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फरीदाबाद का नागरिक अस्पताल : एक साल में 125 बच्चों की मौत

Posted On January - 13 - 2020

वेंटिलेटर की सुविधा नहीं एक बैड पर दो-दो शिशु

फरीदाबाद के सिविल अस्पताल बादशाह खान के नीकू वार्ड में भर्ती शिशु। -हप्र

राजेश शर्मा/हप्र
फरीदाबाद, 12 जनवरी
फरीदाबाद के नागरिक अस्पताल बादशाह खान में वर्ष 2019 के दिसंबर में 16 बच्चों की मौत हुई है। जबकि नए वर्ष के पहले सप्ताह में नागरिक अस्पताल के एनआईसीयू वॉर्ड में भर्ती 3 नवजातों की मौत हो गई है। तीनों का जन्म नागरिक अस्पताल में हुआ था और प्रीमेच्योर होने की वजह से नवजातों की हालत काफी गंभीर थी। वर्ष 2019 के दौरान 125 शिशुओं की इलाज के दौरान मृत्यु हुई है। यह सभी बच्चे नागरिक अस्पताल के नीकू वार्ड में भर्ती थे। वर्ष 2018 में यह आंकड़ा 109 था। शिशुओं की मौत का ग्राफ बढ़ने का मुख्य कारण समय से पूर्व नवजात का जन्म लेने वाले बच्चों में संक्रमण और कई अन्य जन्मजात बीमारियां है। गौरतलब है कि नागरिक अस्पताल में शिशुओं को भर्ती करने के लिए 27 बैड का नीकू वार्ड है। इनमें समय से पूर्व जन्म लेने वाले या जन्म के दौरान किसी प्रकार की समस्या से जूझने वाले शिशुओं को भर्ती किया जाता है, जबकि गंभीर अवस्था के शिशुओं के लिए वेंटिलेटर की कोई सुविधा नहीं है। उन्हें या तो दिल्ली या फिर सफदरजंग अस्पताल रेफर किया जाता है। गंभीर अवस्था में आने वाले शिशुओं के लिए नागरिक अस्पताल प्रबंधन के पास कोई विशेष सुविधा नहीं है।
स्टाफ की भारी कमी
सुविधाओं के अभाव में दो वर्षों में 483 बच्चों को दिल्ली एवं रोहतक रैफर किया है। इनमें से कई शिशुओं की मौत रास्ते में ही हो जाती है, जिसका रिकार्ड नागरिक अस्पताल के पास नहीं है। वर्ष 2018 में 248 और वर्ष 2019 में 235 शिशुओं के अलावा नागरिक अस्पताल के नीकू वार्ड में स्टाफ की भी भारी कमी है। छह मेडिकल ऑफिसर की जगह 3 ही कार्यरत है। इसके अलावा स्टाफ नर्स की संख्या 20 है, जबकि 30 की आवश्यकता है। इसके अलावा 18 में से 14 सफाई कर्मचारी कार्यरत है।
संसाधनों की कमी
सिविल अस्पताल बादशाह खान में एनआइसीयू वार्ड 27 बैड का है और यह बैड हर समय भरे रहते हैं। कई बार एक बैड पर दो-दो नवजातों को भर्ती करना पड़ता है। इनमें से कई बच्चे गंभीर अवस्था में होते हैं। ऐसे नवजातों को कृत्रिम सांस देने के लिए वेंटिलेटर सहित विभिन्न मशीनों में रखा जाता है, जो कि नागरिक अस्पताल के एनआइसीयू वॉर्ड में नहीं हैं। इन सीमित साधनों में नवजात के जीवन को बचा पाना मुश्किल हो जाता है। इसकी वजह से बच्चों को दिल्ली के सफदरजंग या निजी अस्पताल के लिए रेफर करना पड़ता है।
नये साल के शुरू में 3 की गई थी जान
सुभाष नगर निवासी राधारमन के पत्नी प्रियंका को पुत्री हुई थी, जिसकी जन्म के तीन दिन बाद चार जनवरी को मृत्यु हो गई। इसके अलावा बल्लभगढ़ के प्रेम नगर निवासी नवनीत की पत्नी वरीस के पुत्री हुई थी। उसकी मृत्यु तीन जनवरी को हो गई थी। वहीं बसेलवा कॉलोनी निवासी रूपचंद की पत्नी निशा को भी बेटी हुई थी और उसकी मृत्य तीन जनवरी को हुई थी।
इलाज के दौरान 68 लड़कियों की मौत
नागरिक अस्पताल में मरने वाले शिशुओं में बालिकाओं की अपेक्षा बालक अधिक है। वर्ष 2018 में 2334 शिशु भर्ती हुए। इनमें से 57 लड़के और 51 लड़कियों की उपचार के दौरान मौत हो गई, जबकि वर्ष 2019 में 125 में 68 लड़कियां थी, जिनकी मौत हो गई थी।

मरने वालों की हालत गंभीर थी : पीएमओ
सिविल अस्पताल बादशाह की प्रधान चिकित्सा अधिकारी डॉ.सविता यादव का कहना है कि हमारे यहां ऐसी बदतर स्थिति नहीं है। जिन बच्चों की मौत हुई है, उन सभी की जन्म के समय ही हालत बहुत गंभीर थी। डॉक्टरों के भरसक प्रयास के बावजूद उनकी जान नहीं बच सकी। अस्पताल में कुछ कमियां अवश्य हैं, जिनकी तरफ ध्यान दिया जा रहा है। सरकार से बेबी वॉर्मर और फोटोथेरेपी मशीन की मांग की गई थी। उसका रिमाइंडर पत्र भी लिखा गया है। एनआइसीयू वॉर्ड को बढ़ाकर 40 बेड तक करने की योजना है।


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