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स्कूली पाठ्यक्रम में विदेशी ज्ञान कोष

Posted On January - 26 - 2020

राजवंती मान
हमें आजाद हुए लगभग तीन-चौथाई सदी बीत चुकी है। आज देश अपना गणतन्त्र दिवस मनायेगा। लालकिले से देश के स्वर्णिम इतिहास और कार्यकलापों का जिक्र हर व्यक्ति को गर्व से भर देता है। इस अवसर पर विशेष आकर्षण होते हैं स्कूली बच्चे क्योंकि वे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। इसलिए हमारी किंवदन्तियों, जनश्रुतियों में बच्चों के लिए दृष्टान्त-स्वरूप उल्लेख की जाने वाली विषयवस्तु असम्बद्ध इतिहास की घटनाओं के आधार पर गुनी-बुनी अनेक कथाएं प्रचलित होती हैं। दंतकथाओं के माध्यम से लोकसाहित्य, लोकाचार, लोक-इतिहास का अभिवहन भावी पीढ़ियों के लिए होता है। इनसे ध्वनित होने वाली कई कथाएं हम सभी बचपन में सुनते आये हैं। बाल्यावस्था में कंठस्थ की गई कविताएं, गणित के फार्मूले, उक्तियां आदि आदमी को उम्र भर नहीं भूलतीं।
आज के सन्दर्भ में लीजिये तो अंग्रेजी स्कूलों की नर्सरी कक्षाओं में हमने या हमारे बच्चों ने ‘राइम, यानी छोटी-छोटी तुकान्त कविताएं जरूर पढ़ी होंगी या अब भी पढ़ी जा रही हैं। इन्हें अध्यापिकायें बच्चों को मुंह जुबानी रटवा देती हैं। यहां तक कि घर में कोई मेहमान आ जाये तो उनके सामने माता-पिता बच्चों को ‘राइम’ सुनाने के लिए बच्चों पर जोर डालते हैं। चलिए आज मैं ही सुना देती हूं:
“रिंग ए रिंग रोजिज
पॉकेट फुल ऑफ़ पोजिज
आईशु, आईशु
वी आल फाल डाउन!’
आईशु –आईशु, वी ऑल फॉल डाउन क्या है ?
इस राइम को टीचर ने बच्चों को इस तरह रटवाया होता है कि जब बच्चे इसे सुनाते-सुनाते ‘आईशु –आईशु, वी आल फाल डाउन’ कह कर लेट जाते हैं। आप कहेंगे कि ये क्या लेकर बैठ गई तो चलिए जानते हैं इस तुकान्त कविता के उद्गम के बारे में। इतिहास हैं कि इंग्लैंड में 1665-66 ईस्वी में भयंकर प्लेग फैल गया, जिसमें एक लाख के करीब लोग मारे गए। लोग इस महामारी से इस कदर भयभीत हुए कि बचाव के लिए अनेक तरह के जादू-टोने और जड़ी बूटियों का इस्तेमाल करने लगे। यह राइम उस भयंकर प्लेग की वीभत्स विद्रूपता का चित्रण है या यूं कहिए कि उसके लक्षणों के बारे में सचेत करती है। प्लेग का पहला लक्षण व्यक्ति के शरीर पर गुलाबी रंग के निशान अर्थात चकत्ते (रिंग) हो जाते थे। प्लेग से बचाव के लिए जड़ी -बूटियों को सुंघाया जाता था। लोक विश्वास के अनुसार अगर यह सूंघ कर मरीज छींक देता तो वह ज़रूर मरेगा। ‘वी आर फाल डाउन’ वहीं से निसृत तुकान्त है।
वैसे लंदन प्रवास के दौरान मैंने इस तरह की अन्य कई कहानियों के स्रोत, प्रयोग और उद्भव को न सिर्फ जाना और समझा बल्कि अनुभव किया।
लिटिल जैक हार्नर के बारे में जानें
अब, भारतीय स्कूलों की प्राइमरी कक्षाओं में पढाई जाने वाली एक और राइम की बात करेंगे तो आप भी अपने बचपन या बच्चों की यादों में उतर जायेंगे।
“ लिटिल जैक हार्नर
सिटिंग इन ए कॉर्नर
ईटिंग ए क्रिसमस पाई
ही पुट इन हिज थम्ब
एण्ड पुल्ड आउट ए पल्म
एण्ड सैड, ‘व्हाट ए गुड़ ब्यॉय एम आई!”
