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हिंदू-मुस्लिम एकता को नुकसान पहुंचाएगी पुनर्विचार याचिका

Posted On November - 25 - 2019

नयी दिल्ली, 24 नवंबर (एजेंसी)
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) के अध्यक्ष गयूरुल हसन रिजवी ने रविवार को कहा कि सुप्रीमकोर्ट के अयोध्या पर आए फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करना मुस्लिमों के हित में नहीं होगा और इससे दोनों समुदायों में एकता को ‘नुकसान’ पहुंचेगा। अल्पसंख्यक आयोग के प्रमुख ने कहा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने से हिंदुओं के बीच ऐसा संदेश जाएगा कि वे राम मंदिर के निर्माण के रास्ते में रोड़े अटका रहे हैं। उन्होंने मुस्लिम पक्ष से मस्जिद के लिए दी गई 5 एकड़ की वैकल्पिक भूमि को स्वीकार करने का भी अनुरोध किया।
एक भेंट में रिजवी ने कहा कि एनसीएम ने एक बैठक की थी और उसके सभी सदस्यों ने एक सुर में कहा था कि फैसले को स्वीकार करना चाहिए। एनसीएम अध्यक्ष ने कहा कि मुस्लिमों को अयोध्या में मंदिर बनाने में मदद करनी चाहिए जबकि हिंदुओं को मस्जिद के निर्माण में मदद करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यह दोनों समुदायों के बीच सामाजिक सौहार्द को मजबूत करने में मील का पत्थर साबित होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि एआईएमपीएलबी और जमीयत जैसे मुस्लिम संगठन अपने वादे से मुकर रहे हैं। रिजवी ने पूछा, ‘सिर्फ अभी नहीं बल्कि कई वर्षों से वे कह रहे हैं कि वे सुप्रीमकोर्ट के फैसले को स्वीकार करेंगे तो फिर पुनर्विचार की क्या जरूरत है?

उन्होंने पूछा कि पुनर्विचार याचिका दायर करने का क्या औचित्य है जब वे भी कह रहे हैं कि याचिका ‘100 फीसदी’ खारिज कर दी जाएगी। एनसीएम प्रमुख ने आरोप लगाया कि ओवैसी मुस्लिमों का इस्तेमाल करके राजनीति करते हैं और वह ‘उन्हें ऐसे मुद्दों में उलझाए रखना चाहते हैं ताकि उन्हें वोट मिल सकें।’


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