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सीएए से कोई राज्य नहीं कर सकता इनकार

Posted On January - 19 - 2020

कोझिकोड, 18 जनवरी (एजेंसी)
कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने शनिवार को कहा कि संसद से पारित हो चुके नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) को लागू करने से कोई राज्य किसी भी तरह से इनकार नहीं कर सकता और ऐसा करना असंवैधानिक होगा। पूर्व कानून एवं न्याय मंत्री ने केरल साहित्य उत्सव के तीसरे दिन कहा, ‘जब सीएए पारित हो चुका है तो कोई भी राज्य यह नहीं कह सकता कि मैं उसे लागू नहीं करूंगा। यह संभव नहीं है और असंवैधानिक है। आप उसका विरोध कर सकते हैं, विधानसभा में प्रस्ताव पारित कर सकते हैं और केंद्र सरकार से (कानून) वापस लेने की मांग कर सकते हैं। लेकिन संवैधानिक रूप से यह कहना कि मैं इसे लागू नहीं करूंगा, अधिक समस्याएं पैदा कर सकता है।’
केरल सरकार ने इस सप्ताह की शुरुआत में सीएए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। केरल, राजस्थान, मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित कई राज्यों ने सीएए के साथ ही राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या पंजी (एनपीआर) का विरोध किया है। वरिष्ठ वकील और नेता ने समझाया कि जब राज्य यह कहते हैं कि वह सीएए को लागू नहीं करेंगे तो उनका क्या मंतव्य होता है और वह ऐसा कैसे करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्यों का कहना है कि वे राज्य के अधिकारियों को भारत संघ के साथ सहयोग नहीं करने देंगे। उन्होंने कहा, ‘एनआरसी, एनपीआर पर आधारित है और एनपीआर को स्थानीय रजिस्ट्रार लागू करेंगे। अब गणना जिस समुदाय में होनी है वहां से स्थानीय रजिस्ट्रार नियुक्त किए जाने हैं और वे राज्य स्तर के अधिकारी होंगे।’ सिब्बल ने कहा कि व्यावहारिक तौर पर ऐसा कैसे संभव है, यह उन्हें नहीं पता लेकिन संवैधानिक रूप से किसी राज्य सरकार द्वारा यह कहना बहुत कठिन है कि वह संसद द्वारा पारित कानून लागू नहीं करेगी। सीएए के विरोध में राष्ट्रव्यापी आंदोलन को ‘नेता’ और ‘भारत के लोगों’ के बीच लड़ाई करार देते हुए उन्होंने कहा कि भगवान का शुक्र है कि देश के ‘छात्र, गरीब और मध्य वर्ग’ आंदोलन को आगे ले जा रहे हैं, न कि कोई राजनीतिक दल।
दूल्हे ने शादी के कार्ड पर छापा सीएए के समर्थन में नारा
नरसिंहपुर (एमपी) (एजेंसी) : मध्य प्रदेश में एक दूल्हे ने अपनी शादी के निमंत्रण कार्ड पर सीएए के समर्थन में नारा छापा है। दूल्हे प्रभात गढ़वाल ने कहा कि सीएए के विरोध के दौरान देश में हुई हिंसा को लेकर वह परेशान है इसलिये उसने इस तरह से इसके समर्थन में आने का निर्णय लिया। दूल्हे ने कहा कि उसने शादी के कार्ड पर नारा छापा है, ‘आई सर्पोट सीएए’ क्योंकि वह मानता है कि लोगों को संवैधानिक कानून के प्रति विश्वास और निष्ठा होनी चाहिये। प्रभात ने कहा कि शादी के कार्ड में इस नारे को पढ़ने के बाद जो भी उससे इस बारे में बात करेगा, वह उसकी गलत धारणा को दूर करने के लिये सीएए के तथ्यों की व्याख्या करेंगे। उन्होंने बताया कि सीएए के समर्थन में नारे को छापने का निर्णय उसका अपना था।

बेंगलुरू में शनिवार को सीएए, एनआरसी, एनआरपी के खिलाफ प्रदर्शन में नारेबाजी करतीं महिलायें। -एजेंसी

… और जारी है विरोध प्रदर्शन
बेंगलुरू/लखनऊ : उधर देश के कई हिस्सों में सीएए के खिलाफ विरोध प्रदर्शन भी हो रहे हैं। शनिवार को बेंगलुरू, चेन्नई, कोलकाता एवं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में भी विरोध प्रदर्शन हुए। लखनऊ में हाथों में सीएए और एनआरसी वापस लेने संबंधी नारे लिखे बैनर और तख्तियां लिए करीब 50 महिलाओं और बच्चों ने शनिवार शाम से पुराने लखनऊ के स्थित घंटाघर प्रांगण में शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शन कर रही महिलाओं का समर्थन करने पहुंची सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जाफर ने कहा कि सीएए एक असंवैधानिक क़ानून है और यह देश की आत्मा के खिलाफ है।

सीएए केंद्रीय सूची में : आरिफ मोहम्मद
जयपुर (एजेंसी) : केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने शनिवार को कहा कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) पूरी तरह से केंद्रीय सूची का विषय है और सभी राज्यों को इसे लागू करना ही पड़ेगा। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि भारत की परंपरा ज्ञान की परंपरा है। यहां एक कार्यक्रम में आए खान से जब अनेक राज्य सरकारों द्वारा सीएए का विरोध किए जाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, ‘सीएए खालिस और खालिस केंद्रीय सूची का विषय है, ये राज्य सूची का विषय नहीं है। हम सभी को अपने अधिकार क्षेत्र को पहचानने की जरूरत है।’ यह पूछे जाने पर कि क्या विरोध कर रही राज्य सरकारें इसे लागू करेंगी, उन्होंने कहा, ‘इसके अलावा कोई चारा नहीं है।’ उन्होंने कहा, ‘लोग किसी भी विषय पर अपनी अपनी राय रखते हैं, उसका स्वागत है। बस एक बात का ध्यान रखना चाहिए, हमें अपनी राय देने का अधिकार है, अपनी राय पर अड़े रहने का अधिकार है, अपनी बात के लिए विरोध करने का भी अधिकार है लेकिन यह अधिकार नहीं है कि हम कानून की सीमाएं तोड़ें।’


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