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हैदराबाद दरिंदगी के चारों आरोपी ढेर

Posted On December - 7 - 2019

हैदराबाद में शुक्रवार सुबह इसी स्थान पर हुआ था एनकाउंटर। – प्रेट्र

हैदराबाद/नयी दिल्ली, 6 दिसंबर (एजेंसी)
हैदराबाद में पशु चिकित्सक के साथ बलात्कार और फिर हत्या के चारों आरोपी शुक्रवार सुबह पुलिस के साथ मुठभेड़ में मारे गए। पुलिस आरोपियों को वारदात की पुनर्रचना (सीन रीक्रिएशन) के लिए वारदात स्थल पर ले गई थी। अधिकारियों ने कहा, ‘आरोपियों ने पुलिस से हथियार छीने और गोलियां चलाते हुए भागने की कोशिश की। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में चारों मारे गए।’ इस दौरान दो पुलिसकर्मी भी घायल हो गए। चारों आरोपियों की आयु 20 से 24 वर्ष थी। उनमें से दो चालक थे और दो हेल्पर। उन्हें 29 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें सात दिन की हिरासत में भेजा गया था।
साइबराबाद पुलिस आयुक्त सीवी सज्जनर ने बताया कि आरोपियों में एक मोहम्मद आरिफ ने सबसे पहले गोली चलायी। वारदात स्थल पर पुलिस की जो टीम उन्हें लेकर वहां गयी थी, उन पर भी ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। उन्होंने कहा कि छीने गए हथियार ‘अनलॉक’ (फायरिंग के लिए तैयार) स्थिति में थे। मुठभेड़ के वक्त आरोपियों के हाथों में हथकड़ी नहीं थी। घटना सुबह 5:45 से 6:15 बजे के बीच हुई। उन्होंने कहा, ‘हमारे अधिकारियों ने उन्हें आत्मसमर्पण के लिए कहा, लेकिन उन्होंने गोलीबारी की और हमला करते रहे, इसके बाद पुलिस की ओर से जवाबी कार्रवाई की गयी।’ सज्जनर ने कहा कि पुलिस प्रदेश के अन्य भागों व आंध्र प्रदेश और कर्नाटक से इससे मिलते-जुलते मामलों का ब्योरा जुटा रही है ताकि इनमें चारों आरोपियों की किसी भूमिका का पता लगाया जा सके।
उधर, इस मुठभेड़ के बाद वहां लोगों की भीड़ जमा हो गयी। लोगों ने ‘तेलंगाना पुलिस जिंदाबाद’ के नारे लगाए। कुछ महिलाओं ने पुलिसकर्मियों को मिठाई भी बांटी। मुठभेड़ के बाद देशभर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं आई हैं। इस बीच, मृतका के पिता ने कहा, ‘हम खुश हैं। लोग भी खुश हैं। मैं मुठभेड़ के लिए तेलंगाना सरकार और पुलिस का शुक्रिया अदा करता हूं। मैं हमारे साथ खड़े रहे सभी लोगों का शुक्रिया करता हूं।’ मृतका की बहन ने कहा, ‘हमारे साथ खड़े रहे हर एक शख्स का हम शुक्रिया करते हैं। इसके बाद अपराधियों को डरना चाहिए।’ हैदराबाद बलात्कार एवं हत्याकांड की शिकार महिला को ‘दिशा’ नाम दिया गया है। गौर हो कि दिल्ली में बलात्कार की शिकार युवती को ‘निर्भया’ नाम दिया गया था।

शवों को सुरक्षित रखें, पोस्टमार्टम का वीडियो प्रधान जिला जज को दें : हाईकोर्ट
तेलंगाना हाईकोर्ट ने मुठभेड़ में मारे गए बलात्कार के आरोपियों के शवों को 9 दिसंबर रात आठ बजे तक सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने यह आदेश चीफ जस्टिस के कार्यालय को मिले एक प्रतिवेदन पर दिया। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सभी आरोपियों के शवों का पोस्टमॉर्टम होने के बाद उसका वीडियो सीडी में अथवा पेन ड्राइव में महबूबनगर के प्रधान जिला न्यायाधीश को सौंपा जाए। अदालत ने महबूबनगर के प्रधान जिला जज के सीडी अथवा पेन ड्राइव लेने और उसे शनिवार शाम तक हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को सौंपने के निर्देश दिए।