लिटिल जैक नाम का किशोर 1530 ईस्वी के आसपास हुआ है जब इंग्लैंड में हेनरी अष्टम (1491-1547) का शासन था। हेनरी ने धार्मिक सुधारों के नाम पर चर्चों की सत्ता खत्म करने के इरादे से जब मठों, विहारों और चर्चों को तोड़ना जारी रखा तो धार्मिक संस्थाओं के मुखिया भयभीत हो उठे और हेनरी अष्टम को खुश करने के प्रयास करने लगे। हुआ यूं था कि हेनरी अष्टम जो अपनी छह शादियों के लिए जाना जाता है, की पहली शादी उसके बड़े भाई की विधवा कैथरीन (1485-1536) से करवा दी गई। कैथरीन जब तीन साल की थी तो उसकी सगाई प्रिंस ऑफ़ वेल्स अार्थेर हेनरी से हो गई थी और बाद में सोलह साल की उम्र में शादी ही गई। अार्थेर की विवाह के पांच महीने बाद ही मृत्यु हो गई। कैथरीन अरगांव की राजदूत थी जो यूरोपीय इतिहास की प्रथम महिला एम्बेसडर बनी थी। उसका पुनर्विवाह 1509 में अार्थेर के छोटे भाई हेनरी से हो गया।
हेनरी को एक अन्य स्त्री से प्रेम हो गया और उसने कैथरीन से सम्बन्ध विच्छेद करना चाहा क्योंकि उसका कोई पुत्र जीवित नहीं रहा। उसकी तीन बेटियां थीं, जिन्हें राजगद्दी देने का अतीत में कोई उदाहरण नहीं था। इसे लेकर या कहें कि पुत्र न होने का बहाना लेकर उसने तलाक के लिए आवेदन किया। बहुत दिनों तक मुकदमा चला। अंततः 1533 में कैथोलिक चर्च के पोप क्लीमेंट सप्तम ने इस विवाह विच्छेद की अनुमति नहीं दी और विवाह तोड़ने से इनकार कर दिया।
आगबबूले हेनरी अष्टम ने चर्चों की सभी शक्तियां छीन लीं और इंग्लैंड के पादरी की मदद से खुद ही चर्च का मुखिया बन कर इस विवाह को तोड़ दिया और उस नारी से शादी कर ली। कैथरीन ने हेनरी को चर्च का मुखिया मानने से इनकार कर दिया और खुद को उसकी असली पत्नी और रानी घोषित कर दिया। लोगों की सहानुभूति भी रानी के साथ हो गई। इंग्लैंड का मध्यकालीन इतिहास हेनरी अष्टम के इर्द गिर्द घूमता ही नज़र आता है।
इसी दौर में लिटल जैक हार्नर वास्तव में थॉमस हेनरी था जो ग्लासटोम्ब्री के विहार (monastery) के मठाधीश रिचर्ड व्हिटिंग का खाद्य प्रबंधक था। यह विहार ईसाइयत का शुरुआती गढ़ और पालना- झूलना था। कहा जाता है कि किंग हेनरी अष्टम को शांत करने व मनाने के लिए रिचर्ड व्हिटिंग ने क्रिसमस पाई जो इस अवसर का खास मिष्ठान है और कुछ उपहार देकर भेजने की जिम्मेदारी जैक हार्नर को दी। वह ये उपहार (पाई) लेकर लंदन चला गया। रास्ते में उसे भूख लगी और उसने इनमें से एक पाई निकाल कर खा ली।
उक्त राइम में ‘प्लम’ शब्द उसी पाई के लिए प्रयोग किया गया है। थामस हार्नर ने इसे स्वीकार किया है परंतु उनके उत्तराधिकारी इसे मानहानि मानते हैं। खैर, कहानी जो भी हो, हम तो अपने बच्चों को अंग्रेजी में इस कविता को पढ़ा ही रहे हैं और भी अनेक ऐसी छोटी -छोटी कविताएं पढ़ाते ही चले जा रहे हैं!
