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मौसम का असर करें बेअसर

Posted On January - 11 - 2020

शिल्पा जैन सुराणा
संतुलित और पौष्टिक खाना, विटामिन-सी, विटामिन-ई, ओमेगा-3, कारोटेनोइड्स और प्रोबिओटिक्स वाला खाना आपके बच्चे के शरीर में बीमारी से लड़ने की ताकत को बढ़ाते हैं। तो बच्चे को विटामिन-सी से भरपूर फल जैसे अमरूद, पपीता, संतरा, ब्रोकोली, गोभी, कीवी, शिमला मिर्च और स्ट्राबेरी दें।
पौष्टिक खाना दें
नवजात को बीमारियों से बचाने के लिये ज़रूरी है कि उसके आहार में विटामिन-ई के लिए पालक, टोफू, बादाम, जैतून का तेल, ब्रोकली, लौकी और कद्दू को खाने में शामिल करें। ओमेगा-3 के लिए अखरोट, मछली, सोयाबीन, टोफू बेहतर विकल्प है। कारोटेनोइड्स के लिए मीठा आलू, पालक, गाजर, ब्रोकली और कद्दू को शामिल करें। दही प्रोबिओटिक्स का सबसे अच्छा भंडार है।
सिर्फ मां का दूध
यदि आप नवजात शिशु की मां है तो उसे डिब्बाबन्द दूध की बजाय सिर्फ अपना दूध दें क्योंकि मां का दूध, शिशु के पैदा होते ही उसके शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत बढ़ाने का सबसे अच्छा जरिया होता है। मां के दूध में बीमारी से लड़ने वाले बहुत से तत्व होते हैं जो संक्रमण, एलर्जी, मूत्र की नली का संक्रमण और कई बीमारियों से नवजात को बचाते हैं।
भरपूर नींद लेने दें
नींद की कमी नवजात की सेहत पर विपरीत असर डालती है। नये शिशु को कम से कम 18 घंटे की नींद की जरूरत होती है, घुटने से चलने वाले या नया-नया चलना सीखने वाले शिशु को कम से कम 12 से 13 घंटे नींद की जरूरत होती है जबकि 3 से 5 वर्ष वाले बच्चों को 10 घंटे नींद की जरूरत होती है। अगर आपका बच्चा अच्छे से न सोए तो डॉक्टर से सलाह लें।
समय पर लगवाएं टीके
टीके लगवाना बचपन की बहुत-सी बीमारियों से लड़ने के लिये शरीर को तैयार करता है। तयशुदा टीकों को शिशु की उम्र के हिसाब से और तय समय पर लगवायें। कुछ डाक्टर शिशु को खास वजहों से अलग से कुछ और टीके लगवाने की सलाह देते हैं। बेहतर होगा कि डॉक्टर की सलाह लें ताकि बच्चे बार -बार बीमार न पड़ें।
एक्सरसाइज़ भी है ज़रूरी
आजकल बच्चे बाहर खेलने की जगह टेलीविजन या मोबाइल से चिपके रहते हैं, जिससे उनका शरीर एक्टिव नहीं रह पाता। शोध कहते हैं कि रोज़ाना 30 मिनट की खेलकूद सर्दी लगने के खतरे को 50 प्रतिशत कम कर देती है। तो आप भी बच्चे के साथ बाहर निकल कर थोड़ा टहलना शुरू करें, उसके साथ पार्क में जायें या उसके साथ खेल कर अच्छा समय बितायें जो आप दोनों के लिए अच्छा है।

ज्यादा एंटीबायोटिक न दें
ज्यादा दवाइयां लेना शरीर की बीमारी से लड़ने की ताकत को कम करता है और शरीर को कमजोर करता है। बच्चे के बीमार होते ही उसे तुरंत दवाई देने से बचना चाहिये, जब तक यह डाक्टर की सलाह के मुताबिक न हो। एंटी बायोटिक दवाइयों को लगातार देते रहने से आपके बच्चे के शरीर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। कभी-कभी अपना शरीर खुद ही दवा के असर को नकारने के लिये तैयार हो जाता है।

साफ सुथरा माहौल रखें
घर के माहौल को हमेशा शुद्ध रखें, हाथों को साफ रखें। बच्चे को साफ- सफाई की आदत शुरू से डालें जैसे दिन में दो बार दांत साफ करना, ब्रश को कुछ महीनों में बदलना, नहाना और साफ कपड़े पहनना। बच्चे को सेहतमंद रखने के लिए आप खुद उसके सामने आदर्श बनें।


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