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एकदा

Posted On January - 25 - 2020

निर्भीकता
अंग्रेज भारत में व्यापार करने के साथ-साथ धर्म प्रचारकों से ईसाई धर्म का प्रचार करा रहे थे। वैदिक धर्म प्रचारकों ने भी अपना प्रचार करना आरम्भ कर दिया। आर्य समाज के सुखलाल आर्य ने अंग्रेजों की कूटनीति एवं परतंत्रता से मुक्ति का आह्वान किया तथा ईसाई धर्म के विरुद्ध आवाज उठाई। अंग्रेज सरकार भला यह कैसे सहन करती। पेशावर में सभा करते हुए उन्हें गिरफ्तार करके मुक़दमा दायर कर लिया गया। कोर्ट में जज ने पूछा कि कहां के रहने वाले हो। सुखलाल ने उत्तर दिया, ‘जी, भारत के उत्तर प्रदेश राज्य का निवासी हूं।’ जज ने प्रतिप्रश्न किया, ‘तो उत्तर प्रदेश से इतनी दूर पेशावर में क्या करने आये हो?’ ‘जी, मैं वैदिक धर्म का प्रचार करने यहां आया हूं।’ जज ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा— ‘वैदिक धर्म का प्रचार करने इतनी दूर क्यों आये, क्या उत्तर प्रदेश में नहीं कर सकते थे?’ सुखलाल ने तपाक से उत्तर दिया— ‘तुम व्यापार करने सात समन्दर पार भारत में क्यों आये हो, क्या इंग्लैंड में व्यापार नहीं कर सकते थे?’ अंग्रेज जज चुप हो गया। सुखलाल की निर्भीकता देख जज ने सुखलाल को केवल पेशावर छोड़ने का आदेश दिया।
प्रस्तुति : सतप्रकाश सनोठिया


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