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बाल कविता

Posted On January - 12 - 2020

उड़ायें पतंग
मूंगफली का बीता मौसम
घेवर-फीणी का फूला दम
जाती सर्दी पौष बड़ों का
लुत्फ़ उठायें, झूमें हम-तुम
दिन में गर्मी, सर्द रात है
ये फागुन की है शुरुआत
सर्दी, गर्मी फिर हो बारिश
हर मौसम में नई बात है
सूरज दक्षिण की ओर चलेगा
देरी से अब शाम ढलेगी
कुछ दिन की है धूप सुहानी
फिर सबको ताप खलेगा
पेच लड़ायें, पतंग उड़ायें
रुत बदली त्योहार मनायें
गज़क-रेवड़ी, तिलपट्टी से
सबका मुंह मीठा करवायें
                                  -आशा शर्मा
सब्ज़ी वाला
सब्ज़ी वाला भैया आया
ताजा-ताजा सब्ज़ी लाया।
गलियों में आवाज लगाई
आओ बहना, आओ भाई।।
हरा-भरा पालक ले जाओ
खाकर अपना खून बढ़ाओ।
बथुए की भी है तरकारी
बहुत-बहुत है जो गुणकारी।।
गाजर, मूली, बैंगन ले लो
छुट्टे पैसे मुझको दे दो।
सही-सही मैं दाम लगाऊं
बेच सब्जियां घर को जाऊं।।
                                  -कृष्णलता यादव


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