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शनि करेंगे कल्याण… बस रहे ध्यान इतना

Posted On January - 19 - 2020

विवेक शर्मा
सौरमंडल के अत्यंत शोभनीय, नीली आभा लिए शनि ग्रह की ज्योतिष शास्त्र में अहम भूमिका है। बारह राशियों में से एक साथ आठ राशियों को शनि ग्रह प्रभावित करता है। तीन राशियों को अपनी दृष्टि से, तीन को साढ़ेसाती के रूप में और दो राशियों को ढैया से प्रभावित करता है। नवग्रहों में शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। जिस प्रकार शिक्षक हमें सही मार्ग पर ले जाने की कोशिश करते हैं और गलत करने पर दंडित भी करते हैं, उसी प्रकार शनिदेव भी अनुशासन में रहकर हमें सीमाओं से बांधते हैं।
जन्म-कुंडली में शनि के शुभ होने पर व्यक्ति सुखी और अशुभ होने पर दुखी व चिंतित रहता है। शुभ शनि अपनी साढ़ेसाती व ढैया में जातक को आशातीत लाभ प्रदान करता है, वहीं अशुभ शनि इस समयावधि में घोर कष्ट भी देता है। शनि मंद गति से चलने वाला ग्रह है और एक राशि में दो वर्ष छह मास तक विराजमान रहता है।
न्यायकारक शनि 30 साल बाद आगामी 24 जनवरी को दोपहर बाद अपनी स्वयं की राशि मकर में प्रवेश करेंगे। इस दिन जहां एक ओर वृषभ और कन्या राशि पर शनि की ढैया समाप्त होगी, वहीं दूसरी तरफ मिथुन एवं तुला राशि पर ढैया शुरू होगी। इसी प्रकार शनि की साढ़ेसाती वृश्चिक राशि पर समाप्त होगी और कुम्भ राशि को साढ़ेसाती लगेगी, जो सात वर्ष छह माह तक चलेगी। धनु और मकर राशि पहले से ही साढ़ेसाती से प्रभावित हैं।

साढ़ेसाती
गोचर अनुसार शनि जब जातक की चंद्र राशि यानी जन्म राशि से एक भाव पहले भ्रमण करना शुरू करता है, तब साढ़ेसाती का आरंभ होता है। साढ़ेसाती का अर्थ है साढ़े सात साल। जातक की जन्म राशि से एक भाव पहले और एक भाव आगे तक शनि के भ्रमण में पूरे साढ़े सात साल का समय लगता है।

ढैया
जब शनि जन्म/चंद्र राशि से चतुर्थ या अष्टम भाव में होता है, तब ढैया प्रारंभ हो जाती है। इसकी अवधि दो वर्ष छह माह यानी ढाई साल की होती है।

कर्मों का फल
शनिदेव न्यायाधीश के रूप में व्यक्ति के कर्मों के अनुसार उसे दंडित या गौरवान्वित करते हैं। अपने अहं को भूलकर एक सरल व्यक्ति के रूप में जीवन बितायें, नीयत साफ रखें, छल-कपट और चालाकी से दूर रहें। मांसाहार-शराब छोड़ें। बेसहारा, अपाहिज, असहाय व्यक्तियों की मदद करें। छोटे कर्मचारियों का सहयोग करते रहें। किसी के साथ भी कटु वाणी का प्रयोग न करें। यकीन मानिये यदि आपने यह आचरण अपना लिया तो शनिदेव निश्चित ही प्रसन्न होकर आपको सुख-समृद्धि प्रदान करेंगे।
5 राशियों पर ढैया, साढ़ेसाती का प्रभाव
मिथुन : इस राशि के जातकों की जन्म-कुंडली में शनि अष्टम भाव में रहेंगे, जिसके कारण इस राशि को ढैया लगेगी। वाणी में कटुता आएगी। बनते-बनते काम बिगड़ सकते हैं। मेहनत अधिक करनी पड़ेगी। नौकरी-पेशा लोगों के कार्य क्षेत्र में झगड़े का माहौल बन सकता है। गुस्से की अधिकता स्वयं का नुकसान करेगी। जल्दबाजी में कोई भी फैसला न लें। हर काम किसी अनुभवी से सलाह लेकर करें।

