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देखेगी दुनिया वायुसेना का दम

Posted On January - 26 - 2020

योगेश कुमार गोयल
71वें गणतंत्र दिवस समारोह की परेड इस बार यादगार होगी क्योंकि इस परेड में पूरी दुनिया आकाश में भारतीय वायुसेना का दमखम देखेगी। दरअसल परेड में वायुसेना की झांकी में अत्याधुनिक लड़ाकू विमान ‘राफेल’, स्वदेश में विकसित हल्के लड़ाकू विमान ‘तेजस’, स्वदेशी छोटे लड़ाकू एयरक्राफ्ट तथा हेलीकॉप्टर और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें ‘आकाश’ तथा ‘अस्त्र’ प्रदर्शित किए जाएंगे। इनके अलावा अमेरिकी एयरक्राफ्ट चिनूक तथा हमलावर हेलीकॉप्टर अपाचे आसमान में भारतीय वायुसेना के शौर्य का प्रदर्शन करेंगे। विंग कमांडर विपुल गोयल के नेतृत्व में परेड के दौरान फ्लाईपास्ट दो चरणों में होगा, जिसमें भारतीय वायुसेना के कुल 41 एयरक्राफ्ट तथा आर्मी एविएशन विंग के 4 हेलीकॉप्टर शामिल होंगे। गणतंत्र दिवस परेड को लीड करते हुए सबसे पहले एमआई-15 तथा वी-5 हेलीकॉप्टर ‘वाई फॉर्मेशन’ (वाइन ग्लास फॉर्मेशन) में उड़ान भरेंगे। उसके बाद आर्मी एविएशन विंग के चारों हेलीकॉप्टर ‘ध्रुव फॉर्मेशन’ में उड़ान भरेंगे। परेड के बाद राजपथ पर फ्लाईपास्ट के दूसरे हिस्से में वायुसेना के तीन एमके-5 डब्ल्यूएसआई हेलीकॉप्टर और उसके बाद तीन चिनूक हेलीकॉप्टर ‘विक फॉर्मेशन’ में उड़ान भरेंगे। इनके अलावा सी-130जे सुपर हरक्युलिस, सुखोई-30 एमकेआई, सी-17 ग्लोबमास्टर, जगुआर, मिग-29 भी वायुसेना का दमखम दिखाएंगे।
राजपथ पर ये एयरक्राफ्ट दिखाएंगे दम
वायुसेना अपने जिन पांच मॉडलों का प्रदर्शन करेगी, उनमें राफेल, स्वदेशी लड़ाकू विमान एलसीए तेजस, स्वदेशी लाइट कॉम्बेट हेलीकॉप्टर, आकाश एंटी एयरक्राफ्ट मिसाइल तथा अस्त्र मिसाइल सिस्टम शामिल होंगे। फ्रांसीसी एविएशन कम्पनी ‘दसाल्ट एविएशन’ द्वारा निर्मित दो इंजन वाले सबसे आधुनिक माने जा रहे राफेल विमान जल्द ही वायुसेना में शामिल होंगे, जिनकी मारक क्षमता तथा अलर्ट सिस्टम बेहद मज़बूत है, वहीं 21 हजार फुट तक की ऊंचाई पर उड़ान भरने और हवा से ही मिसाइल छोड़ने में सक्षम हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड द्वारा भारत में ही निर्मित हल्के लड़ाकू हेलीकॉप्टर तेजस भी सभी के आकर्षण का केन्द्र होंगे। तेजस 70 एमएम रॉकेट तथा 20 एमएम गन से लैस हैं, जो दुश्मन पर अचूक निशाना साध सकते हैं। डीआरडीओ द्वारा निर्मित स्वदेशी मिसाइलें अग्नि तथा अस्त्र भी परेड का अहम हिस्सा होंगी। ज़मीन से हवा में वार करने वाली अस्त्र मिसाइल 80 से 110 किलोमीटर तक टारगेट कर सकती है और इसे आने वाले समय में मिराज 2000, तेजस तथा मिग-29 से जोड़ा जा सकता है। इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम के तहत अत्याधुनिक तकनीक से बनी ‘अग्नि-2’ मिसाइल भारत की मध्यवर्ती दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे तीन हजार किलोमीटर तक के दायरे में इस्तेमाल किया जा सकता है। बेहतरीन कमांड व कंट्रोल सिस्टम तथा अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस इस मिसाइल में लगे हाई एक्यूरेसी नेविगेशन सिस्टम से सटीक निशाने पर मार की जा सकती है। यह परमाणु हथियारों से लैस होकर एक टन पेलोड ले जाने में सक्षम है।
