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विनेश को टोक्यो में गोल्ड की आस, यूक्रेन में बहा रही पसीना

Posted On January - 16 - 2020

प्रदीप साहू/निस
चरखी दादरी, 15 जनवरी
जुनून हो तो विनेश फौगाट जैसा। रियो ओलंपिक में चोट लगने के बाद करीब डेढ़ साल बिस्तर पर रही। फिर शानदार वापसी करते हुए विश्व चैंपियनशिप में ऐसा दांव लगाया कि गोल्ड जीतकर सीधे टोक्यो ओलंपिक का टिकट झटक लिया। पहले पिता की मौत का गम फिर रियो ओलंपिक में लगी चोट से विनेश की जिंदगी ठहर-सी गई। फिर भी चरखीदादरी की बहादुर बेटी का जज्बा कम नहीं हुआ और एशियन खेलों में महिला कुश्ती में पहला गोल्ड जीतकर इतिहास रचा है। इतना ही नहीं बल्कि शादी के बाद भी विनेश विश्व चैंपियन बनने के साथ टोक्यो ओलंपिक में रियो की चोट का बदला लेते हुए देश के लिए गोल्ड जीतने के लिए अखाड़े में उतरी है। विनेश अब यूक्रेन की राजधानी कीव में ओलंपिक की तैयारी कर रही है।
बता दें कि चरखीदादरी के गांव बलाली निवासी विनेश फौगाट के पिता का वर्ष 2003 में देहांत हो गया था। पिता की मौत के बाद ताऊ द्रोणाचार्य अवार्डी महाबीर फौगाट ने विनेश व उसकी छोटी बहन को अपनाया और अपनी बेटियों के साथ अखाड़े में उतारा। ताऊ के विश्वास व गीता-बबीता बहनों से प्रेरणा लेते हुए विनेश फौगाट ने एशियन खेलों के साथ-साथ विश्व चैंपियनशिप में गोल्ड जीतकर जख्मों पर मरहम लगा दिया। विनेश ने टोक्यो ओलंपिक में क्वालीफाई किया। वर्ष 2018 में पहलवान सोमबीर राठी के साथ शादी करने के बाद भी विनेश लगातार अखाड़ेे में उतरकर ओलंपिक में गोल्ड जीतकर रिकार्ड बनानान चाहती है। इसी मकसद से अर्जुन अवार्डी विनेश वह अब यूक्रेन की राजधानी कीव में प्रेक्टिस कर रही है।
सहेलियां बोलीं, विनेश की मेहनत को सलाम
विनेश की बचपन की सहेलियां कविता व सुनीता ने बताया कि वे पहली से 8वीं कक्षा तक साथ पढ़ी हैं। बचपन से ही विनेश का ध्यान खेलों पर रहा है। बड़ी बहन गीता व बबीता के अखाड़े में उतरी तो पहलवानी शुरू कर दी थी। विनेश ने गीता व बबीता से भी बढ़कर अनेक मेडल जीते हैं और अब ओलंपिक में देश के लिए गोल्ड जीतकर लाएंगी। विनेश की मेहनत को सलाम करते हुए सहेलियों ने कहा कि विनेश विश्व की नंबर वन खिलाड़ी बनकर उनके गांव व देश का नाम रोशन करेंगी।


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