भीड़ की तरह काम नहीं कर सकती पुलिस : एक्टिविस्ट
मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि पुलिस भीड़ की तरह काम नहीं कर सकती। अखिल भारतीय प्रगतिशील महिला संघ की सचिव कविता कृष्णन ने कहा, ‘महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करने में सरकार की नाकामी के बारे में हमारे सवालों का जवाब देने के बजाय तेलंगाना के मुख्यमंत्री और उनकी पुलिस ने पीट-पीट कर हत्या करने वाली भीड़ की तरह काम किया है। मुठभेड़ में शामिल पुलिस कर्मियों को गिरफ्तार कर केस चलाना चाहिए। ‘नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन वुमैन’ (एनएफआईडब्ल्यू) महासचिव एनी राजा ने कहा, ‘यह मामले से ध्यान भटकाने की कोशिश है।’ वकील एवं मानवाधिकार कार्यकर्ता वृंदा ग्रोवर ने इसे ‘पूरी तरह अस्वीकार्य’ करार दिया। ‘अनहद’ (एक्ट नाओ फॉर हारमनी एंड डेमोक्रेसी) की संस्थापक सदस्य शबनम हाशमी ने भी कहा कि यह लोगों का ध्यान खींचने की सरकार की कोशिश हो सकती है।

पुलिस अफसरों पर न हो कार्रवाई : निर्भया की मां
निर्भया की मां ने अधिकारियों से अपील की है कि मुठभेड़ में शामिल पुलिसवालों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। उन्होंने कहा, ‘हैदराबाद की चिकित्सक के परिवार को हमारी तरह न्याय के लिए सात वर्ष का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। पुलिस ने सही काम किया।’ निर्भया के दादा ने कहा, ‘मैं बलात्कारियों के मारे जाने की सराहना करता हूं। इससे डर उत्पन्न होगा और दरिंदगी पर रोक लगेगी।’

मानवाधिकार आयोग ने दिया जांच का आदेश
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने इस मुठभेड़ का संज्ञान लिया और जांच के आदेश दिए। एनएचआरसी की ओर से कहा गया, ‘मामले की सावधानी से जांच की आवश्यकता है। महानिदेशक (जांच) से घटनास्थल पर तत्काल एक टीम भेजने को कहा है।’ आयोग ने कहा कि पुलिस कर्मी ‘आरोपियों द्वारा किसी प्रकार की अप्रिय घटना किए जाने के लिए तैयार और सतर्क’ नहीं थे। आयोग ने कहा, ‘जीवन का अधिकार और कानून के समक्ष समानता मौलिक मानवाधिकार हैं जो उन्हें भारत के संविधान ने दिए हैं।’

देर आये, दुरुस्त आये
सपा की राज्यसभा सदस्य जया बच्चन ने संक्षिप्त प्रतिक्रिया में कहा, ‘बहुत देर कर दी। देर आये दुरुस्त आये।’ उल्लेखनीय है कि बच्चन ने राज्यसभा में इस तरह के गंभीर मामलों के आरोपियों को भीड़ के हवाले कर देने का सुझाव देते हुए बर्बरता करने वालों के साथ कठोरतम रवैया अपनाने की बात कही थी।

कानून हाथ में नहीं ले सकते
पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने कहा, ‘आप कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकते। अदालत से तो ऐसे लोगों को फांसी मिलने ही वाली थी। फायदा क्या है अदालत का, फायदा क्या है पुलिस का? तब तो जिसे चाहो उठाओ और गोली मार दो।

न्यायेतर हत्या स्वीकार्य नहीं
कांग्रेस नेता एवं लोकसभा सांसद शशि थरूर ने ट्वीट किया, ‘सैद्धांतिक रूप से सहमत हूं। विस्तृत जानकारी मिलने तक इसकी निंदा करना सही नहीं है, लेकिन कानून के समाज में न्यायेतर हत्याएं स्वीकार्य नहीं हैं।’

न्याय प्रणाली से विश्वास उठना चिंताजनक
दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हाल ही में सामने आए बलात्कार के मामलों से लोगों में गुस्सा है, चाहे वह उन्नाव हो या हैदराबाद…इसलिए लोग मुठभेड़ से खुश हैं, लेकिन यह चिंता का विषय भी है, लोगों का अपनी न्याय प्रणाली से विश्वास उठ गया है। सभी सरकारों को मिलकर कदम उठाना होगा कि कैसे अापराधिक न्याय प्रणाली को मजबूत किया जाए।

महिला आयोग प्रमुख ने कहा, कानूनी तरीका ही सही
राष्ट्रीय महिला आयोग की प्रमुख रेखा शर्मा ने कहा कि आरोपियों के मारे जाने से खुश हूं, लेकिन न्याय उचित कानूनी तरीके से किया जाना चाहिए। शर्मा ने कहा, ‘हम मौत की सजा चाहते थे, लेकिन न्याय प्रणाली के जरिए। मुझे नहीं पता कि आरोपियों को किन परिस्थितियों में शुक्रवार सुबह गोली मारी गई और यह जांच के बाद सामने आएगा। इसलिए केवल पुलिस ही सच बता सकती है या जांच में इसका पता चल सकता है।’


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