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फेफड़ों को सेहतमंद रखेंगे ये प्राणायाम

Posted On January - 11 - 2020

सर्दी में सांस से संबंधित बीमारियों के मरीज़ों की तकलीफ बढ़ जाती है। ऐसे में वे नियमित योग से कुछ राहत पा सकते हैं। योग में ब्रीदिंग यानी सांसों का काफी महत्व है। असल में इसे सारी एनर्जी का मास्टर कहा जाता है। सांस या ‘प्राण’ जीवन शक्ति या जीवन की प्राथमिक ऊर्जा है। यह मूल जीवन की वह शक्ति है जो हमारे समस्त जीवन को नियंत्रित करती है। इसे सभी ऊर्जा का मास्टर रूप कहा जाता है। योग का अभ्यास फेफड़ों और शरीर को स्वस्थ रखने के सर्वोत्तम तरीकों में शामिल है।
अर्ध मत्सयेन्द्रासन
सीने में जकड़न जैसी दिक्कतों को दूर करता है यह प्राणायाम। इस आसन को करने का फायदा यह है कि इससे फेफड़ों को ऊर्जा सही मात्रा में पहुंचती है। इससे फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ जाती है। साथ ही स्ट्रैस कम करने और पीठ के दर्द को दूर करने में यह आसन मदद करता है।
अर्ध मत्स्येन्द्रासन का तरीका
अपने पैरों को बाहर की तरफ फैलाते हुए सीधा बैठें। अब दाहिने पैर को मोड़ लें। धीरे-धीरे बायें पैर को दाएं घुटने के पास लेकर जाएं। अपना बायां हाथ पीछे ले जाएं। अब अपने दायें हाथ की कोहनी का इस्तेमाल करते हुए अपने घुटने को पीछे की तरफ ले जाएं। दाहिना हाथ भी पीछे की ओर रखें और बायें हाथ को दाहिने घुटने के ऊपर रखें। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए बायें कंधे के ऊपर से पीछे की तरफ देखने की कोशिश करें। धीरे-धीरे गहरी सांस लें और कुछ देर इसी मुद्दा को बनाये रखें। ठीक इसी प्रक्रिया को दूसरी तरफ भी दोहरायें।
त्रिकोण आसन
त्रिकोण आसन को फेफड़ों के लिये सबसे अच्छा माना जाता है। इसे करने से फेफड़ों की अच्छी एक्सरसाइज़ हो जाती है। त्रिकोण पोज़ बनाते समय जब हमारा शरीर मुड़ता है तो शरीर की अंदर तक मसाज हो जाती है। इसे भी स्ट्रैस कम करने वाला बताया गया है।
त्रिकोण आसन करने की विधि

  • अपने पैरों में 2 फीट का फासला बनाकर सीधा खड़े हो जाएं। अब अपने दाहिने पैर को 90 डिग्री और बायें पैर को 15 डिग्री पर रखें। धीरे-धीरे सांस खींचते हुए अपनी दाहिनी बांह को सिर के ऊपर ले जाएं ताकि आपका हाथ दूसरे कान
    तक पहुंचे।
  • धीरे से सांस छोड़ते हुए अपने शरीर को बायीं तरफ झुकाएं। इस दौरान घुटने मुड़ने नहीं चाहिये। हाथ भी कान से न हटाएं।
  • अंतिम मुद्रा में अपनी दाहिनी बांह ज़मीन के समानांतर और बायीं बांह बायें पैर के समानांतर होनी चाहिये। इस दौरान बांह को पांव पर टिकने न दें।
  • धीरे-धीरे सांस लें और छोड़ें। इसी तरह कुछ देर प्रक्रिया दोहरायें और वापस अपनी स्थिति में आ जाएं। दूसरी तरफ से भी इसी क्रिया को दोहरायें।

मत्स्यासन
शरीर में रक्त संचार बढ़ाकर फेफड़ों को ऑक्सीजन पहुंचाने में यह आसन भी मददगार है। इससे सांस से जुड़ी समस्याएं तो कम होती ही हैं, साथ ही यह गर्दन और कंधों में तनाव को दूर करने में भी मदद करता है।
तरीका

  • अपने घुटनों के बल झुकें और घुटनों को सीधा करके पीठ के बल लेट जायें।
  • अपने कूल्हों को थोड़ा ऊपर उठाएं और हाथों को अपनी थाई के नीचे रखें।
  • अब धीरे से सांस लें, अपनी कोहनी मोड़ें और अपने पूरे शरीर को ऊपर की तरफ उठायें।
  • छाती को ऊंचा रखते हुए, अपने सिर को पीछे की ओर झुकाएं।
  • जब तक आराम से सांस अंदर और बाहर लें तब तक मुद्रा बनाए रखें। इसे 2-3 मिनट तक कर सकते हैं।

प्राणदायी प्राणायाम
शवासन तो हम सभी करते हैं। एक अन्य प्राणायाम है, जिसे नाड़ी शोधन भी कहते हैं। इसे नियमित रूप से करने से सांस संबंधी परेशानियां खत्म हो जाती हैं। इससे डिप्रेशन और तनाव कम होता है। अस्थमा के मरीज़ों के लिये यह फायदेमंद माना जाता है।

प्राणायाम का तरीका

  • सबसे पहले चटाई पर पीठ को सीधा कर बैठें। कंधों को ढीला छोड़ दें। अब अपने बांयें हाथ को बायें घुटने पर रखें। अपनी हथेली को आकाश की तरफ खुला छोड़ दें।
  • अब दायें हाथ को ऊपर उठाएं और दाहिने हाथ की तर्जनी और मध्यमा अंगुली को भौहों के केन्द्र में रखें। इसके बाद रिंग फिंगर और सबसे छोटी अंगुली को बायें नथुने पर रखें।
  • दायें अंगूठे का इस्तेमाल करके दायें नथुने को बंद करके धीरे-धीरे बायें नथुने से सांस छोड़े। ऐसा बार -बार करें।
  • अब दायें नथुने को बंद रख, बायें से सांस लें। दोनों तरफ यह प्रक्रिया दोहराते रहें। इसी तरह दायें नथुने से सांस लेते हुए बायें से छोड़ दें।

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