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निर्माण के दौरान नहीं उड़ा सकते धूल

Posted On December - 15 - 2019

पुष्पा गिरिमाजी

मैं राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र स्थित एक को-ऑपरेटिव ग्रुप हाउसिंग सोसायटी में रहता हूं। मेरे घर के सामने बने मकानों में से एक की मिल्कियत पिछले साल बदल गयी और तब से इस मकान के नये मालिक इसका पुनर्निर्माण करा रहे हैं। मार्बल कटिंग के कारण लगातार शोर हो रहा है और धूल उड़ रही है, इसके अलावा मालिक या ठेकेदारों ने बारीक रेत का ढेर निर्माण स्थल के बाहर फुटपाथ पर लगा दिया है। इन वजहों से मैं और मेरा परिवार प्रदूषण की दिक्कतों को झेल रहा है। तमाम अनुरोधों के बावजूद न तो सोसायटी और न ही मालिकों ने कोई कार्रवाई की। क्या मैं इस परेशानी के लिए मालिक/ठेकेदार और सोसायटी के पदाधिकारियों को जिम्मेदार ठहरा सकता हूं?
आपको इस बात का जरूर भान होना चाहिए कि मालिक और ठेकेदार राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्माण उद्योग के संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देशों का उल्लंघन कर रहे हैं और ये निर्देश सभी तरह के निर्माणों में लागू होते हैं, चाहे वे छोटे ही क्यों न हों। आपकी सोसायटी की भी यह जिम्मेदारी है कि वह इनका अनुपालन सुनिश्चित करे।
वर्धमान कौशिक बनाम भारत सरकार के मामले में अप्रैल 2015 में एनजीटी ने यह स्पष्ट किया था कि किसी भी कालोनी के पास फुटपाथ या सड़क पर किसी भी तरह की निर्माण सामग्री, खासतौर पर रेत को नहीं रखा जा सकता। यहां तक कहा गया था कि जो भी सामग्री रखी जाए, वह पूरी तरह से ढकी हो। यह भी अनिवार्य किया गया था कि बिल्डर निर्माण स्थल के आसपास बैरिकेड लगाएं। साइट पर उड़ रही धूल पर पूरी तरह नियंत्रण रखा जाना चाहिए। एनजीटी ने पत्थर तराशे जाने के दौरान पानी से गीला किए जाने को भी अनिवार्य बनाया और कामगारों के लिए सुरक्षात्मक उपाय, जिसमें मॉस्क लगाना भी शामिल है, की अनिवार्यता का भी निर्देश दिया। निर्माण सामग्री को इधर से उधर ले जाने और कचरे के निपटान को लेकर भी निर्देश दिए गए थे।
एनजीटी ने एनसीआर में वायु प्रदूषण की गंभीर स्थिति का हवाला देते हुए कहा कि कोई भी व्यक्ति यदि निर्देशों का उल्लंघन करते पाया गया तो उसे जुर्माना भरना होगा। यह जुर्माना एनजीटी एक्ट के सेक्शन 15 के तहत प्रदूषक पर सिद्धांतत: लगाया जाएगा। इसमें साइट पर निर्माण गतिविधि में नियम के उल्लंघन पर 50 हजार प्रति गलती और निर्माण सामग्री को ट्रक या अन्य वाहन के जरिये इधर से उधर ले जाने के दौरान प्रति गलती पांच हजार का जुर्माना तय किया गया। एनजीटी ने कहा कि इस तरह की कार्रवाई बिल्डर, मालिक, ट्रांसपोर्टर के खिलाफ कानून के अनुसार होने वाली कार्रवाई के अलावा होगी।
एनजीटी ने जो कहा वह यहां लागू होता है, जिसमें कहा गया था, ‘व्यावसायिक गतिविधियों पर किसी व्यक्ति के समुचित एवं स्वच्छ पर्यावरण में जीने के संवैधानिक अधिकार को वरीयता दी जानी चाहिए।’ इसलिए कृपया आगे बढ़ें, अपनी सोसायटी के पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारी का अहसास करायें और मालिक/बिल्डर की एनजीटी में शिकायत करें। इसके अलावा उचित कानूनी कार्रवाई के लिए नागरिक प्राधिकरण और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड में भी जायें।
कोई अन्य दिशा-निर्देश जिसका हवाला दिया जा सके…
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 2017 में निर्माण सामग्री और निर्माण एवं विध्वंस के दौरान धूल नियंत्रण संबंधी दिशा-निर्देशों को जारी किया गया है। इसमें निर्माण उद्योग एवं उस दौरान उठने वाली धूल पर नियंत्रण के बारे में भी स्पष्ट किया गया है।

पुष्पा गिरिमाजी

मंत्रालय ने 25 जनवरी 2018 को पर्यावरण (संरक्षण) संशोधन नियमों को सभी निर्माण एवं विध्वंस गतिविधियों में धूल नियंत्रण मानकों को अनिवार्य करने के लिए अधिसूचित किया और इसे उन सभी शहरों, कस्बों के लिए लागू किया गया जहां राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों में धूल कण निर्धारित सीमा से अधिक हैं। नियम के तहत खुले में निर्माण सामग्री की कटिंग और पिसाई को प्रतिबंधित किया गया। इसी तरह धूल उड़ाने वाली किसी भी निर्माण सामग्री को खुला नहीं छोड़ने का निर्देश दिया गया। इसलिए कानून का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ अपनी आवाज को उठायें। दूसरों को भी आवाज उठाने के लिए प्रोत्साहित करें। यदि लगता है कि उल्लंघन हो रहा है तो संबंधित एजेंसियों से शिकायत करें और कार्रवाई की मांग करें। साथ ही उनसे कहें कि वे की गयी कार्रवाई के बारे में आपको बतायें।


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