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गणतन्त्र के परमवीर

Posted On January - 26 - 2020

स्वाति गुप्ता

वो सैनिक, जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अतुल्य योगदान दिया है, उन्हें उनकी वीरता के लिए वीरता पदकों से पुरस्कृत किया जाता है। उच्च श्रेणी की वीरता के लिए परमवीर चक्र दिया जाता है। परमवीर चक्र सैन्य सेवा तथा उससे जुड़े लोगों को दिया जाने वाला भारत का सर्वोच्च वीरता सम्मान है। 26 जनवरी, 1950 से शुरू किया गया यह पदक मरणोपरांत भी दिया जाता है। आइए जानें, भारत के कुछ ‘परमवीरों’ के बारे में….

मे.साेमनाथ िसंह

1.मेजर सोमनाथ शर्मा
मेजर सोमनाथ शर्मा ने 22 फरवरी 1942 को भारतीय सेना में चौथी कुमायूं रेजिमेंट में बतौर कमीशंड अधिकारी प्रवेश लिया। 3 नवंबर 1947 को मेजर सोमनाथ शर्मा की टुकड़ी को कश्मीर के बड़गाम मोर्चे पर थी जब दुश्मन के 500 सैनिकों ने तीन तरफ से भारतीय सेना को घेरकर हमला शुरू कर दिया, तब मेजर शर्मा ने दुश्मन से बहादुरी से मुकाबला किया। दुर्भाग्य से वे दुश्मन के एक मोर्टार का निशाना बन गए और वीरगति को प्राप्त हुए। मेजर सोमनाथ परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले पहले भारतीय थे।

जदुनाथ सिंह

2.नायक जदुनाथ सिंह
नायक जदुनाथ सिंह 1941 में भारतीय सेना की राजपूत रेजिमेंट में भर्ती हुए। जनवरी 1948 में कबाइली आक्रमण के समय उन्होंने नौशेरा इलाके में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व किया। जब तक पैरा राजपूत की 3 अन्य टुकड़ियां मोर्चे पर पहुंचतीं, जदुनाथ लड़ाई में डटे रहे। कहीं से एक गोली आकर उनके सिर में लगी और वे वीरगति को प्राप्त हुए। उनके अद्‍भुत शौर्य के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

रामा राघोब राणे

3.सेकेंड लेफ्टिनेंट रामा राघोबा राणे
रामा राघोबा राणे को जीवित रहते हुए सेना के सर्वोच्च सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। वे 1968 में सेना प्रमुख के रूप में सेवानिवृत्त हुए। 15 दिसंबर 1947 को भारतीय सेना के कोर ऑफ इंजीनियर्स के बॉम्बे सैपर्स रेजिमेंट में नियुक्त किये गये। 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान श्री राणे ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 8 अप्रैल 1948 को उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

पीरूसिंह शेखावत

4.कंपनी हवलदार मेजर पीरूसिंह शेखावत
कंपनी हवलदार मेजर पीरूसिंह शेखावत 1936 में ब्रिटिश भारतीय सेना में भर्ती हुए। वे राजपुताना राइफल्स की छठी बटालियन में थे। 18 जुलाई 1948 को पीरू सिंह ने जम्मू कश्मीर के तिथवाल में दुश्मनों के छक्के छुड़ाये। उत्कृष्ट वीरता तथा अदम्य शौर्य का प्रदर्शन करने और सर्वोच्च बलिदान देने के लिये सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

करम सिंह

5.लांसनायक करम सिंह
लांसनायक करम सिंह को 1948 में परमवीर चक्र (जीवित रहते हुए) से सम्मानित किया गया। दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान करम सिंह को 26 वर्ष की आयु में सिख रेजिमेंट में नियुक्ति मिली। द्वितीय विश्वयुद्ध में अपनी वीरता के लिए करम सिंह को 1944 में सेना पदक से नवाजा गया और पदोन्नत कर उन्हें लांसनायक बना दिया गया। 1947 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए युद्ध में मेजर सोमनाथ शर्मा के शहीद हो जाने के बाद लांसनायक करम सिंह ने बखूबी मोर्चा संभाला और जीत हासिल की।

गुरबचन सिंह

6.कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया
3/1 गोरखा राइफल्स के कैप्टन गुरबचन को संयुक्त राष्ट्र के सैन्य प्रतिनिधि के रूप में एलिजाबेथ विला में दायित्व सौंपा गया। 5 दिसंबर 1961 को एलिजाबेथ विला के गोल चक्कर पर रास्ता रोके तैनात दुश्मन के 100 सैनिकों का मुकाबला कैप्टन गुरबचन सिंह सलारिया ने मात्र 16 जवानों के साथ किया और 40 सैनिकों को ढेर कर धूल चटाई लेकिन वीरगति को प्राप्त हुए। वह परमवीर चक्र प्राप्त करने वाले एकमात्र संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षक हैं। इन्हें ये सम्मान सन‍् 1962 में मरणोपरांत मिला।

