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पीएफआई और यूपी के प्रदर्शनों में पैसे का लेनदेन

Posted On January - 28 - 2020

नयी दिल्ली, 27 जनवरी (एजेंसी)
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को पता चला है कि उत्तर प्रदेश में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ हाल ही में हुए हिंसक प्रदर्शनों का केरल के संगठन पीएफआई के साथ आर्थिक लेन-देन का संबंध था। आधिकारिक सूत्रों ने सोमवार को यह जानकारी दी। मनी लांड्रिंग रोकथाम कानून के तहत पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) की 2018 से जांच कर रहे ईडी ने पता लगाया है कि संसद में पिछले साल कानून पारित होने के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश में अनेक बैंक खातों में कम से कम 120 करोड़ रुपये जमा किए गए।
सूत्रों ने ईडी की जांच रिपोर्ट के निष्कर्षों के हवाले से कहा कि शक है कि पीएफआई से जुड़े लोगों ने उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में सीएए विरोधी प्रदर्शनों को प्रोत्साहित करने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ईडी ने केंद्रीय गृह मंत्रालय के साथ इन निष्कर्षों को साझा भी किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले दिनों पीएफआई पर प्रतिबंध लगा दिया था। इससे कुछ दिन पहले ही सीएए के खिलाफ राज्य में हुए हिंसक प्रदर्शनों में इस संगठन की संदिग्ध संलिप्तता की बात सामने आई थी। इन प्रदर्शनों के दौरान करीब 20 लोगों की मौत हो गई थी।
सूत्रों ने बताया कि ईडी को पता चला है कि बैंक खातों में जमा किया गया धन कुछ विदेशी स्रोतों से भी आया और कुछ निवेश कंपनियों के खातों में भेजा गया। ईडी ने पीएफआई के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी की प्राथमिकी और आरोपपत्र को उसके खिलाफ पीएमएलए का मामला दर्ज करने के लिए आधार बनाया। पीएफआई का गठन केरल में 2006 में नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट (एनडीएफ) के उत्तराधिकारी के तौर पर हुआ था। सूत्रों ने दावा किया कि ये संदिग्ध हस्तांतरण नकदी में या आईएमपीएस के माध्यम से किये गये और उत्तर प्रदेश में ऐसे मामले बड़ी संख्या में देखे गये जहां सीएए के विरोध में सर्वाधिक संख्या में प्रदर्शन दर्ज किये गये।
संगठन ने किया खंडन
पीएफआई ने इस दावे को बेबुनियाद बताकर खारिज कर दिया है। पीएफआई ने एक बयान में कहा, ‘संगठन ने कई बार यह बात कही है कि हम देश के कानून का पूरी तरह पालन करते हैं और सीएए विरोधी प्रदर्शनों से ऐन पहले 120 करोड़ रुपये पॉपुलर फ्रंट के खातों से हस्तांतरित होने के आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं और इस तरह के आरोप लगा रहे लोगों को इन दावों को साबित करना चाहिए।’ संगठन ने कहा, ‘हमें विश्वास है कि इन सिलसिलेवार आरोपों की भी दशा पहले जैसी होगी जिन्हें कभी साबित नहीं किया जा सका।’
कपिल सिब्बल का भी आया नाम
ईडी जांच के अनुसार इस मामले में 77 लाख रुपये कांग्रेस नेता व वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को दिए गये। इस पर सिब्बल ने पहले कहा कि उन्होंने पीएफआई से कोई पैसा नहीं लिया, हालांकि बाद में उन्होंने कहा कि हादिया केस में अगस्त 2017 से मार्च 2018 के बीच सुप्रीम कोर्ट में पैरवी के लिए उन्होंने 77 लाख रुपये लिए थे।


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