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हंगामे से शुरू हुई सदन की पहली बैठक

Posted On January - 22 - 2020

चंडीगढ़ नगर निगम में बैठक के दौरान बहस करते कांग्रेस के पार्षद। -मनोज महाजन

रंजू एेरी डडवाल/ट्रिन्यू
चंडीगढ़, 21 जनवरी
नवनिर्वाचित मेयर राजबाला मलिक की अगुआई में वर्ष की पहली सदन की बैठक में जमकर हंगामा हुआ। शून्यकाल के दौरान भाजपा और कांग्रेस के पार्षद आपस में उलझे रहे। वाल्मीकि शोभा यात्रा के दौरान लगे विज्ञापनों और बैनरों पर नोटिस व जुर्माना और ठेके पर रखे गए एक कर्मी गुरचरण सिंह को नौकरी से हटाए जाने के मामले को लेकर नोक-झोंक हुई।
मांग उठाई गई कि धार्मिक समारोह के विज्ञापन व बैनर लगाने पर छूट दी जाये। पूर्व महापौर और पार्षद राजेश कुमार कालिया ने शोभायात्रा के दौरान लगे बैनर पर 68 लाख का जुर्माना लगाये जाने का मसला उठाया, लेकिन विपक्षी पार्षद सतीश कैंथ से लेकर भाजपा के ही मनोनीत पार्षद सचिन लोहटिया ने उन्हें घेर लिया। दोनों ने ही पूर्व महापौर पर आरोप लगाए किए उनके कार्यकाल के दौरान यह कार्रवाई की गई थी। लोहटिया ने कहा कि आने वाले दिनों में रविदास जयंती, शिवरात्रि पर क्या कार्रवाई की जाएगी?

चंडीगढ़ नगर निगम में मंगलवार को चंडीगढ़ के नवनियुक्त भाजपा अध्यक्ष अरुण सूद को बधाई देती नव -निर्वाचित मेयर राजबाला मलिक।

सूद को दी गई बधाइयां
इससे पहले बैठक में चंडीगढ़ भाजपा के अध्यक्ष बने अरुण सूद को महापौर राजबाला सहित सभी पार्षदों ने बधाई दी। पूर्व महापौर आशा जसवाल ने कहा कि उम्मीद है कि अब अध्यक्ष अरुण सूद नगर निगम को केंद्र सरकार से ज्यादा से ज्यादा बजट दिलवाने का प्रयास करेंगे। महापौर राजबाला मलिक ने कहा कि शहर के विकास के लिए उन्हें सभी पार्षदों का सहयोग चाहिए।
अब समाज के बारे में सोचना पड़ता है : कालिया
कालिया की दलील थी कि जब वह महापौर थे तो अधिकारियों के काम-काज में हस्तेक्षप नहीं कर सकते थे, उन्हें पूरे शहर का सोचना होता है। लेकिन अब नीचे आ गए हैं तो उन्हें समाज के प्रति सोचना पड़ता है। उन्होंने कहा नौकरी से हटाया जाना एक अलग विषय है। बहस में निगम आयुक्त केके यादव ने पूर्व महापौर कालिया का बचाव किया। उन्होंने कहा प्रशासनिक कार्यवाई में महापौर का कोई हस्त़क्षेप नहीं होता है। कांग्रेस पार्षदों बबली व कैंथ ने पलटवार करते हुए दूसरी शोभायात्रा के पोस्ट दिखाए।
31 लाख रुपये का पड़ेगा बोझ
धन की कमी की समस्या से जूझ रहे चंडीगढ़ नगर निगम में मंगलवार को सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर के लिए सरकारी वाहन, ड्राइवर, प्रति माह 250 लीटर ईंधन को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा प्रत्येक पार्षद को 100 लीटर ईंधन प्रति माह दिया जायेगा। इस कदम से स्थानीय निकाय पर लगभग 31 लाख रुपये प्रति वर्ष का आर्थिक बोझ पड़ेगा। हालांकि कुछ शहर के निवासियों और पार्षदों ने निगम के इस फैसले का विरोध किया है। हालांकि यह मुद्दा प्रमुख या सप्लीमेंटरी एजेंडे में शामिल नहीं था लेकिन सीनियर डिप्टी मेयर रवि कांत शर्मा, डिप्टी मेयर जगतार सिंह और बीजेपी व कांग्रेस के कुछ पार्षदों के द्वारा लिखे पत्र के आधार पर प्रस्ताव को फौरी तौर पर निगम के पटल में पेश और मंजूर कर दिया गया।
सीट बदलने पर नाराजगी
पार्षद हीरा नेगी ने सदन में अपनी सीट पीछे किए जाने पर नाराजगी जताई। हीरा नेगी ने कहा कि वह सदन की मर्यागा का खयाल रखेंगी जहां उनकी सीट तय की गई है वहीं बैठेंगी। इस पर महापौर राजबाला मलिक ने कहा कि बैठक में पार्षद अपनी तय सीटों पर नहीं बैठें हैं। इसीलिए वे भी उठकर आगे आ सकती हैं। लेकिन नेगी ने मना कर दिया। 3 पूर्व राजेश कुमार कालिया, आशा जसवाल और देवेश मौदगिल को सबसे आगे एक साथ बैठा दिया गया है। खास बात यह है कि पूर्व मेयर मौदगिल और आशा जसवाल के बीच छत्तीस का आंकड़ा है। मौदगिल और कालिया की भी आपस में नहीं बनती है।


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