चिनूक और अपाचे का जलवा
गणतंत्र दिवस परेड में 16 फाइटर जेट, 10 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तथा 19 हेलीकॉप्टर शामिल रहेंगे और सबकी नज़रें खासतौर से अमेरिकी हैवीलिफ्ट हेलीकॉप्टर चिनूक तथा लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे पर केंद्रित रहेंगी। ये दोनों हेलीकॉप्टर पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में फ्लाईपास्ट का हिस्सा बनेंगे। चिनूक के प्रदर्शन में तीन चिनूक हेलीकॉप्टर ‘विक फॉर्मेशन’ में होंगे। ऐसे प्रदर्शन में एक हेलीकॉप्टर आगे की तरफ उड़ता है और बाकी दो हेलीकॉप्टर उसके इर्द-गिर्द थोड़ा पीछे की ओर रहते हैं। चिनूक के बाद अपाचे के प्रदर्शन में वायुसेना के ये नए लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपना जलवा दिखाएंगे। पांच लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे आसमान में तीर जैसा ‘एरोहेड फॉर्मेशन’ बनाकर हवा में कलाबाजियां दिखाते हुए हर किसी को दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर देंगे।
चिनूक की खासियत
बात करें गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार जलवा दिखाने जा रहे चिनूक और अपाचे हेलीकॉप्टरों की विशेषताओं की तो भारतीय वायुसेना की ताकत बढ़ाते हुए 26 मार्च 2019 को चार चिनूक हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल हुए थे। दुनियाभर के कई प्रमुख देशों में लोकप्रिय ‘चिनूक’ अमेरिकी कम्पनी ‘बोइंग’ द्वारा निर्मित हैं और इसी साल 11 और चिनूक हेलीकॉप्टर वायुसेना में शामिल हो जाएंगे। यह ऐसा पहला अमेरिकी हेलीकॉप्टर है, जो बहुत अधिक वजन उठाने में सक्षम है और बख्तरबंद गाडि़यां तथा 155 एमएम की होवित्वर तोप को लेकर भी उड़ सकता है। यह वही हेलीकॉप्टर है, जिसके जरिये अमेरिका ने पाकिस्तान में छिपे दुर्दान्त आतंकवादी ओसामा बिन लादेन को मौत की नींद सुलाया था। सीएच-47 चिनूक एक ऐसा एडवांस्ड मल्टी मिशन हेलीकॉप्टर है, जो भारतीय वायुसेना को बेजोड़ सामरिक महत्व की हैवी लिफ्ट क्षमता प्रदान करेगा, साथ ही यह मानवीय सहायता और आपदा राहत कार्यों में भी इस्तेमाल किया जा सकेगा। यह बहुउद्देशीय हेलीकॉप्टर बहुत तेज़ गति से 20 हज़ार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने और 11 टन तक का वज़न ले जाने में सक्षम है। इसका इस्तेमाल दुर्गम तथा अत्यधिक ऊंचाई वाले स्थानों पर सेना के जवानों, हथियारों, मशीनों तथा अन्य प्रकार की रक्षा सामग्री ले जाने में आसानी से किया जा सकता है, जिससे ऐसे स्थानों पर तैनात सेना के जवानों को जरूरत पड़ने पर हथियार तथा अन्य भारी-भरकम रक्षा सामग्री आसानी से मुहैया करवाई जा सकती है। यह किसी भी मौसम में छोटे हेलीपैड तथा घनी घाटियों में भी उतर सकता है। इसमें एक साथ 45 सैनिकों के बैठने की व्यवस्था है। इसमें छोटी तोपें, बख्तरबंद गाडि़यां इत्यादि विभिन्न युद्धक सामान नीचे लटकाकर कहीं भी ले जाए जा सकते हैं।
