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हर बाधा पर भारी तरक्की का नज़रिया

Posted On November - 11 - 2019

रेनू सैनी

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम का कहना था कि, ‘सपना वह नहीं जो आप नींद में देखते हैं। यह तो एक ऐसी चीज़ है जो आपको नींद ही नहीं आने देती।’ ऐसा नहीं है कि केवल महान हस्तियों पर ही यह बात लागू होती है। आज तो हमारे इर्दगिर्द के अनेक लोग ऐसे हैं जो इस बात को मानते हैं और कड़ी मेहनत कर अपनी किस्मत को अपने हाथों में कैद कर लेते हैं। किस्मत व्यक्ति खुद बनाता है। यह हमारे ऊपर निर्भर करता है कि हम गुलाबों की टहनियों पर कांटे देखते हैं अथवा कंटीली झाड़ियों पर गुलाब। संकल्प के धनी व्यक्ति समस्याओं से ही अवसर उत्पन्न कर लेते हैं। हरप्रीत सिंह ने वर्ष 2016 में यूपीएससी की परीक्षा के माध्यम से सीमा सुरक्षा बल में असिस्टेंट कमांडेंट का पद प्राप्त किया। उनकी नियुक्ति भारत-बांग्लादेश सीमा पर नियुक्त हुई। 24 घंटे की सख्त ड्यूटी के बाद उनकी आंखों में सतरंगी सपने थे जो उन्हें सोने नहीं देते थे। वे खाली समय में पढ़ाई करते। उन्होंने वर्ष 2017 में सिविल सर्विस की परीक्षा दी और वे पास हो गए, लेकिन वे अपने रैंक से संतुष्ट नहीं हुए। वे दोबारा इस परीक्षा में बैठे। वर्ष 2018 में वे टॉप 20 में अपनी जगह बनाने में कामयाब रहे।
इसी तरह 34 साल के रामजल राजस्थान के एक दूरस्थ गांव के दिहाड़ी-मजदूर के बेटे हैं। उनका विवाह कम उम्र में ही हो गया था। वे तीन बेटियों के पिता हैं। उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से ग्रेजुएट डिग्री प्राप्त की। इसके बाद दूरस्थ शिक्षा के माध्यम से एमए में प्रवेश लिया। वे दिल्ली आ गए और यहां पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सुरक्षाकर्मी की नौकरी करने लगे। जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय का माहौल देखकर उनके मन में भी पढ़ाई करने की उमंगें हिलोरें लेने लगीं। बस फिर क्या था, उन्होंने जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से प्रवेश परीक्षा पास की और रशियन भाषा में बीए करने लगे। अब उनका सपना बीए करने के बाद अच्छी नौकरी तलाश करने का है। इसी तरह केरल की कुरुचिया जनजाति की श्रीधन्या सुरेश इस वर्ष की अखिल भारतीय सिविल सेवा परीक्षा में सफल रही है। वे केरल के अत्यंत पिछड़े इलाके वायनाड से संबंधित हैं। इन सभी लोगों ने परेशानियों को कभी अपने मार्ग की बाधा नहीं समझा। इन्होंने अपने सपनों को इतना बड़ा कर लिया कि बाधाओं ने उनके पैरों में पंख लगा दिए। इन्हीं पंखों के माध्यम से इन्होंने धीरे-धीरे उड़ान भरी और फिर स्वयं को इतना मजबूत बना लिया कि अब ये सभी दूसरों को पंख प्रदान करने की सामर्थ्य रखते हैं।
जो व्यक्ति रचनात्मक और क्रियाशील होते हैं, वे अपने लिए कहीं से भी सीढ़ी बना लेते हैं। रातोंरात सफलता किसी को नहीं मिलती। धाविका हिमा दास ने यदि आज पूरे विश्व में अपनी योग्यता का लोहा मनवाया है तो इसलिए क्योंकि उसके अंदर एक जुनून था, आग थी, उत्साह था और आगे बढ़ने की ललक थी। इसलिए कोई भी बेड़ी हिमा दास को अधिक देर तक नहीं जकड़ पाई। जब उसके पास दौड़ने के लिए जूते नहीं होते थे तो उसने अपने दिमाग से दौड़ने का एक नया रचनात्मक तरीका निकाला। वह रेत में दौड़ने का अभ्यास करने लगी। फलस्वरूप रेत पर दौड़ने के अभ्यास ने ही उसे सब से अलग कर सर्वश्रेष्ठ धावकों में खड़ा कर दिया। अपनी रोचक पुस्तक न्यू थिंक में ‘एडवर्ड डे बोनो लेटरल थिंकिंग’ के द्वारा अपनी रचनात्मकता को बढ़ाने की बात कहते हैं। वे कहते हैं, ‘आप उसी गड्ढे को ज्यादा गहरा खोदकर किसी दूसरी जगह गड्ढा नहीं खोद सकते।’ वर्टिकल थिंकिंग का मतलब है, एक ही जगह पर खुदाई करते रहना। लेटरल थिंकिंग दूसरी जगह पर गड्ढा खोदने के बारे में है। व्यक्ति की परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों लेकिन यदि उसकी अंदरूनी क्षमता और प्रतिभा मजबूत है तो आप दूसरी जगह से अपने लिए कोई न कोई मार्ग अवश्य निकाल लेंगे।
रचनात्मकता केवल कलाकारों अथवा आविष्कारकों की बपौती नहीं है। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर स्वतंत्र विचार की शक्ति है। यदि व्यक्ति सकारात्मक होकर सोचे तो वह अपने जीवन को एक नया आयाम दे सकता है। रचनात्मकता के लिए यह जरूरी है कि आप जिस दिशा की ओर बढ़ने का प्रयास कर रहे हों, उस ओर सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करें। हमारा मस्तिष्क हर पल सोचता रहता है। जब हम गहन निद्रा में होते हैं तब भी दिमाग चलता रहता है और नये-नये दृष्टिकोणों के साथ जीवन को देखता है। जो लोग केवल एक ही ढर्रे पर अपना जीवन बिताते हैं उनमें से लगभग 80 प्रतिशत लोग अपने पूरे जीवन में एक नया विचार तक नहीं सोचते। कभी-कभी लोगों के विचार आसपास के दोषपूर्ण परिवेश मंे ढल कर नकारात्मक रूप ले लेते हैं। ये मन को और अधिक तनावग्रस्त कर देते हैं। इसलिए अपने आसपास की घटनाओं को अपना जीवन न समझें। बल्कि खुले आसमान की ओर देखें। खुले आसमान में आप अपने पंखों को पूरा पसार सकते हैं, नये दृष्टिकोण, नये विचार से जीवन को एक सुनहरे मार्ग की ओर ले जा सकते हैं। बेशक, आज आपके पास सुविधाएं न हों, मार्ग न हों, लेकिन यदि आप इसी समय से नये दृष्टिकोण के साथ एक नई राह को अपनाएंगे तो आपके मार्ग में बंद हर दृष्टिकोण खुल जाएगा।


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