तुला : जन्म-कुंडली में चतुर्थ भाव में शनि के भ्रमण से इस राशि पर भी ढैया शुरू हो जाएगी, जो कष्टकारी रह सकती है। कोई पुराना रोग उभर सकता है। शत्रुओं की वजह से परेशानी हो सकती है। काम के बोझ से अधिक तनाव महसूस करेंगे। माता के स्वास्थ्य का ख्याल रखें। सुख-सुविधा में कमी रह सकती है।

कुम्भ : इस राशि के जातकों पर शनि की साढ़ेसाती का आरंभिक दौर है। इस समय शनि आपकी राशि से बारहवें भाव में स्थित होगा। आमतौर पर यह आर्थिक हानि, छिपे हुए शत्रुओं से नुकसान, बेमतलब की यात्रा और विवाद को दर्शाता है। सहकर्मियों से संबंध अच्छे नहीं रहेंगे और वे आपके कर्मक्षेत्र में बाधाएं खड़ी कर सकते हैं। घरेलू मामलों में भी आपको चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिसके चलते तनाव महसूस करेंगे। अपने खर्चों पर नियंत्रण रखें। इस समय दूर की यात्रा फलदायी नहीं रहेगी। शनि का स्वभाव ही विलंब और तनाव पैदा करने वाला है। हालांकि, अंतत: आपको परिणाम जरूर मिलेगा। इसलिए धैर्य रखें और सही समय का इंतजार करें। इस समयावधि में शनि आपकी सोच को प्रभावित करेगा। कोई भी फैसला जल्दबाजी में मत लें।

मकर : इस राशि के जातकों पर शनि साढ़ेसाती का शिखर चरण है। इस समय शनि का प्रभाव आपके हृदय पर होगा। यह स्वास्थ्य संबंधी समस्या, चरित्र हनन की कोशिश, रिश्तों में दरार, मानसिक अशांति और दु:ख की ओर संकेत करता है। सफलता पाने में कठिनाई महसूस करेंगे। कड़ी मेहनत का पर्याप्त परिणाम नहीं मिलेगा। सेहत पर विशेष रूप से ध्यान देने की जरूरत होगी। मानसिक अवसाद और अज्ञात भय का सामना भी करना पड़ सकता है। संभव है कि इस काल खंड में आपकी सोच, कार्य और निर्णय करने की क्षमता में स्पष्टता का अभाव रहे। कोई भी कार्य भावनात्मक होकर न करें, संतोषपूर्वक परिस्थितियों को स्वीकार करें।

धनु : इस राशि के जातकों पर शनि साढ़ेसाती का अंतिम चरण है। इस समय शनि मूल रूप से आपके पैरों को प्रभावित करेगा। शनि आपकी राशि से दूसरे भाव में गोचर कर रहा है, जो व्यक्तिगत और वित्तीय मोर्चे पर कठिनाइयों को इंगित करता है। साढ़ेसाती के दो मुश्किल चरणों से गुजरने के बाद अब आप कुछ राहत महसूस करने लगेंगे, फिर भी इस दौरान आप आर्थिक दबाव महसूस कर सकते हैं। खर्च नियंत्रित करने की जरूरत होगी। सोच नकारात्मक हो सकती है। आपको उत्साह के साथ परिस्थितियों का सामना करना चाहिए। विद्यार्थियों की पढ़ाई पर थोड़ा नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, उन्हें अधिक परिश्रम की जरूरत होगी। वाहन चलाते समय सावधानी रखें। मांसाहार और शराब से दूर रहकर शनि को प्रसन्न करें। समझदारी से काम लेंगे तो परेशानियों को हल करने में सफल होंगे।

उपर्युक्त फलादेश सामान्य प्रकृति के और आम धारणाओं पर आधारित हैं, जिसके अनुसार शनि की ढैया व साढ़ेसाती अनिष्टकर होती है। ढैया और साढ़ेसाती की अवधि अच्छी रहेगी या बुरी, यह तय करने से पहले वर्तमान में जातक पर चल रही दशा एवं शनि की आपकी जन्मपत्रिका में स्थिति आदि के विश्लेषण के बाद ही सटीक फलादेश किया जा सकता है।


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