हालांकि चिनूक का आकार काफी बड़ा है लेकिन बड़े आकार के बावजूद अन्य हेलीकॉप्टरों के मुकाबले इसकी गति बेहद तेज होती है, जिससे दुर्गम स्थानों पर भी यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है। इसका इस्तेमाल अन्य युद्धक हेलीकॉप्टरों की तरह सीधे तौर पर युद्ध में दुश्मन पर हमला करने में नहीं होता बल्कि यह सैनिकों तथा सैन्य साजो-सामान को दुर्गम स्थानों तक पहुंचाने के लिए उपयोग किया जा रहा है। फिलहाल अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड इत्यादि करीब 25 देश अमेरिका द्वारा निर्मित इन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए कहा जा सकता है कि भारत ने अपनी वायुसेना की ताकत बढ़ाने के लिए ऐसे हेलीकॉप्टरों पर भरोसा जताया है, जिन्हें पहले ही पूरी दुनिया में बहुत अच्छी प्रकार से आजमाया जा चुका है। मौजूदा समय में यह अमेरिका के सबसे तेज हेलीकॉप्टरों में से एक माना जाता है।
सबसे खतरनाक अपाचे अटैक
बात की जाये परेड में जलवा दिखाने वाले दूसरे हेलीकॉप्टर अपाचे अटैक की तो 3 सितम्बर 2019 को 8 अपाचे एएच-64 हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में शामिल किए गए थे और इस वर्ष के अंत तक कुल 22 अपाचे हेलीकॉप्टर वायुसेना को मिल जाएंगे, जिसके बाद भारतीय वायुसेना की ताकत बहुत बढ़ जाएगी। ‘लादेन किलर’ के नाम से विख्यात अमेरिकी एयरोस्पेस कम्पनी ‘बोइंग’ द्वारा निर्मित अपाचे वायुसेना में रूस में निर्मित बहुत पुराने हो चुके एमआई-36 हेलीकॉप्टरों का स्थान लेंगे। एएच-64ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलीकॉप्टर को दुनिया के सबसे आधुनिक और सबसे खतरनाक हेलीकॉप्टरों के रूप में जाना जाता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, सिंगापुर, इस्राइल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, मिस्र, ग्रीस, सऊदी अरब, कतर के अलावा कुछ अन्य देशों की सेनाएं भी इस हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल कर रही हैं और भारत दुनिया का 14वां ऐसा देश है, जिसकी सेना में यह घातक हेलीकॉप्टर शामिल हुआ है।
पांच वर्षों तक अफगानिस्तान में अपाचे हेलीकॉप्टर उड़ा चुके ब्रिटिश वायुसेना में पायलट रहे एड मैकी का कहना है कि अपाचे दुनिया की सबसे परिष्कृत किन्तु घातक मशीन है, जो अपने दुश्मनों पर बहुत बेरहम साबित होती है।
अपाचे की एक विशेषता यह भी है कि यह युद्ध के मैदान में केवल दुश्मन के परखच्चे उड़ाने का ही कार्य नहीं करता बल्कि यह युद्धस्थल की तस्वीरें खींचकर उन्हें अपने एयरबेस पर ट्रांसमिट भी कर देता है।
वायुसेना का शक्ति प्रदर्शन
बहरहाल, चिनूक तथा अपाचे हेलीकॉप्टरों की पूरी खेप वायुसेना में शामिल होने के पश्चात वायुसेना के साथ-साथ थल सेना की ऑपरेशनल ताकत में भी कई गुणा बढ़ोतरी हो जाएगी। चीन और पाकिस्तान सरीखे धूर्त पड़ोसी दुश्मनों के हौसले पस्त करने के लिए भारत की सामरिक क्षमता जिस प्रकार दिनोंदिन बढ़ रही है, वह सामरिक दृष्टि से भारत के लिए सुखद संकेत है। आने वाले समय में चिनूक, अपाचे तथा राफेल के अलावा कुछ और नए अत्याधुनिक लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, मिसाइल प्रणाली तथा अन्य साजोसामान की पूरी खेप मिलने के बाद भारतीय वायुसेना की गिनती दुनिया की सर्वश्रेष्ठ वायुसेनाओं में होने