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फ्लैशबैक

Posted On January - 11 - 2020

हिंदी फीचर फिल्म : गृहस्थी

शारा
नाम से ही फिल्म पुराने फैशन की लगती है लेकिन 1963 में रिलीज इस फिल्म की बदौलत जैमिनी पिक्चर्स की पौ बारह हो गयी थी क्योंकि इस फिल्म की प्रोडक्शन कंपनी गणेशन पिक्चर्स ही थी। हालांकि, इसका थीम बाकी फिल्मों से अलग था, लेकिन दर्शकों ने इसे हाथोंहाथ लिया। फलस्वरूप जो शिवाजी गणेशन इस टॉपिक पर हाथ डालते हुए डर रहे थे, उन्होंने इस फिल्म की सफलता से उत्साहित होकर इसे तमिल में भी ‘मोटर सुन्दरम‍् पिल्ले’ के नाम से प्रस्तुत किया, जिसमें उन्होंने अशोक कुमार की भूमिका स्वयं अभिनीत की। फिल्म तमिल में भी खूब चली। फलस्वरूप इसे तेलुगू में भी ‘मंची कुटुम्बम‍्’ के नाम से बनाया गया।
‘गृहस्थी’ से ही दक्षिण भारत की फिल्मों में घर-परिवार से जुड़ी कथा-वस्तु परोसी जाने लगी। इस फिल्म को जितना दर्शकों ने पसंद किया, उतना ही फिल्म समीक्षकों ने भी सराहा। इस फिल्म में संगीत दिया था रवि ने। बढ़िया संगीत के लिए उन्हें कई पुरस्कार मिले, जिनमें स्वामी हरिदास अवार्ड तथा सुर-सिंगर फिल्म अवार्ड भी शामिल है। ‘जीवन जोत जले’ गीत गाने के लिए आशा भोसले को मियां तानसेन पुरस्कार से नवाजा गया। इस गाने को 1963 में 77 फिल्मों के 544 गीतों में से सर्वोत्तम का खिताब मिला।
इस फिल्म के जिस दूसरे गाने को बढ़िया करार दिया गया—वह था गीता दत्त द्वारा गाया गया ‘डिंग डांग’ था। इस फिल्म में राजश्री के अलावा मनोज कुमार भी मुख्य भूमिकाओं में थे। निरूपा राय के बिना तो पुरानी फिल्में बनती ही नहीं थीं।
अगर फिल्में सामाजिक दर्पण हैं तो जाहिर है, इसकी कहानी भी समाज से ही उठायी गयी है। साठ के दशक में यह बात बड़ी लगती थी कि मीडिया नेटवर्किंग के अभाव में कैसे एक व्यक्ति दो-दो परिवारों का मुखिया हो सकता है? और कैसे एक पत्नी को दूसरी की खबर नहीं होती? इस कहानी में ऐसा ही हुआ है। कैसे संकोच के कारण अपनी पसंद के बारे में खुलकर न बोलने पर व्यक्ति को किन हालात में डाल देती है नियति? इसी थीम को लेकन बुनी गयी है गृहस्थी की कहानी। हरीश खन्ना बने अशोक कुमार अपनी पत्नी (निरूपा राय) माया के साथ बड़ी अच्छी जिंदगी गुजार रहे हैं। निरूपा राय से उनकी सात बेटियां और एक बेटा है। उनके साथ अशोक कुमार की विधवा बहन ललिता पवार अपने इकलौते बेटे के साथ भी रहती है। जग्गू बने महमूद ही उसके बेटे का नाम है। तभी अशोक कुमार को अपने नौवें बच्चे के आने की खबर मिलती है। यह बात दीगर है कि अशोक कुमार की बड़ी विवाहित बेटी भी पेट से है। इसके बावजूद अशोक कुमार नये मेहमान के आने से फूला नहीं समाता। अशोक कुमार की दो बेटियों किरण (राजश्री) और कामिनी (इन्द्राणी मुखर्जी) के विवाह की बात करने के लिए जिस दिन उनके अभिभावक अशोक कुमार के घर डिनर के लिए आते हैं, अशोक कुमार दिल्ली से आने में लेट हो जाते हैं लेकिन उनकी गैर-मौजूदगी में एक किशोर लड़का अशोक कुमार के घर पहुंचता है जो स्वयं को अशोक का बेटा बताता है। बस इसी बात से घर में कोहराम मच जाता है। हालात को बेकाबू होता देखकर अशोक कुमार कहानी बयान करता है। उसके मुताबिक वह लड़का माया की छोटी बहन राधा (पुष्पल्ली) का बेटा है, जिसके पिता सच ही अशोक कुमार हैं। दरअसल, अशोक कुमार और पुष्पल्ली का लड़कपन से ही इश्क चल रहा था जब अशोक कुमार अपने ससुर के साथ कार की फैक्टरी में हाथ बंटाता था। चूंकि संकोच के कारण अशोक स्थिति स्पष्ट नहीं कर सके। इसीलिए अशोक की शादी पुष्पल्ली की बड़ी बहन निरूपा से कर दी गयी। अशोक निरूपा को लेकर अपनी बहन और जीजा के पास रंगून चला जाता है ताकि वहां वह नया काम तलाश कर सके। इसी बीच शहर में बम फटता है और अशोक कुमार का सारा परिवार मारा जाता है। निराश होकर अशोक स्वदेश लौटता है जहां उसकी शादी पुष्पल्ली से कर दी जाती है।
पुष्पल्ली के साथ अशोक कुमार की गृहस्थी सुखपूर्वक चल रही है कि एक दिन निरूपा राय अपनी ननद व उसके बेटे के साथ वापस लौट आती है। यहीं से ही कहानी में मोड़ आता है। अशोक कुमार का ससुर उसे दोनों बहनों का पति बने रहने की सलाह देता है। पुष्पल्ली के साथ वह दिल्ली में रहता है और हफ्ते के पांच दिन उनके साथ गुजारता है और शेष दो दिनों के लिए वह दूसरे शहर में बसी निरूपा राय और उसके परिवार से मिलने जाता है। अशोक कुमार हालात से कैसे जूझता है, यह देखने वाली बात है। सच्चाई का पता लगने पर निरूपाराय बहन के बच्चों को अपना लेती है और कहानी खत्म हो जाती है।
गीत
जाने तेरी नज़रों ने : लता मंगेशकर
आज मिली एक लड़की : मोहम्मद रफी
जीवन जोत जले : आशा भोसले
जा जारे जा दीवाने जा : आशा भोसले
वो औरत है जो : मोहम्मद रफी
जरा देख सनम : लता मंगेशकर
पायल खुल खुल जाए : मोहम्मद रफी, आशा भोसले
खिले हैं आज सखी फुलवा : आशा भोसले, लता व ऊषा मंगेशकर
टीम
प्रोड्यूसर : एसएस वासन
निर्देशक : किशोर साहू
पटकथा व संवाद : पंडित मुखराम शर्मा
सिनेमैटोग्राफी : पी. एलप्पा
गीत : शकील बदायूंनी
संगीत : रवि
सितारे : अशोक कुमार, मनोज कुमार, राजश्री, महमूद आदि.


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