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कल करे सो आज कर

Posted On December - 8 - 2019

देवेन्द्रराज सुथार

पिछले साल डाक विभाग ने अखिल भारतीय पत्र लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया था। प्रतियोगिता के लिए पत्र भेजने की अंतिम तिथि एक महीने बाद की थी। सो, मैंने प्रतियोगिता के विज्ञापन की कतरन किताब के पन्नों के बीच में डालते हुए सोचा कि बाद में पत्र लिख दूंगा, अभी तो काफ़ी समय बाक़ी है। थोड़े दिनों के बाद मैं प्रतियोगिता के बारे में भूल गया और अपने कॉलेज की पढ़ाई में व्यस्त हो गया। लेकिन, पत्र भेजने की अंतिम तिथि के एक दिन पहले शुक्रवार को रात आठ बजे जब मैंने हिन्दी के टेस्ट की तैयारी के लिए अपनी व्याकरण की किताब खोली तो वह विज्ञापन मेरे सामने आ गया, जिसको मैंने एक महीने पहले रखा था। प्रतियोगिता के नियमानुसार मेरे पास पूरी रात और शनिवार के आधे दिन का समय अभी शेष था।
मैंने यह सोचते हुए जैसे ही रात को लिखना शुरू किया तो बिजली चली गई। मैं सो गया और सुबह जल्दी उठकर लिखने का निश्चय किया। लेकिन, मुझसे सुबह जल्दी उठा नहीं गया और जब उठा तो मुझे जुकाम ने जकड़ लिया। इस कारण मैं शनिवार को भी कुछ लिख नहीं पाया। हाथ आए मौके को गंवा देने के बाद मेरे पास मलाल करने के सिवाय कुछ नहीं बचा था। लेकिन, होनी को कुछ और ही मंज़ूर था। जब मैं अगले दिन अख़बार पढ़ने बैठा तो यह पढ़कर मेरी खुशी का ठिकाना नहीं रहा कि प्रतियोगिता के लिए पत्र भेजने की अंतिम तिथि पन्द्रह दिन आगे बढ़ा दी गई है।
मैंने उसी समय लिखना आरंभ किया। अब मेरा जुकाम भी ठीक हो गया था। अगले दिन तक मैंने पूरा पत्र लिखकर भेज दिया। जब परिणाम आया तो मेरा प्रथम स्थान था। मुझे 25 हज़ार के इनामी पुरस्कार व प्रमाण पत्र से पुरस्कृत किया गया। यदि प्रतियोगिता की तारीख़ आगे नहीं बढ़ती तो मैं चाहकर भी यह पुरस्कार जीत नहीं पाता। इसके बाद मैंने किसी भी काम को कल पर टालना छोड़ दिया। ‘कल करे सो आज कर’ को अपना मंत्र बना लिया।


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