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विवाह से पहले यादगार लम्हे

Posted On December - 8 - 2019

अलका कौशिक

शादी-ब्याह की जो राह रस्मों-रीतियों से होकर गुज़रती थी, उसमें कॉकटेल, मेहंदी नाइट, बैचलर पार्टियों के बाद प्री-वेडिंग शूट्स भी जुड़ चुका है। नये दौर के कपल्स अपने विवाह को सिर्फ रस्म-अदायगी की तरह नहीं देखते बल्कि उसमें रोमांच और रोचकता की ऐसी चाशनी भी घोलते हैं कि परंपराओं के साथ अब नये आयाम जुड़ गए हैं। शादी-ब्याह में ऐसा ही एक आयाम जुड़ चुका है प्री-वेडिंग शूट्स का। विवाह के मुख्य समारोह से कुछ दिन या कई बार कुछ हफ्तों या महीना भर पहले इस अहम मुकाम के लिए भी भारी बंदोबस्त और तैयारियां चलती हैं।

लोकेशन
वो दिन लद चुके जब विवाह संस्कार घरों में संपन्न हो जाया करते थे। घर छोटे हुए तो गली मोहल्ले में ही कनात टंग जाया करती थी। पास-पड़ोस के मंदिर या सामुदायिक भवन, मोहल्ले के पार्क से होते हुए शादी की मंज़िलें बैंक्वेट हॉल, होटल, रेसॉर्ट, हेरिटेज हवेलियां, बंगले और राजमहल बन गए। लेकिन इधर कुछ समय से विवाह पूर्व के कार्यक्रम भी उतने ही खास हो चुके हैं, जितना मुख्य विवाह समारोह होता है। यह कितना खास है, इसे समझने के लिए बस इतना जान लेना काफी होगा कि प्री-वेडिंग शूट्स की लोकेशन तय करने पर काफी मशक्कत की जाती है। दिल्ली के लोधी गार्डन में सुबह-सवेरे अब योग और हास्य क्लब या वॉकर्स जितने ही सक्रिय होते हैं वो फोटोग्राफर्स भी जो किसी न किसी जोड़े को लेकर प्री-वेडिंग शूट्स में व्यस्त होते हैं। पार्क में खड़े किसी स्मारक के झरोखे से तो किसी की खिड़की या आंगन अथवा छत पर से झांकते, खिलखिलाते, हंसते, पोज़ देते जोड़ों को देखकर कई बार नतमस्तक हो जाने को दिल चाहता है। उस खास अवसर के लिए उन्होंने बाकायदा कॉस्ट्यूम तैयार किए होते हैं। प्री-वेडिंग शूट कहां कराया जाएगा, उसके हिसाब से ड्रैस बनवायी जाती है और म्यूज़िक, मेहमान, खाने-पीने जैसी तमाम तैयारियों पर भी निवेश होता है। लोकेशन के लिए पार्कों के अलावा ऐतिहासिक स्मारकों को भी पसंद किया जाता है। और जिनकी जेबों में पैसों की रेल-पेल होती है, वे निकल पड़ते हैं, दूर शहरों की किसी खास लोकेशन की तरफ। यहां तक कि विदेश भी जाते हैं।