धन सिंह थापा

7.मेजर धनसिंह थापा
1962 में चीन ने भारत पर आक्रमण किया तब धनसिंह थापा चीनी सेना का बहादुरी से मुकाबला करते रहे। चीन ने धनसिंह थापा और अन्य दो साथियों को बंदी बना लिया और कई यातनाएं दीं। वे दुश्मन से छुटकारा पाकर भारत लौटे और सेना में लेफ्टिनेंट कर्नल के पद पर पदोन्नत हुए। इन्हें भी जीवित रहते हुए परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

जोगिन्द्र िसंह

8.सूबेदार जोगिन्दर सिंह
सूबेदार जोगिन्दर 1962 में भारत और चीन के बीच हुए युद्ध में शामिल हुए थे। इस युद्ध में चीन के साथ लड़ने वाले जिन चार पराक्रमी सैनिकों को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया, उनमें जोगिन्दर सिंह भी एक थे। वे इस युद्ध में लापता हो गए थे तथा चीनी सेना की ओर से भी उनके बारे में कोई सूचना नहीं मिली।

शैतान िसंह भाटी

8.मेजर शैतानसिंह भाटी
1962 में भारत-चीन युद्ध में मेजर शैतान सिंह रेजांगला मोर्चे पर चीनी सेना का बहादुरी से मुकाबला करते रहे। 18 नवंबर 1962 को शहीद होने से पहले तक भी वे चुशूर सेक्टर में डटे रहे। बर्फ से ढके उस क्षेत्र में मेजर सिंह का मृत शरीर 3 महीने बाद युद्ध क्षेत्र में मिल पाया। मरणोपरांत शैतान सिंह को परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

अब्दुल हमीद

9.कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार अब्दुल हमीद
हमीद 1954 में 21 वर्ष की आयु में सेना में भर्ती हुए और 27 दिसंबर 1954 को ग्रेनेडियर्स इंफ्रैंट्री रेजिमेंट में शामिल हो गए। 10 सितंबर 1965 में जब पाकिस्तान द्वारा भारत पर आक्रमण किया गया, तब हमीद ने अमृतसर को घेरने की तैयारी में आगे बढ़ती पाकिस्तानी सेना के 3 टैं‍क ध्वस्त कर दिए। दुश्मन की गोलीबारी में वे शहीद हो गए। भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपने असाधारण योगदान के लिए उन्हें महावीर च‍क्र और परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। भारतीय डाक विभाग द्वारा उन पर एक डाक टिकट भी जारी किया था।

बुरजोरजी तारापोरे

10.ले. कर्नल आर्देशीर बुरजोरजी तारापोरे
आर्देशिर बुरजोरजी तारापोरे 1 जनवरी 1942 को 7वीं हैदराबाद इंफैंट्री में बतौर कमीशंड ऑफिसर नियुक्त किये गये। बाद में उन्हें बख्तरबंद रेजिमेंट में नियुक्ति मिली। 1965 के युद्ध में फिल्लौरा पर हमला कर चाविंडा को जीतने के लिए जब तारापोरे टुकड़ी के साथ आगे बढ़ रहे थे, तब दुश्मन का निशाना बन गये। उन्होंने दुश्मन के 60 टैंकों को ध्वस्त कर दिया। अद्‍भुत वीरता के लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

एलबर्ट एक्का

11.लांसनायक अल्बर्ट एक्का
मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित लांस नायक अल्बर्ट एक्का ने अभूतपूर्व वीरता का प्रदर्शन करते हुए 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में दुश्मनों के दांत खट्‍टे कर दिए। 3 दिसंबर, 1971 के दिन शत्रुओं से लोहा लेते हुए एक्का देश पर कुर्बान हो गए। इस लड़ाई में पाकिस्तान को बुरी तरह शिकस्त मिली।

निर्मलजीत सेखों

12.फ्लाइंग ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सेखों
14 दिसंबर 1971 को जब 6 पाकिस्तानी सैबर जेट विमानों द्वारा श्रीनगर एयरफील्ड पर हमला किया गया, तब ऑफिसर निर्मलजीत सिंह सुरक्षा टुकड़ी की कमान संभालते हुए 18 नेट स्क्वॉड्रन के साथ वहां तैनात थे। दुश्मन के एफ-86 सैबर जेट विमानों का बहादुरी के साथ सामना करते हुए उन्होंने दो सैबर जेट विमानों को ध्वस्त किया। इस लड़ाई में वे शहीद हो गए।

