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बच्चे को सिखाएं जीवन का व्यावहारिक पाठ

Posted On December - 1 - 2019

शिखर चंद जैन

कई पेरेंट्स अपने बच्चे को किसी नामी स्कूल में एडमिशन दिलाकर निश्चिंत हो जाते हैं कि बस अब उनका बच्चा एक कामयाब इनसान बन जाएगा। अगर आप भी ऐसा सोचती हैं तो अपनी गलतफहमी दूर कर लीजिए। स्कूल में बच्चा किताबों के पाठ पढ़ता है जबकि आपको उसे जीवन के व्यावहारिक पाठ पढ़ाने हैं। तभी आपका लाडला सफलता की सीढ़ियों पर चढ़कर अपनी मंजिल हासिल कर पाएगा।
बनाएं जिज्ञासु
बच्चे स्वभाव से जिज्ञासु होते हैं। हर नई चीज को देखते ही उनके मन में तरह-तरह के सवाल उठते हैं लेकिन कुछ पेरेंट्स उन्हें डांटकर चुप करवा देते हैं। ऐसा करके अनजाने में ही वे अपने बच्चे के बौद्धिक विकास को रोकते हैं। सवाल पूछने की बच्चे की इस प्रवृत्ति को प्रोत्साहन दें और उनकी जिज्ञासाओं के तर्कपूर्ण उत्तर दें। जिन सवालों के जवाब आपको मालूम नहीं, अन्य स्त्रोत से जानकारी लेकर उनकी जिज्ञासा  शांत करें।
रुचि और रुझान जानें
हर बच्चे को किसी अलग एक्टिविटी में आनंद आता है। आप भी गौर करें कि आपका बच्चा अपने पसंदीदा कार्टून कैरेक्टर की किस बात पर सबसे ज्यादा खुश होता है। घर में वो इंडोर गेम्स खेलता है या खिलौनों से खेलता है तो उसकी रुचि किस प्रकार के खिलौनों में है? और वह उनसे क्या बातें करता है। क्या उसे ड्राइंग करने या रेखाचित्र बनाने में मज़ा आता है? आउटडोर गेम्स में उसकी रुचि किस खास खेल में है? इन बातों पर गौर करते हुए उसे उसकी रुचि विकसित करने में मदद दें और उसका सहयोग करें।
सिखाएं प्रॉब्लम सोल्व करने की कला
बच्चों को अपने गेम्स या टॉयज के चयन में, ड्रेस के चयन में, होमवर्क में कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। आप उसकी मुश्किलें खुद न सुलझाएं बल्कि इस प्रोसेस में उसकी मदद करें। उसे समस्या को समझने, उसका विश्लेषण करने और हल सोचने की कला सिखाएं। यह गुण बच्चे के जिंदगी भर काम आएगा।
स्पेस दें
उसे किसी पक्षी की तरह आजाद उड़ने दें। हां, बीच-बीच में उसे क्या सही है और क्या गलत है, यह जरूर बताएं। लेकिन पेरेंटिंग के नाम पर उसका बौद्धिक और शारीरिक विकास होने से न रोकें। बच्चे खिलखिलाकर हंसेंगे, खेलेंगे और मस्त रहेंगे तभी उनका सर्वांगीण विकास होगा। उसकी गाइड बनें, रिंगमास्टर नहीं।
सिखाएं पेशेंस की कला
जिंदगी में बच्चों को भी तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कभी स्कूल बस से उतरने में उसका नंबर लास्ट हो जाता है, कभी टीचर उसे नाराज़ होकर डांट देती है, कभी घर में कुछ मिल रहा हो और उसकी बारी ही नहीं आती तो ऐसे में वह रोने लगता है। अपने बच्चे को शुरू से ही धैर्य रखने की आदत सिखाएं और कूल रहना सिखाएं तो उसका मन अशांत नहीं होगा।
सिखाएं अनुशासन
कई पेरेंट्स अपना हर काम आज की जगह कल करने के आदी होते हैं। उनके बच्चे भी धीरे-धीरे यही सीखने लगते हैं। इसलिए बच्चे को टालू टेक्नोलॉजी न सिखाकर अनुशासन सिखाएं और आज का काम आज करने की आदत डालें। उसे बताएं कि कल कभी नहीं आता, इसलिए आज के लिए निर्धारित सभी जरूरी काम आज ही करने चाहिए।
शॉर्टकट नहीं, मेहनत सिखाएं
कुछ पेरेंट्स जल्दबाजी के चक्कर में या खुद को माथापच्ची से बचाने की कोशिश में अपने बच्चों का होमवर्क या तो खुद कर देते हैं या किसी बच्चे की कॉपी से जल्दी-जल्दी नकल कर लेने की सलाह देते हैं। ऐसा करने वाले पेरेंट्स उसकी नींव खुद ही कमजोर कर देते हैं। बच्चे को सिर्फ होमवर्क ही नहीं बल्कि अपने दूसरे काम भी खुद करने दें। उसे मेहनत करने की आदत डालें और घरेलू कार्यों में भी उनकी क्षमता के अनुसार मदद लें।
हर जि़द पूरी न करें
कई बार बच्चे को खुश रखने की कोशिश में हम उसकी हर मांग पूरी करते चले जाते हैं। ऐसे में बच्चा जिद्दी हो जाता है। उसे लगता है कि जो मांग लिया वह उसे मिलना ही चाहिए। न मिलने पर वह कोहराम मचा देता है। ऐसे बच्चे आगे चलकर उद्दण्ड हो जाते हैं और कई बार तो हिंसक स्वभाव के भी हो जाते हैं। बेहतर होगा कि आप सिर्फ उसकी जाय़ज और आपकी आर्थिक हैसियत के मुताबिक डिमांड को ही स्वीकार करें। बाकी चीजों के लिए उसे ‘ना’ कहने की वजह बताएं।
सिखाएं प्रोजेक्ट संभालना
शुरू से ही बच्चों को एक्टिव रखने और उनकी क्रिएटिविटी को निखारने के लिए उन्हें छोटे-छोटे प्रोजेक्ट सौंपें और अपने मार्गदर्शन में उनसे ये प्रोजेक्ट पूरे करवाएं। आप किसी भी एक प्रोजेक्ट पर अपने बच्चे के साथ काम कीजिए और उसे देखने दीजिए कि कोई भी चीज कैसे पूरी की जाती है। इसके बाद कोई भी काम उसे अपने-आप ज्यादा से ज्यादा करने दीजिए। इससे उसमें सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ेगा।


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