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एकदा

Posted On January - 15 - 2020

प्रतिक्रिया रहित बचाव
जापान के एक गांव में एक समुराई बूढ़ा योद्धा रहता था। उसके पास लोग समुराई युद्धकला सीखने आते थे। एक बार एक प्रसिद्ध विदेशी योद्धा उस बूढ़े योद्धा को पराजित करने के लिए आया। जब विदेशी समुराई ने युद्ध करना चाहा तो बूढ़े समुराई के शिष्यों ने अपने गुरु से मुकाबला न करने की प्रार्थना की। लेकिन वृद्ध समुराई ने शिष्यों की बात नहीं मानी और नियत समय पर युद्ध शुरू हुआ। विदेशी समुराई बूढ़े समुराई को अपमानित करने लगा। मगर उन्हें गुस्सा नहीं आया। अब विदेशी समुराई ने पैरों से धूल उड़ाकर जमीन पर थूक दिया। बूढ़े समुराई ने उफ्फ तक नहीं की। आखिर विदेशी समुराई ने हार मान चला गया। हैरान शिष्यों ने पूछा— इतना अपमान होने पर भी आप शान्त क्यों रहे? गुरु ने कहा— यदि कोई तुम्हें उपहार दे और तुम उसे स्वीकार न करो तो वह उपहार किसका होगा? शिष्यों ने कहा— तोहफा देने वाले का। गुरु बोले, मैंने उसकी गालियों और अपमान को स्वीकार नहीं किया जिससे वह वापस उसके पास ही गयीं। गुरु ने कहा कि जीवन में अनावश्यक प्रतिक्रिया से बचकर हमें अपनी ऊर्जा व समय को सार्थक व महत्वपूर्ण कार्यों में लगाना चाहिए।
प्रस्तुति : शशि सिंघल


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