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अस्पताल स्वयं बीमार, भला कैसे हो रोगियों का उपचार

Posted On December - 8 - 2019

ललित शर्मा/हप्र
कैथल, 7 दिसंबर

कैथल जिले का नागरिक अस्पताल। -हप्र

जिले में बिना डाॅक्टरों के स्वास्थ्य सेवाओं का दम निकला पड़ा है। बिना डाॅक्टरों के मरीज दर्द से कराहने को मजबूर हैं। यह हालत न केवल कैथल में जिला स्तर पर बने जिला नागरिक अस्पताल की है बल्कि जिले में अन्य जगहों पर स्थापित पीएचसी व सीएचसी में भी यही हालात हैं। यहां 7 डिप्टी सीएमओ, 5 एसएमओ, 30 एमओ के पद लंबे समय से खाली पड़े हैं। यहां खाली पड़े स्पेशलिट डाॅक्टरों के पदों की वजह से मरीजों को ठीक से इलाज नहीं मिल रहा है। पिछली बार राज्य में भाजपा की सरकार बनी। भाजपा सरकार में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज बने। लोगों को उम्मीद जगी थी कि शायद यहां स्वास्थ्य सेवाओं के दिन बहुरेंगे लेकिन पिछले पांच साल बीत जाने के बाद भी वही ढाक के तीन पात है। यहां के लोगों का कहना है कि विज साहब आप एक गेड़ा यहां भी मार जाओ ताकि यहां के हालात बदल जायें। जिलेभर में डिप्टी सीएमओ के 8 पद स्वीकृत है लेकिन मात्र एक पद पर ही नियुक्ति है। अन्य सभी पद खाली होने से न केवल व्यवस्था बिगड़ रही है बल्कि उक्त डिप्टी सीएमओ पर भी काम का बोझ बढ़ रहा है।
राजौंद, कौल, पूंडरी, गुहला चीका व कलायत के हस्पताल बिना डिप्टी सीएमओ के चल रहे हैं। सीवन को छोड़कर जिले में अन्य जगहों एसएमओ के पद भी रक्त पड़े हैं। खाली पदों के इस बढ़ते क्रम में अगर बात करें तो जिला नागरिक अस्पताल में प्रिंसिपल मेडिकल ऑफिसर के पद भी रक्त पड़े हैं। इसी प्रकार जिले में एमओ के 55 स्वीकृत पदों में से 30 पद रिक्त पड़े हैं।

सरकारी में डाॅक्टर नहीं, प्राइवेट रात को दरवाजा नहीं खोलते
यहां के लोगों का कहना है कि यहां सरकारी अस्पताल में डाक्टर नहीं है। ऐसे में वे इलाज करवाने के लिए जायें तो जायें कहां। यहां डाॅ. महेन्द्र शाह व सिगलस अस्पताल को छोड़कर रात के समय कोई भी डाॅक्टर मरीज का इलाज नहीं करता है। बेशक कैथल में दर्जनों प्राइवेट अस्पताल हैं लेकिन इन दो अस्पतालों को छोड़कर बाकी कोई अस्पताल मरीजों का इलाज नहीं करता है।

”मैं यहां पिछले एक वर्ष से हूं। तभी से ये पद रिक्त पड़े हैं। हम हर महीने उच्च अधिकारियों को अपनी रिपोर्ट बनाकर भेजते हैं। अगर डाॅक्टरों की नियुक्ति होती है तो शायद कोई डाक्टर यहां आये।”
-सुरेन्द्र नैन, सीएमओ


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