वाडिया फिल्म्ज में बतौर हीरो/सहायक हीरो काम किया लेकिन असमय घर से बुलावा आने पर उन्हें लुधियाना लौटना पड़ा क्योंकि उनके पिता अंधे हो गये थे और घर के सारे दायित्वों का भार उन्हीं पर आ गया। लिहाजा उन्होंने संगीत की प्रारंभिक शिक्षा लुधियाना में ही ली। फिर अली अकबर से शिक्षा लेने के लिए लखनऊ चले गये। संगीत में खासी प्रसिद्धी हासिल की। ताउम्र अविवाहित रहे जयदेव का 65 साल की आयु में निधन हो गया लेकिन कुछ अमर धुनें देकर वे अपनी जगह बना गये। बहुत कम लोगों को पता होगा कि एसडी बर्मन, मदन मोहन के अलावा लता मंगेशकर को जयदेव का ही संगीत पसंद था। याद करिये रेशमा और शेरा, गमन, प्रेम पर्वत के गीत—इन फिल्मों की अमर धुनें जयदेव ने ही दी थीं। गमन फिल्म की ग़ज़ल ‘रात भर आप की याद आती रही’ को जो धुन दी है वह ही फिल्म को चलाती है। किसी संवाद, किसी बयानबाजी की जरूरत नहीं। हम दोनों के सभी गीत लोकप्रिय हुए क्योंकि वे लोगों के आज भी पसंदीदा बने हैं ‘अभी न जाओ छोड़कर’ किसकी जुबान पर नहीं चढ़ता या कौन से कान नहीं चुनना चाहेंगे, इतनी सुंदर मेलोडी? कहा जाता है कि उन्हें बॉलीवुड में बतौर संगीतकार इंट्रोड्यूज करवाने वाले साहिर लुधियानवी थे। एक ही शहर के बाशिंदे जो थे। इस फिल्म के रिलीज होते ही एक और विवाद खड़ा हुआ था। लोग समझते थे कि इस फिल्म को निर्देशित विजय आनंद ने किया था जबकि वह क्रेडिटेड डायरेक्टर थे। शायद फिल्म के निर्देशन में उनकी झलक दिखने की यही वजह रही होगी। लेकिन निर्देशन का कार्यभार अमरजीत ने संभाला था। अमरजीत ने ‍‍‍विजय आनंद के साथ ‘काला पानी’ फिल्म में काम किया था। शायद निर्देशन की पेचीदगियां उन्होंने ‍‍‍विजय आनंद से ही सीखी थीं। वर्ष 1962 में ‍‍बर्लिन में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में अमरजीत को फिल्म के बढ़िया निर्देशन के लिए गोल्डन बियर के लिए नामांकित किया गया। शुरू में इस फिल्म को कार्तिक चटर्जी निर्देशित करने वाले थे। दरअसल ताराशंकर बाबू के उपन्यास ‘उत्तरायण’ पर बनने वाली फिल्म में देवानंद कथानक से काफी छेड़छाड़ कर रहे थे जो कार्तिक चटर्जी को नागवार गुजरा और उन्होंने फिल्म छोड़ दी। ताराशंकर बाबू से उपन्यास लेकर देवानंद ने निर्मल सरकार को पटकथा की जरूरत के मुताबिक बदलाव करने को दिया। निर्मल सरकार के बदलाव के बाद इसे पटकथा में बदला विजय आनंद ने और निर्देशन किया अमरजीत ने, जिन्होंने बाद में देवानंद को लेकर गैम्बलर फिल्म बनायी थी। हम दोनों फिल्म के युद्ध के सीन लेफ्टिनेंट कर्नल मिंटगुमरी ने लिखे थे। इसे काफी जद्दोजहद के बाद तत्कालीन सुरक्षा मंत्रालय ने पास किया। युद्ध के सीन तथा कैंटोनमेंट एरिया पुणे के किरकी का है। जहां दोनों हमशक्ल देवानंद की मुलाकात होती है। मेजर वर्मा का रोल निभाने के लिए देवानंद ने अंग्रेजी बोलने का फौजी लहजा वहां के सैनिक अफसरों से ही सीखा। शुरू में नंदा ने साधना के किरदार की मांग की थी लेकिन बाद में वह रूमा नामक किरदार से ही संतुष्ट हो गयी। क्योंकि मेरे विचार में इसी फिल्म में, उनका रोल सबसे बढ़िया था। याद करिए वह गीत ‘अल्लाह तेरो नाम’ किरदार में कितनी गहराई में खो गयी थी नंदा। साधना के मीता के रूप में रोल के बारे में क्या कहना? वैसे वह दशक साधना का ही था। इसी समय में उनका हेयरकट मशहूर हुआ था, जिसकी नकल बबीता, नजीमा, रंजीता तथा नंदा आदि ने की थी। जहां तक फिल्म की कहानी का सवाल है, इसमें युद्ध के बाद होने वाले प्रभावों के बारे में बताया गया है। युद्ध कितना बुरा है कि खत्म होने के बाद भी इसके असर खत्म नहीं होते। मानवीय संवेदनाओं का पर्दे पर जो निरूपण हुआ है, वह देखते ही बनता है। देवानंद मीता (साधना) नामक लड़की से प्यार करता है जो अमीर मां-बाप की बेटी है जबकि वह बेहद गरीब है और मां के साथ रहता है। जब वह साधना (मीता) के पिता से हाथ मांगने जाता है तो वह उसकी बेरोजगारी का आईना दिखाकर उसकी बेइज्जती करते हैं। वह रोजगार पाने के लिए सेना में भर्ती हो जाता है और अफसर बन जाता है, बिना मीता को बताये वह शहर छोड़ देता है। सच्चाई पता लगने पर मीता बाप का घर छोड़कर देवानंद की मां के पास रहने लगती है जो बेटे की गैर-मौजूदगी में बीमार हो जाती है। स्वयं को उस घर की बहू मानते हुए मीता उसकी खूब सेवा करती है लेकिन मां मर जाती है। उधर, युद्ध पर गये देवानंद की भेंट अपने हमशक्ल मेजर वर्मा से होती है, जिसकी युद्ध के दौरान टांग कट जाती है लेकिन छावनी में मुलाकात के दौरान वह बताता है कि उसके घर में पत्नी रूमा व मां है। दुश्मन से घिरने के कारण कैप्टन बने देवानंद मेजर वर्मा बने देवानंद को घायलावस्था में वहीं छोड़ देता है क्योंकि मेजर वर्मा को गोली लगी होती है। काफी देर खबर न मिलने पर सेना उसे मरा समझ लेती है और इस आशय की खबर घर पहुंचा देती है। जब कैप्टन बना देवानंद मेजर वर्मा के परिवार को ढांढस बंधवाने जाता है तो पत्नी व मां उसे ही मेजर वर्मा समझ लेते हैं। अब फिल्म सस्पेंस की ओर मुड़ती है। मेजर वर्मा के रोल में मातहत किस जज्बाती तूफान से गुजरता है और कैसे सच्चाई के रूबरू सभी को कराता है, फिल्म देखने के बाद ही पता चलेगा। जिन दर्शकों ने यह फिल्म नहीं देखी है, कलात्मक कृति से वे वंचित हैं।