लंदन ब्रिज इज फॉलिंग डाउन की कहानी
मुझे इन कविताओं के पीछे की कहानियों के बीज-मन्त्र ब्रिटेन के संग्रहालयों और पुस्तकालयों में ही मिले हैं तो चलिए एक और कविता की बात कर लेते हैं जो लंदन में लगी भयंकर आग से निसृत है। इस आग में लगभर पूरा लंदन चपेट में आ गया। थेम्स पर बना पुल जिसे लंदन ब्रिज कहा जाता है, वह नष्ट होकर गिर पड़ा। उन्होंने इन छोटी-छोटी कविताओं के माध्यम से इतिहास की इन प्रमुख घटनाओं-दुर्घटनाओं को चिन्हित करके अपने बच्चों को इतिहास की जानकारी देने के लिए पाठ्यक्रम में रखा है। हम जाने अनजाने अन्ध अनुसरण में भारतीय बच्चों को अंग्रेजी इतिहास नर्सरी कक्षा से ही रटवा देने का कार्य कर रहे हैं। लीजिये एक कविता और सुनिए और सोचिये कि हमारे बच्चे इनसे किस तरह लाभान्वित हो रहे हैं :-
“ लंदन ब्रिज इज फॉलिंग डाउन
फालिंग डाउन, फॉलिंग डाउन
लंदन ब्रिज इज फॉलिंग डाउन
माई फेयर लेडी
बिल्ड इट विद आयरन बार्स!”
यह फेयर लेडी स्कॉटलैंड की सुकुमारी मानी जाती है, जिसने लोहे के सरियों से थेम्स नदी पर पुन: पुल बनवाने का कार्य किया। यह कविता कई रूपों में हमारे स्कूली पाठ्यक्रम का भी अंग बनी हुई है।
अंत में अंग्रेजी की नर्सरी कक्षा की लोकप्रिय कविता जो प्राइमरी पुस्तकों में संगृहित है, चलते चलते उसका भी जिक्र कर दूं, जिसका सदियों से अंग्रेजी इतिहास में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है :-
‘मैरी मैरी क्वाइट कन्ट्रेरी
हाउ डज योर गार्डन ग्रो
विद सिल्वर बेल्स एंड कोकल शेल्स
एण्ड प्रेटी मेड्स, आल इन ए रोव’
मैरी क्वीन ऑफ़ स्कॉट्स, इस राइम की नायिका मानी जाती है, जिसकी शादी छह साल की उम्र में फ्रांस के राजकुमार डाफिन से हुई। उसके पति ने उसको एक ड्रेस भेजी जो चांदी की घंटियों, शंखों, सीपियों से सुसज्जित थी। साथ में सुन्दर सेविकाएं उसकी सेवा के लिए कतारबद्ध थीं। इस कविता में उसी कहानी को बताया गया है ताकि वहां के इतिहास की जानकारी उनके बच्चों को दी जा सके। हालांकि इसके उद्गम के बारे में मतभेद है।
इस आलेख में प्रस्तुत की गईं सामग्री केवल उदाहरण स्वरूप दी गई है। इस तरह की बहुत सी कविताएं पाठ्य सामग्री के रूप में भारतीय बच्चों के स्कूली पाठ्यक्रम का हिस्सा हैं जो बच्चों को कंठस्थ करवा दी जाती हैं। इनकी उपयोगिता एवं आवश्यकता के सम्बन्ध में सिलेबस निर्धारकों को विचार करने की ज़रूरत है।


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