प्री-वेडिंग शूट्स की पसंदीदा विदेशी मंजिलें
कपल्स अब जयपुर-जोधपुर अथवा नैनीताल-मसूरी या शिमला-कुर्ग से कहीं आगे निकलकर मिलान की सड़कों पर, वियना में डैन्यूब नहर किनारे, बर्लिन में तो लंदन और पेरिस तक पहुंचने लगे हैं। यूरोप निश्चित ही प्री-वेडिंग शूट्स की आकांक्षा रखने वाले कपल्स को लुभाता है। चेकोस्लोवाकिया की राजधानी प्राग के चार्ल्स ब्रिज पर सूर्योदय देखने के लिए मचलने वाले सिर्फ सैलानी ही नहीं होते बल्कि फोटोग्राफरों-वीडियोग्राफरों की टीम के साथ चले आए भावी जोड़े भी होते हैं। घंटों सब्र का इम्तिहान देते हुए पूरी तल्लीनता से उन्हें फोटो शूट में डूबे हुए देखा जा सकता है। इंटरनेट और सिनेमा ने उन्हें सपने दिए हैं तो लगातार गहरी होती जा रही जेबों ने उन सपनों को परवाज़ देने का काम किया है। बाली, मॉरीशस, सेशेल्स, पेरिस, एम्सटर्डम काफी लोकप्रिय हैं तो एडवेंचर और रोमांस पसंद करने वाले जोड़े आइसलैंड जैसी मंजिलें चुनने से नहीं घबराते। ग्लेशियरों, गरम पानी के झरनों, ज्वालामुखी और नॉर्दर्न लाइट के नज़ारों को अपनी यादों में संजो लाने के लिए वे बजट की परवाह भी नहीं करते। आस्ट्रेलिया भी प्री-वेडिंग शूटिंग के लिए तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। इसी तरह, इटली के प्राचीन खंडहरों, गिरिजाघरोंको प्री-वेडिंग शूट के बहाने अपनी जिंदगी में शुमार करने का जज़्बा लिए कितने ही जोड़े कभी फ्लोरेंस का रोमांस समेटते हैं तो कभी रोम, वेनिस की सड़कों-नहरों पर एक से एक पोज़ देने से नहीं हिचकते। यहां तक कि दुनिया का सबसे नन्हा देश वैटिकन भी अब इस मकसद से आकर्षक मंजिल बन गया है।
कहते हैं नॉर्वे और फिनलैंड जैसे स्कैंडिनेवियन देशों की सर्दियों को नहीं जीया तो क्या जीया। और आर्कटिक के नज़दीक बसे इन देशों के आसमान पर नॉर्दर्न लाइट्स जैसा नज़ारा भी बेहद खास होता है। ऐसे में प्री-वेडिंग शूट्स के बहाने इन आश्चर्यलोकों को अपनी स्मृतियों में बेहद खास जगह देने का ख्याल बुरा नहीं है। अलबत्ता, इन तमाम लोकेशनों पर शूटिंग के लिए भारी तैयारियों की ज़रूरत होती है, बजट भी ऊंचा होता है, फिर लॉजिस्टिक्स के तमाम झंझट भी होते हैं। लेकिन सीने में रोमांच धड़कता हो तो रोमांस को ऐसे रंग देने वाले भी कम नहीं हैं।

थीम और कोरियोग्राफी
अरमानों की दौड़ के आगे सब फीका है। बजट, समय, धैर्य, पैसा और इनोवेशन आधुनिक दौर की जोडि़यों के नये मापदंड हैं। उन्हें अपने प्री-वेडिंग शूट के लिए कुछ नया अनुभव चाहिए, और उस अनुभव में अंतरंगता के अलावा एक और मापदंड भी होता है। वो है अपने इरादों, अपने अनुभवों से सामने वाले को प्रभावित करना, उसे हतप्रभ कर डालना। लिहाज़ा, प्री-वेडिंग शूट के लिए सोच-समझकर थीम चुनी जाती है। प्री -वैडिंग वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी के लिए अंडर वॉटर, समुद्र तट पर, झरनों-झीलों के किनारे, बर्फीले पहाड़ों से आगे बढ़ चुका है अब ज़माना। नाइट फोटोग्राफी, स्मोक नाइट तक तो बात समझ आती थी, अब कभी परंपरा थीम बनता है तो कभी ट्राइबल डेस्टिनेशन। बारिश तो सदाबहार थीम है ही, अब तीज-त्योहार भी वैडिंग शूट्स में घुस आते हैं। ज़रा कल्पिना कीजिए दिसंबर में होली थीम की या भरी गर्मी में लोहड़ी-बैसाखी जैसे थीम पर सजे-धजे कृत्रिम सैटों की। थीम के मुताबिक संगीत भी चुना जाता है। बजट अच्छा-खासा हो तो म्यूजि़क से भी कोई समझौता नहीं किया जाता। यानी, कुल-मिलाकर एकदम फिल्मी समां बन जाता है।

