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मेरी प्यारी घोड़ा गाड़ी

Posted On January - 19 - 2020

बाल कविता

मुझको है ये जान से प्यारी,
मेरी प्यारी घोड़ा गाड़ी ।
कहीं कहाए इक्का-तांगा
कोई टमटम कहता,
टापों का संगीत सुनाता
खूब मगन में रहता।
जान से भी ज्यादा अजीज
कमवाती मुझे दिहाड़ी।
मेरी प्यारी घोड़ा गाड़ी ।।
क्षमता के भीतर ही दौड़े
बीच राह ये कभी न छोड़े,
सदा करे पालन नियमों के
नियम सड़क के कभी न तोड़े।
सबको मंज़िल तक पहुंचाए
बजा के भोंपू कहता सबसे
बचो अगाड़ी-बचो पिछाड़ी।
मेरी प्यारी घोड़ा गाड़ी ।।
गांव-शहर तक पहुंचाए ये
ढोकर बोझा ले जाए ये,
कभी किसी को जल्दी हो तो
स्वयं को सरपट दौड़ाए ये
थकने का ये नाम न लेती
हो सपाट या राह पहाड़ी।
मेरी प्यारी घोड़ा गाड़ी ।।
वसीम अहमद नगरामी


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