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ब्रह्मा के यज्ञ का साक्षी ब्रह्मसरोवर

Posted On December - 8 - 2019

तीर्थाटन

विनोद जिंदल

कुरुक्षेत्र में इन दिनों अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का केंद्र बने विश्व प्रसिद्ध तीर्थ ‘ब्रह्मसरोवर’ का संबंध सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के साथ माना गया है। लोमहर्षण जी ने वामन पुराण में इसका जिक्र किया है। उन्होंने श्लोक लिखा है, जिसका अर्थ है- सबसे पहले उत्पन्न होने वाले कमलासन ब्रह्मा, लक्ष्मी सहित विष्णु और महादेव रुद्र को सिर झुकाकर प्रणाम करके मैं महान ब्रह्मसरोवर तीर्थ का वर्णन करता हूं।
एक अन्य श्लोक के अनुसार सबसे पहले इस पावन धरा को ब्रह्मवेदी कहा गया था। बाद में इसका नाम रामहृद हुआ और फिर बाद में राजर्षि कुरु द्वारा जोते जाने से इसका नाम कुरुक्षेत्र पड़ा। यह भी कहा जाता है कि ब्रह्मा जी ने पहला यज्ञ इसी स्थान पर किया था। इस पावन तीर्थ पर प्रत्येक अमावस्या, पूर्णिमा, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के अवसर पर विशाल मेला लगता है। दूर-दूर से श्रद्धालु स्नान, ध्यान और दर्शन के लिए इस तीर्थ पर आते हैं। वामन पुराण में लिखा है कि चतुर्दशी और चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी को इस तीर्थ पर स्नान व उपवास करने वाला व्यक्ति सूक्ष्मातिसूक्ष्म परब्रह्म का साक्षात्कार कर जन्म-मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है।
पिछले लगभग 30 साल से इस पवित्र तीर्थ पर गीता महोत्सव मनाया जाता है। यह गीता महोत्सव अब अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव के नाम से प्रसिद्ध है। इस तीर्थ के चारों तरफ सड़कें और पार्क हैं। रेलिंग से आगे सरोवर 15 फुट गहरा है। इस तीर्थ के दोनों भागों की लंबाई 3300 फुट और चौड़ाई 3000 फुट है। सरोवर के चारों ओर लाल पत्थर का प्लेटफार्म, परिक्रमा और सीढि़यां हैं। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा मुख्य गेट के साथ पूर्व और पश्चिम की तरफ महाभारत से जुड़े चित्र बनाए जा रहे हैं। चित्रों का विवरण भी दिया जा रहा है। वहीं, ज्योतिसर के पास से भाखड़ा नहर का पानी लाकर सरोवर को बहती अवस्था में कर दिया गया है। इससे सरोवर का पानी काफी साफ रहने लगा है।
23 नवंबर से ब्रह्मसरोवर पर अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव का आयोजन किया गया है। हजारों पर्यटक इस महोत्सव में भाग ले रहे हैं। कुरुक्षेत्र गीतामय नजर आ रहा है।

सरोवर के बीच सर्वेश्वर महादेव
ब्रह्मसरोवर के बीच में सर्वेश्वर महादेव मंदिर स्थित है। जनश्रुति के अनुसार ब्रह्मा जी ने सबसे पहले यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर तक पहुंचने के लिए एक सेतु का निर्माण भी किया गया है। यह मंदिर वास्तुकला का अनूठा उदाहरण है। इसके अलावा ब्रह्मसरोवर के तट पर पुरुषोत्तमपुरा बाग में भगवान श्रीकृष्ण के रथ की प्रतिमा स्थापित की गयी है। उसके पास कात्यायनी देवी और शिवजी का भव्य मंदिर है। पुरुषोत्तमपुरा बाग के सामने द्रौपदी कूप है। इसके सामने ही एक प्राचीन शिव मंदिर है। उसी परिसर में हनुमान जी का प्राचीन मंदिर है। ब्रह्मसरोवर की उत्तरी दिशा में एक प्राचीन घाट के अवशेष भी देखे जा सकते हैं। इस स्थान को शेरों वाला घाट के नाम से जाना जाता है। इस घाट का निर्माण 1855 में हुआ था। इसके लगभग सामने विश्वविद्यालय की दीवार की ओर प्राचीन बौद्ध स्तूप स्थित है। यह स्तूप 7वीं सदी का माना जाता है। सरोवर के पूर्वी भाग में पवित्र सन्निहित सरोवर स्थित है। इसी भाग की ओर श्री चिरंजीपुरी जी महाराज द्वारा 18 मंजिला मंदिर बनवाया जा रहा है। पास ही नंदा जी स्मारक और नंदा जी का बुत स्थित है। इससे आगे तिरुपति बालाजी मंदिर, अक्षरधाम मंदिर अौर गीता ज्ञान संस्थान विकसित किए जा रहे हैं।


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