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कानून कठोर करने की मांग, सरकार तैयार

Posted On December - 3 - 2019

नयी दिल्ली में सोमवार को हैदराबाद गैंगरेप-हत्या प्रकरण के विरोध में प्रदर्शन करते महिला और युवा संगठनों के कार्यकर्ता। -मानस रंजन भुई

नयी दिल्ली, 2 दिसंबर (एजेंसी)
हैदराबाद में महिला डॉक्टर के साथ गैंगरेप और उसकी हत्या की वारदात के विरोध में देशभर में प्रदर्शनों के बीच सोमवार को संसद में भी यह मुद्दा गूृंजा। संसद के दोनों सदनों में विभिन्न दलों के सदस्यों ने आईपीसी, सीआरपीसी में संशोधन और बलात्कार के मामले में कानून को ज्यादा कठोर बनाने की मांग की। इस पर सरकार ने कहा कि वह आईपीसी, सीआरपीसी में संशोधन करने को तैयार है। गृह राज्य मंत्री जी. किशन रेड्डी ने लोकसभा में कहा कि इस बारे में सभी राज्यों को चिट्ठी लिखी गई है। विधि और पुलिस विभाग से भी सुझाव आमंत्रित किये गए हैं। ब्यूरो आॅफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट से भी कहा गया है। हम संशोधन करने को तैयार हैं।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हैदराबाद की वारदात पर पूरे सदन की तरफ से दुख प्रकट करते हुए कहा कि ऐसे अपराध हमें चिंतित भी करते हैं और आहत भी करते हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इससे अधिक अमानवीय कृत्य नहीं हो सकता है। ऐसी वारदातें रोकने के लिए यदि सदन में कठोर कानून बनाने पर सहमति बनेगी, तो सरकार इसके लिए तैयार है।

अपील और माफी का न हो अधिकार : नायडू
राज्यसभा में सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि हैदराबाद की घटना पूरी मानवता के लिए शर्म की बात है और ऐसी घटनाएं पूरे देश में हो रही हैं। नायडू ने कहा कि महिलाओं के सम्मान एवं उनकी सुरक्षा को किसी भी तरह का खतरा नहीं होना चाहिए। ऐसे मामलों में निचली अदालतों में सजा सुनाए जाने के बाद दोषी न केवल आगे की अदालतों में अपील करते हैं, बल्कि वह माफी के लिए क्षमा याचिका भी देते हैं। इस चलन की समीक्षा की जानी चाहिए। क्या ऐसे व्यक्ति को माफी के बारे में सोचा जा सकता है? नायडू ने कहा कि हमें कानून व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था की खामियों को खोजना होगा। नायडू ने कहा, ‘बहुत देर हो चुकी है। हमें नए विधेयक की जरूरत नहीं है। हमें जरूरत है तो राजनीतिक इच्छाशक्ति की, प्रशासनिक इच्छाशक्ति की और सोच बदलने की।’ सभापति ने सुझाव दिया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध के दोषियों की तस्वीरें सार्वजनिक की जानी चाहिए ताकि उनके मन में डर बैठे। विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए हर स्तर पर पूरे समाज को खड़ा होना पड़ेगा। दोषियों को धर्म या जाति के भेदभाव से अलग हट कर कठोरतम सजा दी जानी चाहिए।


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