अरुण खेत्रपाल

13.सेकेंड ले. अरुण खेत्रपाल
अरुण खेत्रपाल को 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में अपने अद्‍भुत शौर्य के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। 13 जून 1971 वह दिन था, जब वे पूना हॉर्स में सेकंड लेफ्टिनेंट के रूप में शामिल हुए। दिसंबर 1971 में भारत-पाक के बीच हुए युद्ध में 16 दिसंबर को अरुण खेत्रपाल एक स्क्वॉड्रन की कमान संभाले ड्यूटी पर तैनात थे। दुश्मन के टैंकों को ध्वस्त करते हुए उनका टैंक खुद दुश्मन के निशाने पर आ गया। यहां अरुण खेत्रपाल शहीद हो गए। अरुण खेत्रपाल सबसे कम उम्र के परमवीर चक्र प्राप्त वीर थे।

होिशयार सिंह

14.मेजर होशियार सिंह
मेजर होशियार सिंह उन वीर सैनिकों में शामिल थे, जिन्हें अपने जीवनकाल में परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। मेजर होशियार सिंह ने 1971 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में अद्‍भुत वीरता का प्रदर्शन किया था। 1957 में होशियार सिंह ने सेना की जाट रेजिमेंट में प्रवेश किया और 3 ग्रेनेडियर्स में कमीशन लेने के बाद वे ऑफिसर बन गए। 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ जीत को आसान बनाने में होशियार सिंह की दी गई महत्वपूर्ण सूचना का खास योगदान था।

बाना सिंह

15.नायक सूबेदार बाना सिंह
नायब सूबेदार बाना सिंह ने 1969 में सेना में प्रवेश कर अपने फौजी जीवन की शुरुआत की। सियाचिन के मोर्चे पर लड़ते हुए उन्होंने जो पराक्रम दिखाया उसके लिए उन्हें परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया। सियाचिन में बाना सिंह ने जिस चौकी को फतह किया, उसका नाम ही बाद में बाना पोस्ट रखा गया।

परमेशवरन

16. मेजर रामास्वामी परमेश्वरन
मेजर रामास्वामी परमेश्वरन ने 1972 में भारतीय सेना में महार रेजिमेंट में प्रवेश किया। भारतीय शांति सेना में वे श्रीलंका गए। 25 नवंबर 1987 को उनका सामना तमिल टाइगर्स से हुआ। तभी दुश्मन की एक गोली मेजर रामास्वामी परमेश्वर के सीने में लगी। इस लड़ाई में मेजर के दल ने 6 उग्रवादियों को मार गिराया और गोला-बारूद भी जब्त किया, लेकिन सीने में लगी गोली लगने के कारण वे वीरगति को प्राप्त हो गए। इस बहादुरी के लिए उन्हें परमवीर चक्र दिया गया।

मनोज पांडेय

17. कैप्टन मनोज कुमार पांडेय
कैप्टन मनोज कुमार पांडेय 11 गोरखा राइफल्स रेजिमेंट की पहली बटालियन में बतौर कमीशंड ऑफिसर शामिल हुए। लंबे समय तक 19 हजार 700 फुट की ऊंचाई पर पहलवान चौकी पर जोश और बहादुरी के साथ वे डटे रहे। 1999 के निर्णायक युद्ध में खलूबार को फतह किया। इसी बीच दुश्मन की मशीनगन से निकली एक गोली सीधे उनके माथे पर जाकर लगी। मात्र 24 वर्ष की आयु में शहीद होने वाले इस वीर जवान को मरणोपरांत परमवीर चक्र सम्मान दिया गया।

विक्रम बत्तरा

18. कैप्टन विक्रम बत्रा
कैप्टन विक्रम बत्रा 1997 में 13 जम्मू-कश्मीर राइफल्स में लेफ्टिनेंट के पद पर नियुक्त हुए। वे करगिल वॉर के हीरो माने जाते हैं। 1999 में हुए कारगिल युद्ध में उनकी टुकड़ी को भेजा गया। इस मिशन में एक विस्फोट से अपने साथी लेफ्टिनेंट को बचाने के दौरान दुश्मन की गोली लगी। अपने इस पराक्रम के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया।

संजय कुमार

19. राइफलमैन संजय कुमार
1996 में संजय कुमार ने भारतीय सेना में प्रवेश किया और सौभाग्य से फौज में जाने के मात्र 3 ही वर्षों में उन्होंने परमवीर चक्र प्राप्त किया। 4875 फुट ऊंची चोटी के मोर्चे पर बहादुरी दिखाने वाले दो जवानों को परमवीर चक्र दिया गया जिनमें एक कैप्टन विक्रम बत्रा थे और दूसरे राइफलमैन संजय कुमार।

योगेन्द्र सिंह यादव

20. ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव
ग्रेनेडियर योगेन्द्र सिंह यादव ने 27 दिसंबर 1996 में 18 ग्रेनेडियर बटालियन में शामिल हो भारतीय सेना में प्रवेश किया। मात्र 19 वर्ष की आयु में उन्होंने परमवीर चक्र प्राप्त किया। 1999 की लड़ाई में उनका विशेष पराक्रम था टाइगर हिल पर तिरंगा लहराना।


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