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आलू पर बेमौसमी बारिश की मार

Posted On January - 16 - 2020

करनाल के शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केंद्र में आलू पर कीटनाशकों का स्प्रे करते कर्मचारी। -हप्र

करनाल, 15 जनवरी (हप्र)
बेमौसमी बारिश की मार आलू पर पड़ी है। इसके चलते आलू की फसल में लेट ब्लाइट बीमारी की चपेट में आने की सम्भावना बढ़ गई है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से सम्बद्ध कृषि सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग की ओर से एडवाइज़री जारी की गई है ताकि किसानों की फसल को इस बीमारी से बचाने के लिए जागरूक किया जा सके। शामगढ़ स्थित आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र के उप निदेशक डॉ. सतेंद्र यादव ने बताया कि आलू की फसल में इस बीमारी का मुख्य कारण फाईटोफ्थोरा फफूंद है। अनियमित पीला हरा घाव ज्यादातर टिप और पत्तियों के मार्जन के पास होता है, जो तेजी से बड़े काले भूरे रंग के नेक्रोटिक धब्बों में परिवर्तित हो जाता है।
उन्होंने कहा कि सफेद फफूंदी, जिसमें स्पोरंजिया होता है और रोगजनकों के बिजाणु विशेषकर नेक्रोटिक घावों के किनारों के आसपास संक्रमित पत्तियों की निचली सतह पर देखे जा सकते हैं, जो हलके से गहरे भूरे रंग के घावों के तने को घेरे रहते हैं। प्रभावित तने और पैटिओल्स ऐसे स्थानों पर कमजोर हो जाते हैं और गिर सकते हैं। सम्पूर्ण फसल विशेष रूप से रोग अनुकूल परिस्थितियों में काले धुंधले में दिखाई देती है और नष्ट हो सकती है।

किसानों को कीटनाशक दवाओं का स्प्रे करने की सलाह
आलू प्रौद्योगिकी केन्द्र के उप निदेशक डॉ. सतेंद्र यादव ने कहा कि इससे बचाव के लिए किसानों को विभिन्न अनुमोदित कीटनाटक दवाओं का स्प्रे करना चाहिए। इनमें एजोक्सीस्ट्रोबिन 23 प्रतिशत एससी दवा के 500 एमएल को 500 लीटर पानी में घोल कर प्रति 2.5 एकड में स्प्रे करें। इसी प्रकार कैपटान 50 प्रतिशत डब्ल्यू पी दवा का अढ़ाई किलोग्राम का घोल बनाकर उसे एक हजार लीटर पानी में मिलाकर अढ़ाई एकड़ फसल में छिड़काव करें। क्लोरोथालोनिल 75 प्रतिशत डब्लयू पी दवा के एक किलोग्राम को 800 लीटर में घोल कर प्रति अढ़ाई एकड़ में छिड़काव करें। किसान इनमें से किसी एक दवा का छिड़काव कर सकते हैं।


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