 

गीत
अभी न जाओ छोड़कर : मोहम्मद रफ़ी, आशा भोसले.
अधूरी याद प्यास छोड़कर : मोहम्मद रफ़ी, आशा भोसले.
अल्लाह तेरा नाम ईश्वर तेरा नाम : लता मंगेशकर.
जहां में ऐसा कौन है : आशा भोसले.
कभी खुद पे कभी हालात : मोहम्मद रफ़ी.
मैं जिंदगी का साथ निभाता : मोहम्मद रफ़ी.
प्रभु तेरो नाम जो ध्याय फल पाये : लता मंगेशकर.

निर्माण टीम
प्रोड्यूसर : देव आनंद (नवकेतन फिल्म्ज)
निर्देशक : अमरजीत, विजय आनंद (क्रेडिट)
मूलकथा : ताराशंकर बाबू कृत उत्तरायण
पटकथा व संवाद : विजय आनंद, मूल कृति का निर्मल सरकार के संपादन के आधार पर।
गीतकार : साहिर लुधियानवी
संगीतकार : जयदेव
सिनेमैटोग्राफी : वी. रतड़ा
सितारे : देवानंद, साधना, नंदा आदि।


Comments Off on हम दोनों
1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (No Ratings Yet)
Loading...
Both comments and pings are currently closed.

Comments are closed.

Manav Mangal Smart School
Powered by : Mediology Software Pvt Ltd.