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एकदा

Posted On January - 13 - 2020

ईश्वर का अहसास

एक भक्त की भगवान में बड़ी श्रद्धा थी। उसने मन ही मन प्रभु की एक तस्वीर बना रखी थी। एक दिन उसने भगवान से कहा—भगवान मुझसे बात करो। एक बुलबुल चहकने लगी लेकिन उस आदमी ने नहीं सुना। वह जोर से चिल्लाया और आकाश में घटाएं उमड़ने लगीं, बादलों की गड़गड़ाहट होने लगी लेकिन आदमी ने कुछ नहीं सुना। उसने चारों तरफ निहारा, ऊपर-नीचे सब तरफ देखा और बोला, भगवान मेरे सामने तो आओ और बादलों में छिपा सूरज चमकने लगा। लेकिन उसने नहीं देखा आखिरकार वह आदमी गला फाड़कर चीखने लगा—भगवान मुझे कोई चमत्कार दिखाओ तभी एक शिशु का जन्म हुआ और उसका प्रथम रुदन गूंजने लगा किन्तु उस आदमी ने ध्यान नहीं दिया। अब तो वह व्यक्ति रोने लगा और भगवान से याचना करने लगा—भगवान मुझे स्पर्श करो, मुझे पता तो चले तुम यहां हो, मेरे पास हो। तभी एक तितली उड़ते हुए उसकी हथेली पर बैठ गई। लेकिन उसने तितली को उड़ा दिया, और उदास मन से आगे चला गया। भगवान इतने सारे रूपों में उसके सामने आए, इतने सारे ढंग से उससे बातें कीं लेकिन उस आदमी ने पहचाना ही नहीं। मन में कल्पित प्रभु की तस्वीर में ही अटका रहा। ईश्वर तो हर जगह अनन्त रूपाें में मौजूद है।

प्रस्तुति : सुभाष बुड़ावन वाला


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