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साझे आसमान में संग-संग उड़ान

Posted On January - 12 - 2020

मोनिका शर्मा

रिश्तों के रंग बेहद खूबसूरत होते हैं। अनचाही उलझनें ही इसके रंग फीके करती हैं। चाहे मायके-ससुराल के रिलेशन हों या हमारे दोस्त और सहकर्मी। सभी एक स्नेह और सहयोग की अनदेखी डोर से बंधे होते हैं। समझ और सामंजस्य की यह डोर उम्रभर साथ चलती है।
स्नेह की डोर बांधे नहीं, थामे
स्नेह की डोर प्यार और लगाव के धागे में बहुत कुछ बांधे रहती है। लेकिन रिश्तों की यह डोर सुलझी रहे तो सहजता और स्नेह बने रहते हैं। वरना स्नेह और साथ की उड़ान वाले सभी रिश्ते पीछे छूटने लगते हैं। दूरियां बढ़ने लगती हैं। बातचीत की कड़ियां टूटने लगती हैं। कभी-कभी ऐसी उलझनों से रिश्ते में हमेशा के लिए गांठ पड़ जाती है। हद से ज्यादा उलझनें किसी रिश्ते को हमसे काट कर हमेशा के लिए अलग भी कर देती हैं। ज़रूरी है कि हम समय रहते समझें और इस स्नेह की डोर को उलझने ही ना दें। इसके लिए सबसे अहम है कि हम इस डोर से एक-दूसरे को थामने की सोचें, ना कि बांधने की।
खुलकर भरें उड़ान
मौजूदा दौर में रिश्तों को उलझनों से बचाने के लिए जरूरी है कि सभी को अपना-अपना आसमान चुनने दें। हमसे जुड़े लोगों की भी अपनी एक जिन्दगी है। अपनी सोच है। पसंद-नापसंद है। जिसमें बेवजह की दखल दूरियां ही बढ़ाती है। इसीलिए हर रिश्ते से जुड़े ऐसे पहलुओं को समझें। इसके लिए उनके मन की सुनें और समझें। करीबी रिश्तेदार हों, कलीग हों या दोस्त। सलाह, समझाइश या व्यक्तिगत जिंदगी की बातें, बेवजह कभी ना करें। ऐसी बातें रिलेशंस में स्ट्रेस ही पैदा करती हैं। जिससे किसी के मन में उपजा तनाव रिश्ते की डोर ही तोड़ देता है। इसीलिए रिश्ते सामाजिक हों या पारिवारिक, आपसी जुड़ाव को बनाये रखने के लिए सभी को खुलकर पंख फैलाने दें। अपनों को उनके अपने आसमान में उड़ान भरते हुए हर ख़ुशी बटोरने का मौका दें।
हर हाल में साथ दें
रिश्ते जीवन की साझी उड़ान के लिए होते हैं, ना कि पेच लड़ाने के लिए। इसीलिए अपनों के विचार या व्यवहार की काट ना तलाशें। ज़रूरी हो तो समझाइश दें। साथ होने का संबल दें। किसी को कमतर साबित करने की कोशिश ना करें। यह एक बड़ा सच है कि हर रिश्ते में सहयोगी रवैया ही काम आ सकता है। ना कि किसी अपने-पराये को छोटा और अपमानित महसूस करवाने वाला व्यवहार। इससे आपस में दूरियां तो बढ़ती ही हैं, वह समस्या भी सुलझने के बजाय और उलझ जाती है। ग़लतफ़हमियां मन के आसमान में मंडराने लगती हैं, जिसके चलते या तो खुद ही यह रिलेशन खत्म हो जाता है या दूसरे लोग ऐसे हालातों का फायदा उठाकर रिश्ते की डोर को हमेशा के लिए काट देते हैं।
बदलाव को स्वीकारें
रिश्तों में सहजता बनाये रखने के लिए हमारा रुख भी सहज होना चाहिए। इससे रिश्तों में जुड़ाव बना रहता है। अपनों को बदलने के बजाय अपने आप को बदलने का नजरिया मिलता है। इसीलिए जैसे पतंग हवा के साथ अपनी दिशा बदल लेती है। आप भी सहज होकर जीने की सोचें। याद रखिये कि एक-दूजे के इमोशंस की क़द्र करते हुए खुलकर जीना परिस्थितियों को उलझायेगा नहीं बल्कि सुलझायेगा। बदलाव को स्वीकारने की यह बुनियाद अपनेपन और प्यार के विस्तार की नींव बनेगी। आपसी तालमेल को और मजबूत करेगी। अनकम्फर्टेबल फीलिंग से दूर रिश्ते ईज़ी गोइंग बने रहेंगे।


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