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बिना लागत के दूर होगा हरियाणा का जल संकट

Posted On January - 17 - 2020

बुलढाना परियोजना से पहले मई 2016 में एेसी थी स्थिति (बायें) और अब (अक्तूबर 2019 की स्थिति) वहां लबालब पानी है।

हरीश लखेड़ा/ट्रिन्यू
नयी दिल्ली, 16 जनवरी
केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा है कि यदि हरियाणा सरकार महाराष्ट्र की बुलढाना परियोजना की तर्ज पर अपने यहां भी इसे अमल करने की अनुमति दे तो गुरुग्राम समेत सभी जिलों का भूजल स्तर फिर से ऊपर आ जाएगा। बिना एक पैसा खर्च किए हरियाणा में सूखे तालाब लबालब हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालय ने 2017 में ही सभी प्रदेशों को पत्र लिखा था, लेकिन महाराष्ट्र को छोड़कर किसी ने भी इस परियोजना पर ध्यान नहीं दिया। बताया गया कि हरियाणा में भूमिगत जल स्तर लगातार गिर गया है। गुरुग्राम में 1974 में 6.63 मीटर पर जलस्तर था, जो 2018 में 28.86 मीटर हो गया। यहां औसतन हर साल 0.5 मीटर जलस्तर गिर रहा है।
गडकरी ने ‘दैनिक ट्रिब्यून’ सेे कहा कि महाराष्ट्र में कभी सूखा ग्रस्त जिलों में शामिल बुलढाना अब जल संकट से मुक्त हो चुका है। अगस्त 2017 में शुरू परियाेजना के बाद अब इस जिले के 4.5 लाख लोगों को जरूरत का पानी अपनी ही नदियों, तालाबों से मिल जाता है। सूखे कुओं में भी पानी आ गया है। खेती और पशुओं के लिए भी पानी उपलब्ध है, जबकि कभी इस सूखा ग्रस्त जिले में टैकरों से पानी भेजा जाता था। पानी संकट के चलते बुलढाना में सबसे ज्यादा किसान आत्महत्या करते थे। उन्होंने कहा कि बुलढाना पायलट प्रोजेक्ट में प्रदेश सरकार का एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ। गडकरी कहते हैं यह आम के आम और गुठलियों का दाम जैसा काम है। गडकरी ने बुलढाना का प्रमाण दिखाते हुए कहा कि अब वहां 491 किमी सड़कों के 12 प्रोजेक्ट हैं। इनसे 55.10 लाख क्यूबिक मीटर पानी भंडारण क्षमता के अतिरिक्त जलाशय बनाए गए। 2019 के मानसून के बाद अब नये व पुराने जलाशयों में 126.05 क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण हो गया।
इस तरह से होता है काम
पानी के लिए परियोजना के बारे में गडकरी ने कहा कि देशभर में सड़कें बन रही हैं। इनके लिए लिए मिट्टी, बजरी, रेत की जरूरत होती है। मंत्रालय ने महाराष्ट्र सरकार, बुलढाना जिला प्रशासन और क्षेत्र के किसानों से बात की और उनके यहां के सूख चुके तालाबों, नालों, नदियों को गहरा करने तथा नये जलाशय बनाने के लिए वहां से मिट्टी लेने की अनुमति मांगी। इससे दो फायदे हुए। एक तो सड़कों के लिए मिट्टी, रेत, बजरी मिलती गई और दूसरी ओर जल संरक्षण के लिए पक्के ढांचे बनते रहे। दूसरे मंत्रालयों में यही काम पैसे देकर होता है। उन्होंने कहा कि वाटर बॉडीज बनाना हालांंकि उनके मंत्रालय का काम नहीं है, लेकिन उन्होंने पहल की और उसके सकारात्मक परिणाम सामने हैं।
दिल्ली-मुंबई मार्ग पर असीम संभावनाएं
हरियाणा को लेकर उन्होंने कहा कि दिल्ली से मुंबई तक जो नया राजमार्ग बनने जा रहा है, उसके आसपास के क्षेत्रों में भी यह जल भंडारण की परियोजना अमल की जा सकती है। इसके लिए हरियाणा सरकार को पहल करनी होगी। गुरुग्राम क्षेत्र में इस राजमार्ग पर काम शुरू हो गया है। यह राजमार्ग हरियाणा, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से गुुजरेगा। उन्होंने कहा कि राजस्थान सरकार ने इसमें दिलचस्पी ली है। इसी तरह अंबाला से कोटपुतली और अमृतसर से जामनगर जाने वाले राजमार्गों समेत देशभर में 22 बड़े राजमार्ग बन रहे हैं। अन्य सड़कें भी बन रही हैं। इसलिए राज्य सरकारों को इनमें दिलचस्पी लेनी चाहिए।


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