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नये साल का संकल्प

Posted On January - 5 - 2020

ललित शौर्य

मोंटी बंदर बड़ा ही नटखट और शैतान था। वो जंगल के सभी जानवरों की नाक में दम करके रखता था। वो किसी की भी बात नहीं मानता था। अपनी ही धुन में लगा रहता। वो स्कूल में अपने साथियों को परेशान करता था। उसका मन बिल्कुल भी पढ़ाई में नहीं लगता था। उसके मार्क्स भी अच्छे नहीं आते थे। वो हर साल फेल होने से बच जाता था। बस किसी तरह वो नई क्लास में खिसक जाता था। उसके घरवाले मोंटी की इन हरकतों से बहुत परेशान थे।
एक बार मोंटी अपनी ही क्लास के चिंटू चीते से लड़ने लगा। चिंटू दुबला-पतला था। मोंटी हमेशा उस पर रौब दिखाता। उससे अपने काम करवाता।
‘मैं आज से तुम्हारा कोई भी काम नहीं करूंगा। तुम खुद ही कर लिया करो अपना सारा काम। होम वर्क, क्लास वर्क सब कुछ। मुझे अपना भी पढ़ना होता है। मैं तुम्हारे काम की वजह से बिल्कुल भी नहीं पढ़ पा रहा हूं।’ चिंटू ने कहा।
‘आज बहुत बोल रहे हो, क्या बात है। भूल गए पिछले हफ्ते की मार। अगर मार नहीं खानी तो चुपचाप जैसा मैं कहूं वैसा ही करो।’, मोंटी ने चिंटू को डराते हुए कहा।
‘मैं बिल्कुल भी नहीं करूंगा। कर लो तुम्हें जो करना है।’, चिंटू निडरता से बोला।
‘रुको, अभी मजा चखाता हूं। आज बहुत ज़ुबान चल रही है तुम्हारी।’, मोंटी चिंटू पर हाथ उठाते हुए बोला।
मोंटी कुछ कर पाता तब तक हक्कू हाथी सर क्लास में आ गए। हक्कू सर ने मोंटी को डांटते हुए कहा, ‘तुम आज फिर झगड़ने लग गए। तुम्हारी शरारतें हर रोज बढ़ती जा रही हैं। तुम हमारे स्कूल में पढ़ने लायक नहीं हो। मैं अभी तुम्हारी शिकायत प्रिंसिपल सिप्पी सियार सर से करता हूं।’
‘सर ये मुझे हमेशा परेशान करता रहता है।’,चिंटू ने रुअांसा होते हुए कहा।
‘आज से कभी नहीं करेगा। तुम चिंता मत करो बेटा।’, हक्कू सर ने कहा।
हक्कू सर तुरन्त सिप्पी सियार सर के रूम में गए और उन्होंने कहा, ‘सर, मोंटी सभी बच्चों को परेशान कर रहा है। वो अब लड़ाई-झगड़े पर उतर आया है। वो अपना काम खुद नहीं करता, दूसरे बच्चों से करवाता है।’
‘हां, मोंटी की बहुत शिकायतें आ चुकी हैं। अब पानी सर से ऊपर जा चुका है। मैं आज ही उसके अभिभावकों को बुलवाकर उसकी स्कूल से ही छुट्टी करवाता हूं। नहीं चाहिए हमें ऐसे शैतान बच्चे।’, सिप्पी सर ने गुस्से में कहा।
सिप्पी सर ने मोंटी के मम्मी और पापा को बुलवाया। मोंटी के मम्मी-पापा सिप्पी सर के रूम में पहुंचे। ‘आपका बेटा बहुत गड़बड़ कर रहा है। हम आज ही इसे अपने स्कूल से निकाल रहे हैं।’, सिप्पी सर ने कड़कती आवाज में कहा।
‘सर, प्लीज मोंटी को मत निकालिये, वो आज से ऐसा नहीं करेगा।’, मोंटी की मम्मी ने कहा।
‘मोंटी को जल्दी बुलाओ।’, सिप्पी सर ने एक कर्मचारी को आवाज देते हुए कहा।
थोड़ी ही देर में मोंटी भी आ गया। मोंटी अपने पापा-मम्मी को स्कूल में देखकर डर सा गया।
‘ले जाइए इसे यहां से। आज से ये यहां नहीं पढ़ सकता। इसने सबकी नाक में दम किया हुआ है।’, सिप्पी सर ने कहा।
‘सॉरी सर। मैं आज से ऐसा नहीं करूंगा प्लीज।’, मोंटी बोला।
‘ये आज से बिल्कुल भी शैतानी नहीं करेगा। आप एक मौका और दे दीजिए।’, मोंटी के पापा बोले।
सिप्पी सर कुछ सोचने लगे। फिर उन्होंने कहा,’ नया साल आने वाला है। अगर मोंटी नए साल में एक रेजोल्यूशन ले तो माफ किया जा सकता है।’
‘कैसा रेजोल्यूशन सर?’, मोंटी ने उत्सुकता से पूछा।
‘तुम्हें लड़ाई-झगड़ा न करने का, किसी को परेशान न करने का रेजोल्यूशन लेना होगा। तभी तुम स्कूल में रह सकते हो।’ सिप्पी सर ने कहा।
‘ठीक है, मैं रेजोल्यूशन लेता हूं कि आज से किसी को परेशान नहीं करूंगा। अपने से बड़ों का सम्मान करूंगा। उनकी बात मानूंगा।’, मोंटी ने कहा।
प्रिंसिपल सर ने मोंटी की बातों पर विश्वास करते हुए उसे क्लास में जाने को कहा।
सिप्पी सर ने मोंटी के मम्मी-पापा से कहा, ‘अब आप लोग भी जा सकते हैं। देखते हैं मोंटी अपने रेजोल्यूशन में कितना कामयाब होता है।’
देखते ही देखते नया साल आ गया। मोंटी में बहुत बदलाव आ चुका था। अब वो विनम्र हो चुका था। नए साल के दिन उसने सिप्पी सर को हैप्पी न्यू ईयर विश किया। साथ ही अपने दोस्तों के साथ खूब मस्ती भी की।


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