लगेगी। हमारी वायुसेना दुनिया की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना मानी जाती है और चिनूक, अपाचे, राफेल, एस-400 मिसाइल प्रणाली, अत्याधुनिक मिसाइलें इत्यादि मिलकर देश के रक्षा तंत्र को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ भारतीय वायुसेना के आधुनिकीकरण की दिशा में भी मील का पत्थर साबित होंगे। वायुसेना को अत्याधुनिक बनाने तथा देश की सुरक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए इनकी देश को सख्त जरूरत है और यह कहना असंगत नहीं होगा कि ये अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर, युद्धक विमान तथा मिसाइलें भारतीय वायुसेना की अभेद्य ताकत बनेंगे।

अपाचे एएच-64ई
अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कॉरपोरेशन एजेंसी के अनुसार अपाचे एएच-64ई हेलीकॉप्टर भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता को बढ़ाएगा, जिससे भारतीय सेना को जमीन पर मौजूद खतरों से लड़ने में मदद मिलेगी, साथ ही सेना का आधुनिकीकरण भी होगा। अपाचे ऐसा अग्रणी बहुउद्देशीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जो दुश्मन की नाक के नीचे किसी भी मिशन को पूरा करने में सक्षम है। इसे छिपकर वार करने के लिए जाना जाता है, इसीलिए इसका इस्तेमाल दुश्मन के इलाके में आसानी से घुसने में भी किया जाता है। अमेरिकी सेना अपने कई मिशनों में इसका इस्तेमाल कर चुकी है। दुश्मन के इलाके में आसानी से घुसने की क्षमता, जमीन के काफी करीब उड़ान भरने में कारगर, हवा से जमीन पर मार करने वाली मिसाइलों और बंदूकों से लैस, सिर्फ 1 मिनट में 128 टारगेट निशाना बनाने तथा दिन के अलावा रात में भी आसानी से कहीं भी जाने में सक्षम, किसी भी मौसम में उड़ान भरने तथा आसानी से टारगेट डिटेक्ट करने में सक्षम, दुश्मन के रडार को आसानी से चकमा देने में माहिर इत्यादि अनेक खूबियों से लैस अपाचे पहली बार वर्ष 1975 में आकाश में उड़ान भरता नजर आया था, जिसे 1986 में अमेरिकी सेना में शामिल किया गया था। 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम यह हेलीकॉप्टर तेज गति के कारण बड़ी आसानी से दुश्मनों के टैंकों के परखच्चे उड़ा सकता है।
बहुत तेज रफ्तार से दौड़ने में सक्षम इस हेलीकॉप्टर को रडार पर पकड़ना बेहद मुश्किल है। यह बगैर पहचान में आए चलते-फिरते या रुके हुए लक्ष्यों को आसानी से भांप सकता है। इतना ही नहीं, सिर्फ एक मिनट के भीतर यह 128 लक्ष्यों से होने वाले खतरों को भांपकर उन्हें प्राथमिकता के साथ बता देता है। यह किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में दुश्मन पर हमला कर सकता है और नाइट विजन सिस्टम की मदद से रात में भी दुश्मनों की टोह लेने, हवा से जमीन पर मार करने वाले रॉकेट दागने और मिसाइल आदि ढोने में सक्षम है।
16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता से लैस इस हेलीकॉप्टर में हेलीफायर, स्टि्रंगर मिसाइलें, 70 एमएम हाइड्रा एंटी ऑर्मर रॉकेट्स लगे हैं और मिसाइलों के पेलोड इतने तीव्र विस्फोटकों से भरे होते हैं कि दुश्मन का बच निकलना नामुमकिन होता है।


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