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एकदा

Posted On January - 14 - 2020

सर्वकालिक गुणधर्म
महात्मा बुद्ध विहार करते-करते एक ऐसे गांव में जा पहुंचे जहां वह पहले भी रह चुके थे। प्रवचन के समय सभा में उन्होंने देखा कि जो नगर सेठ उनकी सभा में सबसे आगे विराजमान रहते थे, वही आज सबसे पीछे साधारण वस्त्रों में ज़मीन पर बैठे हुए थे। उन्होंने सामने बैठे हुए एक भक्त से उनके बारे में पूछा तो उसने बताया—प्रभु, समय की आंधी ने इनके भाग्य को पलटकर रख दिया है। दूसरों को खिलाकर स्वयं खाने वाले अब खुद धनहीन व साधनहीन हो गए हैं, इसलिए अब इन्हें पीछे की पंक्ति में बिठाया जाता है। बुद्ध सारी स्थिति समझकर उपदेश देते हुए कहने लगे—भक्तो, अगर यह सेठ जी धनहीन हो गए हैं तो इसमें इनका क्या दोष। क्या सूर्य अस्त हो जाता है तो उसके गुणधर्म में कोई कमी आ जाती है अथवा वह अगले दिन नहीं उगता। इसी तरह सज्जनों के साधनहीन हो जाने से उनके गुणधर्म में भी कोई कमी नहीं आती। समय आने पर वही गुण अपनी पूर्ण चमक के साथ प्रदर्शित हो उठते हैं। इसीलिए किसी पर संकट आ जाने से हमें उसे महत्वहीन नहीं समझ लेना चाहिए। अगले दिन से सेठ जी को फिर से अग्रिम पंक्ति में बिठाया जाने लगा।
प्रस्तुति : मुकेश कुमार जैन


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