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आढ़तियों, खरीद एजेंसियों की रही मनमानी,किसानों ने मजबूरी में बेचा

Posted On December - 3 - 2019

अम्बाला में अनाज मंडी। -मैनी

ट्रिब्यून न्यूज सर्विस
चंडीगढ़, 2 दिसंबर
हरियाणा की अनाज मंडियों में धान घोटाला सामने आ चुका है। आढ़तियों व खरीद एजेंसियों की मनमानी के शिकार किसानों को औने-पौने दामों पर अपना धान बेचना पड़ा। कभी नमी के नाम पर तो कभी वैरायटी के नाम पर सरकारी खरीद एजेंसियों ने किसानों का धान खरीदने से साफ मना कर दिया। झंझट से बचने के लिए किसानों को 200 से 300 रुपये प्रति क्विंटल के कम रेट पर मजबूरी में अपना धान बेचना पड़ा।
बताते हैं कि खरीद एजेंसियों ने इस काम में आढ़तियों को भी साझीदार बनाया। किसानों के पास इतना वक्त नहीं था कि वे अपना माल बेचने के लिए खरीद एजेंसियों की शर्तों को पूरा कर सकें। लिहाजा उनका कम रेट पर खरीदा गया धान कागजों में अधिक रेट पर दिखाया गया। उदाहरण के लिए यदि धान का रेट 1800 रुपये क्विंटल है, तो उसे 1600 रुपये क्विंटल में खरीदा गया और कागजों में रेट 1600 रुपये प्रति क्विंटल दिखाया गया है।
बताया गया है कि खरीद एजेंसियों व आढ़तियों की इस मनमानी से किसानों को दो सौ रुपये प्रति क्विंटल का मोटा नुकसान हुआ है। इन 200 रुपये की बंदरबांट खरीद एजेंसियों व आढ़तियों के बीच होने की सूचनाएं हैं। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और अभय सिंह चौटाला ने यह मुद्दा विधानसभा में उठाया। इसके बाद मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने नेता विपक्ष हुड्डा व अभय चौटाला की ही जांच कमेटी बना दी, लेकिन मसला ज्यों का त्यों बरकरार रहा।
इधर, हरियाणा सरकार ने धान खरीद में घोटाले की गाज चावल मिल मालिकों पर डालनी शुरू कर दी है। मिलों में धान व चावल के स्टाॅक का फिजिकल वेरीफिकेशन किया जा रहा है। ऐसा भी नहीं है कि चावल मिलों में सब कुछ ठीकठाक है। मिलों में कम माल है और बाहर का धान व चावल लाकर स्टाॅक पूरा किया जा रहा है। इसके बावजूद जांच टीमें मुख्य मुद्दे से भटककर चावल मिल मालिकों को घेरने पर अटक गई हैं। इससे न किसानों का भला हो रहा और न ही मिल मालिकों को न्याय मिल पा रहा है।
किसानों के नुकसान का पता लगाने की बजाय मिलों की निगरानी
जांच एजेंसियों को किसानों के साथ हुई ज्यादती की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। किसानों को किस तरह से दो सौ से तीन सौ रुपये क्विंटल का नुकसान हुआ और उसकी भरपाई कैसे हो सकती है? इस दिशा में जांच करने की बजाय जांच एजेंसियां चावल मिलों में घुस गई हैं। राज्य में 1300 से अधिक चावल मिलें हैं। फिजिकल वैरीफिकेशन में हालांकि कुछ मिलों में भी गड़बड़ पाई गई है। एक सवाल यह भी उठाया जा रहा है कि हरियाणा में धान उत्पादन के लिहाज से करीब 65 लाख मीट्रिक टन धान की आवक मंडियों में होने का अनुमान था, लेकिन इस बार 79 लाख मीट्रिक टन धान की आवक हो चुकी है। जब उत्पादन कम होना था और खरीद के इंतजाम भी कम धान के थे, तो इतना धान कैसे खरीद लिया गया है।
आरोप : मिलर्स को तंग कर रही सरकार
हरियाणा प्रदेश व्यापार मंडल के अध्यक्ष बजरंग गर्ग का कहना है कि राइस मिलों को फिजिकल वेरीफिकेशन की आड़ में मिलर्स को नाजायज तंग किया जा रहा है। राइस मिलर सरकार को जीरी देने व जीरी के बदले चावल देने को तैयार हैं तो ऐसे में मिलरों को बार-बार तंग करना उचित नहीं है। जीरी की खरीद सरकारी एजेंसियों ने की है और मार्केट बोर्ड के माध्यम से जीरी की खरीद हुई। इसका रिकॉर्ड मार्केट बोर्ड व खरीद एजेंसी के पास होता है।


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