प्री-वेडिंग से जुड़ चुके हैं क्रूज़
ज़मीन, पहाड़, पानी, लहरें, महल, हवेलियां, गिरिजाघर, मकबरे, बाग-बगीचे, घाटियां, जंगल, बियाबान-कुछ भी तो नहीं छूटा है भावी जोड़ों की कल्पलनाओं से। तो भला क्रूज़ कैसे छूटते! बिग, फैट वैडिंग की बजाय नये अंदाज़ में शादियां और शादियों से पहले के आयोजनों पर ज़ोर बढ़ा है तो क्रूज़ जैसी नई मंजि़लें भी पसंद की जाने लगी हैं। रॉयल कैरिबियन क्रूज़ का संचालन करने वाली कंपनी तारन के सीईओ वरुण चड्ढा ने नये ज़माने के इस ट्रैंड के बारे में बताया, ‘मौजूदा वक्त के कपल्स अपनी शादी को लेकर बेहद सजग हैं, वे बखूबी जानते हैं कि उन्हें किस तरह के समारोह चाहिए, कैसे अनुभव हासिल करने के हैं और कैसे वे अपनी जिंदगी के इस अवसर को अलग और भव्य और खास बना सकते हैं। ऐसे में क्रूज़ पर प्री-वेडिंग या वैडिंग अथवा हनीमून का फैसला वे आराम से लेते हैं। क्रूज़ पर कुछ दिनों की मौज-मस्ती के लिए वे अपने परिजनों और दोस्तों को ला सकते हैं, सारी प्लानिंग का जिम्मा क्रूज़ कंपनी को सौंपकर वे खुद को इस भव्य अवसर के अनुभवों से सराबोर करने के लिए आज़ाद होते हैं। क्रूज़ पर न सिर्फ उन्हें ग्रैंड वैन्यू मिल जाते हैं बल्कि वे अपनी मनमर्जी के थीम भी चुन सकते हैं, और मज़े की बात यह होती है कि यहां लॉजिस्टिक के झंझट से वे मुक्त होते हैं। क्रूज़ पर ही मेकअप, फोटोग्राफी-वीडियोग्राफी, स्पेस डेकोरेशन, केटरिंग, लाइव म्यूजि़क और एंटरटेनमेंट की सारी सुविधा होती है। वे चाहें तो अपने फोटोग्राफर भी ला सकते हैं।’

सोशल मीडिया पर भी होता है धमाल
इतनी सारी कवायद हो और सब गुपचुप या पर्सनल एलबमों तक सीमित कैसे रह सकता है? वैसे भी यह दौर तो ‘सोशल’ हो जाने का है, तो कपल्स भी अपने प्री-वेडिंग लम्हों का पूरा हाल सोशल मीडिया वेबसाइटों पर अपलोड करने से नहीं चूकते। फेसबुक पेज, इंस्टा स्टोरीज़ से लेकर यू-ट्यूब चैनलों और अपनी निजी वेबसाइट तक तैयार करवाते हैं। फिर शुरू होता है उन पर लाइक और कमेंट्स का खेल। परिचितों और परिजनों के अलावा अनजान लोगों तक की पहुंच कपल्स के बेहद अंतरंग पलों तक होती है। खैर, जो भी हो, प्री-वेडिंग शूट्स के साथ अब ढेर सारा रोमांस, एडवेंचर, मौज-मस्ती जुड़ चुकी है और जो आनंद-सुख की प्राप्ति कपल्स या उनके परिजनों को मिलती है, उससे पूरे खेल का पैसा भी वसूल  होता है।


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